नेपाल की मदद करने में भारत से पीछे छूट गया चीन
नयी दिल्ली। शनिवार को जब नेपाल थर्राया तो हजारों जानें मौत के मुंह में समा गई। जैसे ही भूकंप से धरती कांपनी बंद हुई सबसे पहले को मदद के हाथ नेपाल की ओर बढ़े वो थे भारत के। नेपाल में भूकंप के कुछ ही घंटों के भीतर वहां बड़े पैमाने पर भारत की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए थे।

इन भूकंप के झटकों ने भारत में भी तबाही मचाई थी, लेकिन पीएम मोदी ने नेपाल की मदद करने में तनिक भी देरी नहीं लगाई। भारत वहां किसी भी दूसरे देश की तुलना में व्यापक पैमाने पर बचाव और राहत अभियान में जुटा है। दुनियाभर में भारत के काम की सराहना हुई तो पड़ोसी मुल्क चीन भी अपनी मौजूदगी दर्ज करवाने में जुट गया।
नेपाल में निवेश के मामले में भारत को 2014 में पछाड़ चुका चीन अब नेपाल की मानवीय सहायता करने में भारत को पछाड़ने की कोशिश करने में जुटा है। नेपाल के लिए भारत और चीन दोनों की महत्ववपूर्हांण है। ऐसे में वो हमेशा से दोनों के साथ संबंधों को संतुलित कर चलने में विश्वास रखता है।
तभी तो जरुरत होने के बावजूद नेपाल सरकार ने ताइवान की सहायता को ठुकरा दिया। चीन जान चुका है कि आपदा की इस घड़ी में नेपाल की मदद करने में वो भारत से पिछड़ चुका है। ऐसे में वो भारत के साथ किसी भी तरह की तुलना नहीं चाहता है। वो चाहता है कि भारत के साथ सकारात्मक समन्वय बनाते हुए नेपाल को कठिनाइयों से निकलने और देश के पुनर्निमाण में मदद करें ।
माना जा रहा है कि राहत कार्य खत्म होने के बाद पुनर्वास और पुनर्निमाण के काम में भारत से ज्यादा चीन की मौजूदगी दिखेगी। भारत पारंपरिक रूप से यहां कमजोर रहा है, हलांकि केवल अफगानिस्तान में भारत जमीन पर कुछ करके दिखाने में सफल रहा है।












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