अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बुरी खबर, नया निवेश 14 साल के निचले स्तर पर
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बुरी खबर, नया निवेश 14 साल के निचले स्तर पर New investments in India declined to 14 year low in October-December: Report
नई दिल्ली। मोदी सरकार के लिए अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बुरी खबर आई है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अक्टूबर-दिसंबर 2018-2019 तिमाही में नए निवेश का स्तर काफी नीचे चला गया। बीते 14 साल में यह सबसे बड़ी गिरावट है। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में सरकारी-निजी क्षेत्र की कंपनियों ने एक लाख करोड़ रुपए की नई परियोजनाओं की घोषणा की। पिछली तिमाही की तुलना में यह आकंड़ा 53 प्रतिशत कम रहा। पिछले वित्त में अक्टूबर-दिसंबर क्वार्टर से तुलना से करें तो 2018-2019 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही का आंकड़ा 55 प्रतिशत कम रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-2019 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में एक लाख करोड़ की परियोजनाओं के इस आंकड़े की तुलना अगर जनवरी-मार्च 2017-2018 तिमाही से करें तो हालत और खराब नजर आती है। इस तिमाही में 5.1 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा की गई थी। 2018-2019 के पहले क्वार्टर में करीब 4 लाख करोड़ का निवेश हुआ था।
द मिंट में प्रकाशित CMIE रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर 2018-2019 तिमाही में निजी परियोजनाओं में निवेश 62 प्रतिशत घटा, जबकि सरकारी योजनाओं में 37 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। सरकारी योजनाओं में इस दौरान केवल 50,604 करोड़ का निवेश हुआ, जो कि 2004 की तुलना में सबसे कम है।
अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंस्ट्रक्शन सेक्टर को छोड़कर सभी क्षेत्रों में निवेश कम हुआ। द मिंट के विशेषज्ञों की मानें तो बैड लोन, चुनाव से पहले नीतियों को लेकर अनिश्चितता ने परियोजनाओं को लंबित किया और निवेश घटा।
CMIE के मैनेजिंग डायरेक्टर महेश व्यास ने सीएनबीसी-टीवी 18 से बातचीत में कहा कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में जो आई गिरावट आई, वह अचानक हुई है, ऐसा नहीं है। पिछले तीन से साढ़े तीन साल से नए निवेश गिरावट लगातार बढ़ रही है। अर्थव्यवस्था पर गौर करें तो पता चलता है कि नए प्रोजेक्ट्स की संख्या लगातार गिर रही है और पुरानी परियोजनाओं के पुनरुद्धार में भी कमी आ रही है।












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