जब सदन में बोले नितिन गडकरी, मुझे अपनी इस हरकत को बताने में शर्म आ रही है

नई दिल्ली, 24 मार्च। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में देश की सड़कों की स्थिति को लेकर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान नितिन गडकरी ने सड़क पर होने वाले हादसों पर भी चिंता जाहिर की। गडकरी ने कहा कि देश में हर साल कोरोना से कहीं ज्यादा सड़क हादसे से लोगों की मौत हुई है। हर साल 1.5 लाख लोगों की सड़क हादसे में मौत होती है, जिसमे 65 फीसदी लोग 18-45 वर्ष के युवा हैं। इस दौरान नितिन गडकरी ने अपने छात्र जीवन की एक घटना का भी जिक्र किया।

साझा किया अपना छात्र नेता का अनुभव

साझा किया अपना छात्र नेता का अनुभव

नितिन गडकरी ने कहा कि मुझे यह बताते हुए शर्म आ रही है लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि जब मैं छात्र राजनीति में था तो मेरे पास पैसे नहीं होते थे। उस वक्त मैं अपने चार दोस्तों के साथ स्कूटर पर चलता था। मैं अपने सबसे पीछे बैठे दोस्त से कहता था कि नंबर प्लेट पर हाथ रख ले। ऐसे में जब पुलिस वाला रोकता था तो हम फर्राटे मारते हुए निकल जाते थे, वो सीटी बजाता रहता था, हमारे स्कूटर का नंबर नहीं देख पाता था। अब मुझे एहसास होता है कि हम क्या गलती कर रहे थे।

सड़क हादसों को कम करने की जरूरत

सड़क हादसों को कम करने की जरूरत

सड़क हादसों पर गडकरी ने कहा कि रोड़ एक्सिडेंट में 1.5 लोग मर रहे हैं, इसमे 65 फीसदी लोग 18-45 वर्ष के युवा लड़के हैं। लोगों के सहयोग के बिना सड़क हादसों को रोका नहीं जा सकता है। मेरा अनुरोध है कि आने वाले समय में एक्सिडेंट को रोकने के लिए आप सभी का सहयोग चाहिए। मैंने योजना बनाई है जहां दो बार एक्सिडेंट होगा वहां हमारा विभाग 50 करोड़ रुपए का निर्माण कार्य तुरंत होगा। सड़क सुरक्षा एक बड़ा सवाल है, हम इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। तमिलनाडु एकमात्र सरकार है जिसने वर्ल्ड बैंक के सहयोग से 50 फीसदी एक्सिडेंट और 50 फीसदी एक्सिडेंट से मौत को कम किया है।

आंखों की टेस्टिंग जरूरी

आंखों की टेस्टिंग जरूरी

हमने फैसला लिया है कि 14 हजार करोड़ रुपए हम खर्च करेंगे जिसमे 50 फीसदी विश्व बैंक और 50 फीसदी सरकार देगी, जो हर शहर में ब्लैक स्पॉट को ठीक करने में काम आएगा। गडकरी ने कहा कि जो सरकार में मंत्री है वो अपने ड्राइवर की आंख की जांच करा लें। जब मैं महाराष्ट्र में मंत्री था तो मैंने ड्राइवर की आंखें टेस्ट कराई जिसमे 40 फीसदी ड्राइवर को कैट्रैक्ट मिला। केंद्र सरकार में एक मंत्री था जो एक आंख से अंधा था, एक मुख्यमंत्री थे उन्होंने बताया कि मेरा ड्राइवर अंधा था वो सिर्फ आवाज से गाड़ी चलाता था।

प्रदूषण को कम करने के लिए कर रहे हैं काम

प्रदूषण को कम करने के लिए कर रहे हैं काम

अब दिन वो दूर नहीं है कि जब हम लोग ग्रीन हाइड्रोजन से गाड़ी को चलाएंगे। ग्रीन हाइड्रोजन पानी से बनता है। अब हम जल्द ही इस विकल्प की ओर आगे बढ़ेंगे। सीवेज वॉटर के इस्तेमाल से इसे बनाया जा सकता है। मैं अपने संसदीय क्षेत्र के सीवेज पानी को महाराष्ट्र सरकार को बेचता हूं, इससे हमे हर साल 325 करोड़ रुपए हमे रॉयल्टी मिलता है। इस पानी के इस्तेमाल से हम ग्रीन हाइड्रोजन बना सकते हैं। यह हाइड्रोजन सबसे सस्ता ईंधन होगा और प्रदूषण भी कम होगा। पीएम की इच्छा है कि हम पेट्रोलियम आयात करने वाले नहीं बल्कि निर्यात करने वाले बनें।

दो साल में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक कार की कीमतें होंगी समान

दो साल में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक कार की कीमतें होंगी समान

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अधिकतम 2 साल के बाद पेट्रोल के स्कूटर, कार, बाइक की कीमत भी इलेक्ट्रिक वाहनों के बराबर होगी। अगर पेट्रोल के लिए आप 100 रुपए खर्च करते हैं तो बिजली के लिए आप सिर्फ 10 रुपए खर्च करेंगे। अगर आत्म निर्भर भारत बनाना है तो हमे कच्चे तेल के खर्च को कम करना होगा। हमारा प्रयास है कि जल्द ही हम इसकी ओर आगे बढ़ेंगे।

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