चुनावी रैलियों में कोरोना नियमों के उल्लंघन के सवाल पर नीति आयोग ने क्या जवाब दिया?
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सहित देश के पांच राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। एक तरफ जहां देश में कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन अपना प्रकोप बढ़ा रहा है। वहीं दूसरी तरफ इन 5 राज्यों में होने वाले चुनावों की तैयारियों में जुटे नेता लाखों की भीड़ के साथ रैली कर रहे हैं। इन रैलियों में बड़े पैमाने पर कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन हो रहा है। वहीं गुरुवार को जब नीति आयोग से कोरोना काल में चुनावी रैलियों में कोरोना प्रोटोकॉल को लेकर सवाल किया गया तो नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा कि यह चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और यह इस मुद्दे को उठाने के लिए सही मंच नहीं है।

वहीं उत्तर प्रदेश में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद देश के मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने गुरुवार को लखनऊ में प्रेस कांफ्रेस कर कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष और कोविड-19 के खतरे से सावधान होकर चुनाव कराने को लेकर प्रतिबद्ध है। हमने बीते दिनों में सभी प्रमुख दलों के साथ बैठक की और उनकी बातों को सुना। सभी जिलों के डीएम, एसपी, डीआईजी और पुलिस कमिश्नर से बात की। उनसे सभी जिले के लॉ एंड ऑर्डर के बारे में जानकारी ली।
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इसके अलावा मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि हमारा मकसद स्वतंत्र, निष्पक्ष, सुरक्षित, प्रलोभन मुक्त व कालाधन मुक्त चुनाव कराना है। उन्होंने बताया कि पांच जनवरी तक फाइनल मतदाता सूची जारी होगी। लेकिन नामांकन के आखिरी दिन तक भी अतिरिक्त सूची बन सकेगी। 18 से 19 साल के नए मतादातओं की संख्या पिछले चुनाव से तीन गुना ज्यादा है। पहले हजार पुरुष मतदाताओं में 839 महिलाओं का अनुपात था। अब महिलाओं का अनुपात 868 हो गया है। पांच लाख महिला मतदाताओं की संख्या बढ़ी है।
साथ ही यह भी कहा कि कोविड प्रोटोकॉल का पूरा पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। हमें जानकारी मिली है कि यूपी में 86 फीसदी लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज लग चुकी है। जबकि 49 फीसदी लोगों को दूसरी डोज लगी है। हमें बताया गया है कि आने वाले 15 दिनों के अंदर 100 फीसदी लोगों को पहली डोज लग जाएगी। यूपी में ओमिक्रॉन के 4 केस आए हैं, जिनमें से तीन स्वस्थ होकर घर लौट गए।












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