NCRB की रिपोर्ट में हुआ खुलासा- ओडिशा में सजा दर देश में सबसे कम

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने हाल ही में जो रिपोर्ट जारी की है, उसमें कई बड़े खुलासे हुए हैं। एनसीआरबी की हालिया रिपोर्ट में ओडिशा की सजा दर की गंभीर तस्‍वीर सामने आई है। इस रिपोर्ट के अनुसार राज्‍य की सजा दर अन्‍य राज्‍यों की अपेक्षा सबसे कम है।

 National Crime Records Bureau

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के निष्‍कर्षों में ये बात सामने आई है कि ओडिशा की राज्य की सजा दर केवल 11.9 प्रतिशत है। 2022 में राज्य भर की अदालतों में कुल 27,460 मामलों का निपटारा हुआ लेकिन इस रिपोर्ट में जिस चीज ने विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया वह यह है कि आरोपियों को केवल 3,271 मामलों में ही दोषी ठहराया गया । आपको जानकर ताज्‍जुब होगा कि 24,189 मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया।

वहीं अन्‍य राज्‍यों की बात की जाए तो मिजोरम, केरल और उत्तर प्रदेश में दोषसिद्धि दर क्रमशः 95.3 प्रतिशत, 86.4 प्रतिशत और 76.2 प्रतिशत है।

ओडिशा में सजा की दर इतनी कम क्यों है?

पूर्व पुलिस अधिकारी बटाकृष्णा त्रिपाठी ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि अनुचित पुलिस जांच के लिए जिम्‍मेदार ठहराया जा सकता है। उन्‍होंने अगर 100 में से 89 बरी हो जाएंगे तो लोगों को कानून व्‍यवस्‍था पर कैसे भरोसा होगा। ओडिशा सरकार को यह पता लगाने के लिए एक समिति बनानी चाहिए कि सजा की दर कम क्‍यों है। कोर्ट में मामले लंबित क्‍यों हैं और मुद्दों के समाधान के लिए क्‍या कदम उठाए जाने की आवश्‍यकता है। उन्‍होंने कहा इसके संबंध में समिति जो सुझाव देगी उसे लागू किया जाएगा।

अदालतों में लंबित मामलों के मामले में भी ओडिशा पीछे

  • लंबित मामलों के मामले में ओडिशा देश में छठे स्थान पर है
  • 2022 में राज्‍य भर अदालतों में कुल 1,12,370 मामले दर्ज हुए
  • कोर्ट में पहले ही 7,80,953 मामले बैकलॉग में थे
  • 2022 में निपटारे के लिए कुल 8,93,323 मामले थे
  • 8,64,711 मामले कोर्ट में अभी भी लंबित हैं

वरिष्ठ अधिवक्ता मानस चंद ने इस बारे में कहा

न्‍यायालयों में न्‍यायाधीशों की संख्‍या में वृद्धि हुई है लेकिन जजों की कमी पूरी करने से केवल इसमें मदद नहीं मिलेगी। जांच प्रक्रिया अभी भी पारंपरिक है। कुछ मामलों में तो 20 से 30 गवाह होते हैं। सभी गवाहों की सुनवाई तक मुकदमा चलता रहता है। इसे बदलने की जरूरत है। उन्‍होंने राय दी कि केस में यदि गुणात्मक साक्ष्य है, तो प्रक्रिया को मात्रा के लिए नहीं जाना चाहिए और मामले को साक्ष्य की गुणवत्ता के आधार पर निपटाया जाना चाहिए। NCRB की रिपोर्ट पर धमेंद्र प्रधान बोले- महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध ने ओडिशा को शर्मसार किया है।

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