नई शिक्षा नीति को लेकर शशि थरूर ने उत्तर भारतीयों पर साधा निशाना

नई दिल्ली। नई शिक्षा नीति में जिस तरह से तीन भाषाओं को स्कूल में लागू करने की बात कही गई है, उसका कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विरोध किया है। शशि थरूर ने कहा कि तीन भाषाओं के फॉर्मूले का समाधान इसे खारिज करना नहीं है बल्कि इसे बेहतर तरीके से लागू करना है। दरअसल नई शिक्षा नीति का तमिलनाडु में कड़ा विरोध हो रहा है। बता दें कि नई शिक्षा नीति में हिंदी भाषा को पढ़ाया जाना अनिवार्य किया गया है, जिसका दक्षिण भारत के राज्यों में सबसे अधिक विरोध हो रहा है।

थरूर ने जताई ये आपत्ति

थरूर ने जताई ये आपत्ति

शशि थरूर ने कहा कि इस विचार का विरोध इसका समाधान नहीं है, बल्कि इसे बेहतर तरीके से लागू किया जाना है। उन्होंने कहा कि तीन भाषा का सिद्धांत 1960 में लाया गया था, लेकिन इसे कभी भी सही से लागू नहीं किया गया। दक्षिण भारत में हममे से अधिकतर लोग दूसरी भाषा के तौर पर हिंदी भाषा सीखते हैं, लेकिन उत्तर भारत में कोई भी मलयालम या तमिल भाषा को नहीं सीखता है। इससे पहले शनिवार को तमिलनाडु के कई क्षेत्रीय दलों ने भी इस फॉर्मूले का विरोध किया ता। लोगों ने आरोप लगाया था कि हिंदी भाषा को दक्षिण भारतीयों पर थोपा जा रहा है।

कमेटी ने दिया सुझाव

कमेटी ने दिया सुझाव

बता दें कि इसरो के चीफ डॉक्टर के कस्तूरीरंजन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इस बात का सुझाव दिया था कि हिंदी और अग्रेजी भाषा के साथ किसी एक क्षेत्रीय भाषा को पढ़ाया जाना चाहिए। हिंदी भाषी राज्यों के लिए कमेटी ने हिंदी अंग्रेजी के साथ किसी तीसरी भाषा को पढ़ाए जाने का सुझाव दिया है। तमिल भाषा को क्लासिकल भाषा की श्रेणी में रखा जाए। इस पूरे विवाद पर शिक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करके सफाई दी है कि नई शिक्षा नीति सिर्फ एक ड्राफ्ट है इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है, हम लोगों से इस बारे में सुझाव ले रहे हैं।

वरिष्ठ मंत्रियों ने किया बचाव

वरिष्ठ मंत्रियों ने किया बचाव

वहीं इस पूरे विवाद में सरकार का बचाव करने के लिए दो वरिष्ठ मंत्री सामने आए हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सरकार का इस विवाद पर बचाव किया है। निर्मला सीतारण और एस जयशंकर ने ट्विटर पर तकरीबन एक जैसे ही मैसेज करके लोगों को भरोसा दिलाया है कि इस नीति को लागू करने से पहले इसकी समीक्षा की जाएगी। बता दें कि दोनों ही मंत्री तमिलनाडु से आते हैं, जहां इस शिक्षा नीति का सबसे अधिक विरोध हो रहा है। दोनों ही मंत्रियों ने यह ट्वीट तमिल भाषा में किया है। इससे पहले उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी सरकार का बचाव किया था और लोगों से अपील की थी कि वह इसे पढ़ें, इसका विश्लेषण करें, बहस करें, ऐसे ही इसे लेकर किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे।

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