New Parliament Inauguration: सेंट्रल विस्टा पूरा होने के बाद हर साल सरकार के बचेंगे 1000 करोड़, कैसे?
मोदी सरकार का दावा है कि सेंट्रल विस्टा के पूरा होने पर सरकार के 1000 करोड़ हर साल बचेंगे। इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी विवाद हो चुके हैं।

राजधानी दिल्ली में नए संसद भवन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मई को इसे देश को समर्पित करेंगे। ये नया भवन सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बना है, जिसको मोदी सरकार ने कुछ साल पहले शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट पर कई बार विवाद भी हुआ, लेकिन इसका काम तेजी से जारी है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक सेंट्रल विस्टा पर करीब 25 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें करीब 1000 करोड़ तो नई संसद के निर्माण में लग गए। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं भी दायर की गईं। साथ ही कोरोना काल में भी इसका जमकर विरोध हुआ। हालांकि निर्माण कार्य चलता रहा।
उस वक्त केंद्र सरकार ने अपनी सफाई में कहा था कि ये प्रोजेक्ट देश के लिए बहुत जरूरी है। इसमें कई किस्तों में पैसे खर्च होंगे। इसके बाद हर साल 1000 करोड़ रुपये की बचत होगी।
केंद्र के मुताबिक अभी तक उसके ऑफिस दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर हैं। ऐसे में वहां का किराया, ट्रासंपोर्ट, फाइल लाना-ले जाना, अधिकारियों के आने-जाने आदि पर बहुत ज्यादा राशि खर्च होती है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर 51 मिनिस्ट्री के ऑफिस 10 बिल्डिंग में आसपास होंगे। ऐसे में हजार करोड़ की बचत होगी। इसके अलावा एक साथ सबकी सुरक्षा भी की जा सकती है।
विपक्ष ने लगाया था ये आरोप
दो साल पहले कोरोना काल में सेंट्रल विस्टा का मुद्दा कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि इस प्रोजेक्ट के चलते बजट में कमी हो रखी और राज्यों को जीएसटी का भुगतान नहीं हो रहा। मोदी सरकार ने इसके लिए स्वास्थ्य बजट में भी 15 प्रतिशत कटौती की है।
अब उद्घाटन का विरोध
अब कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल इस भवन के उद्घाटन का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि पीएम मोदी उद्घाटन करने जा रहे, जो गलत है। इसके उद्घाटन का हक राष्ट्रपति को है। अगर किसी कारण से वो नहीं करतीं, तो लोकसभा स्पीकर या फिर राज्यसभा के सभापति करें। ऐसे में वो उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगे।












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