कौन हैं सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र? अब बनेंगे मंत्री! भाई की हुई थी दर्दनाक मौत, जाति से प्रोफेशन तक की कहानी
Siddaramaiah Son Yathindra Siddaramaiah Profile: कर्नाटक की राजनीति में 28 मई को हुए बड़े उलटफेर के बाद अब नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद डीके शिवकुमार का अगला मुख्यमंत्री बनना पूरी तरह तय माना जा रहा है। इस बड़े फेरबदल के बीच दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक जिस एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है सिद्धारमैया के छोटे बेटे डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया का।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में राहुल गांधी की टीम और सिद्धारमैया के बीच हुई मैराथन बैठक में इस बात पर गंभीर चर्चा हुई है कि नई शिवकुमार कैबिनेट में डॉ. यतींद्र को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। आइए जानते हैं कि पेशे से डॉक्टर यतींद्र आखिर कौन हैं, उनकी जाति क्या है, वे कितनी संपत्ति के मालिक हैं और कैसे एक पारिवारिक हादसे ने उन्हें राजनीति के अखाड़े में लाकर खड़ा कर दिया। इससे पहले सिद्धारमैया के बड़े बेटे राकेश सिद्धारमैया को उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी समझा जाता था लेकिन उनकी दर्दनाक मौत ने यतींद्र की राजनीति में एंट्री करवाई।

▶️कौन हैं डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया? (Who is Yathindra Siddaramaiah)
डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के छोटे बेटे हैं। पेशे से डॉक्टर रहे यतींद्र ने लंबे समय तक राजनीति से दूरी बनाए रखी थी। वह पैथोलॉजिस्ट के तौर पर काम करते थे और सार्वजनिक जीवन से काफी हद तक दूर रहते थे। लेकिन परिवार में हुई एक बड़ी त्रासदी ने उनकी जिंदगी और करियर दोनों की दिशा बदल दी।
यतींद्र कांग्रेस पार्टी से जुड़े और बाद में वरुणा विधानसभा सीट से विधायक भी बने। फिलहाल वे कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने संगठन और सत्ता दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की है।
▶️बड़े भाई की दर्दनाक मौत और मजबूरी में यतींद्र की राजनीति में एंट्री
डॉ. यतींद्र का राजनीति में आना कोई सोची-समझी रणनीति नहीं, बल्कि एक बेहद दुखद पारिवारिक हादसा था। दरअसल सिद्धारमैया के बड़े बेटे राकेश सिद्धारमैया को उनका असली राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था। राकेश अपने पिता के विधानसभा क्षेत्र की कमान संभालते थे और मैसूर जिले में पार्टी का पूरा काम देखते थे।
लेकिन साल 2016 में जब राकेश बेल्जियम में छुट्टियां मना रहे थे, तब अचानक मल्टीपल ऑर्गन फेलियर (कई अंगों का काम बंद कर देना) के कारण महज 38 वर्ष की आयु में उनका दर्दनाक निधन हो गया। इस हादसे ने पूरे परिवार को तोड़ दिया। समाजवाद की वकालत करने वाले और परिवारवाद का विरोध करने वाले सिद्धारमैया के सामने अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकट खड़ा हो गया।
इसी शून्य को भरने के लिए डॉ. यतींद्र को अपनी मर्जी के खिलाफ डॉक्टरी छोड़कर राजनीति के मैदान में उतरना पड़ा। यतींद्र ने खुद एक इंटरव्यू में कहा था, "अगर आज मेरा भाई जिंदा होता, तो मैं कभी राजनीति में कदम नहीं रखता।"

▶️किस जाति से ताल्लुक रखते हैं यतींद्र और क्या है पारिवारिक पृष्ठभूमि? (Yathindra Siddaramaiah Caste, Family Background)
डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया कर्नाटक के एक बेहद रसूखदार राजनीतिक परिवार से आते हैं। यतींद्र अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के तहत आने वाले कुरुबा (Kuruba) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। कर्नाटक की राजनीति में इस समाज का बहुत बड़ा वोट बैंक और दबदबा है।
यतींद्र की मां का नाम पार्वती है। यतींद्र स्वभाव से काफी शांत और इंट्रोवर्ट रहे हैं। अपनी मां की तरह ही उनका राजनीति या सार्वजनिक जीवन में आने का कोई इरादा नहीं था। वे अपने मेडिकल पेशे में ही खुश थे और लोग उन्हें आदर से 'डॉक्टरे' (डॉक्टर साहब) कहकर बुलाते थे।
▶️ यतींद्र का राजनीतिक सफर (Yathindra Siddaramaiah Political Career)
- डॉ. यतींद्र राजनीति में आने से पहले एक सफल और प्रैक्टिसिंग पैथोलॉजिस्ट थे। उन्होंने साल 2009 में राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (बेंगलुरु) से संबद्ध जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, बेलगाम से एमडी इन पैथोलॉजी (M.D. in Pathology) की डिग्री हासिल की थी।
- राजनीति में आने के बाद उन्होंने साल 2018 के विधानसभा चुनाव में अपने पिता की सुरक्षित सीट 'वरुणा' से कांग्रेस के टिकट पर भाग्य आजमाया और बेहद आसानी से जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बने।
- वर्तमान समय में वे कर्नाटक विधान परिषद (MLC) के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चुनाव आयोग के दस्तावेजों में उन्होंने अपना पेशा डॉक्टर, कृषक और समाज सेवक बताया है।

▶️कितनी संपत्ति के मालिक हैं यतींद्र? (Yathindra Siddaramaiah Net Worth)
चुनावी हलफनामे के मुताबिक डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं। उनके पास करीब 31.88 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति बताई गई है। वहीं उन पर लगभग 10.47 करोड़ रुपये की देनदारियां भी दर्ज हैं।
उनकी संपत्ति में बैंक डिपॉजिट, शेयर, बॉन्ड और लग्जरी गाड़ियां शामिल हैं। उनके पास डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत के वाहन भी बताए गए हैं। इसके अलावा वे कृषि कार्य और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं।
डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया की संपत्ति और देनदारियों का पूरा विवरण (उनके चुनावी हलफनामे के अनुसार) नीचे दी गई तालिका में दिया गया है:
| संपत्ति और देनदारी का विवरण | कुल घोषित मूल्य (रुपये में) |
| कुल घोषित संपत्ति (Total Assets) | ₹31,88,52,053 (31 करोड़ रुपये से अधिक) |
| कुल घोषित देनदारियां (Total Liabilities/कर्ज) | ₹10,47,16,564 (10 करोड़ रुपये से अधिक) |
| हाथ में नकदी (Cash) | ₹63,070 |
| बैंकों और वित्तीय संस्थानों में जमा (Bank Deposits) | ₹1,25,73,840 (1 करोड़ रुपये से अधिक) |
| कंपनियों के शेयर, बॉन्ड और डिबेंचर (Shares & Bonds) | ₹2,71,34,676 (2 करोड़ रुपये से अधिक) |
| वाहन और गाड़ियां (Motor Vehicles) | ₹1,51,61,563 (1 करोड़ रुपये से अधिक) |
▶️विवादों से भी रहा है पुराना नाता: विपक्ष ने कहा 'सुपर सीएम'
राजनीति में कदम रखते ही डॉ. यतींद्र का सामना बड़े विवादों से भी हुआ। शुरुआत में उनके बोलने की शैली काफी धीमी थी, जिसके लिए उनके पिता ने 5 लोगों की एक टीम भी बनाई थी ताकि वे भाषण देना सीख सकें। इसके बाद वे कई तरह के घोटालों और आरोपों में घिरे:
🔹लैब टेंडर विवाद (2016): उनके राजनीति में आते ही आरोप लगा कि जिस कंपनी में वे डायरेक्टर थे, उसे सरकारी अस्पतालों में लैब स्थापित करने के टेंडर में फायदा पहुंचाया गया था। हालांकि, बाद में एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने उन्हें इस मामले में क्लीन चिट दे दी थी।
🔹ट्रांसफर और शराब लाइसेंस के आरोप: हाल ही में कर्नाटक के नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। आरोप था कि सरकारी अधिकारियों के तबादलों (Transfers) और शराब के लाइसेंस के लिए लोगों को मुख्यमंत्री या उनके बेटे यतींद्र के पास भेजा जाता था। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ था जिसमें वे अधिकारियों को फोन पर निर्देश देते दिखे थे। इन विवादों के कारण विपक्ष उन्हें "सुपर सीएम" कहकर बुलाने लगा।
🔹उत्तराधिकारी पर बयान (2025): नवंबर 2025 में उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली को अपने पिता का सबसे योग्य और असली उत्तराधिकारी बता दिया था, जिससे पार्टी के भीतर काफी खींचतान देखने को मिली थी।















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