नवाब मलिक की बेटी नीलोफर ने सुनाई आपबीती, खुला खत लिखकर बताया- 'उस रात क्या हुआ था'

नवाब मलिक की बेटी नीलोफर ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक खुला खत जारी किया है।

मुंबई: महाराष्ट्र में इन दिनों ड्रग्स मामले को लेकर राजनीति गर्माई हुई है। ड्रग्स केस में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के फंसने के बाद एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नवाब मलिक आमने-सामने हैं। नवाब मलिक ने आरोप लगाया है कि समीर वानखेड़े लोगों को ड्रग्स के फर्जी मामलों में फंसाकर उगाही करते हैं। वहीं, समीर वानखेड़े ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। समीर वानखेड़े उस वक्त से नवाब मलिक के निशाने पर हैं, जब उन्होंने ड्रग्स मामले में नवाब मलिक के दामाद समीर खान को गिरफ्तार किया था। इस बीच नवाब मलिक की बेटी नीलोफर मलिक खान ने सोशल मीडिया पर एक खुला खत जारी किया है।

'एक बेगुनाह की पत्नी की तरफ से...'

'एक बेगुनाह की पत्नी की तरफ से...'

नीलोफर मलिक खान ने अपनी चिट्ठी में बताया है कि जनवरी में उनके पति की गिरफ्तारी के बाद किस तरह उनके परिवार के साथ अन्यायपूर्ण और गैरकानूनी तरीके से व्यवहार किया गया। 'एक बेगुनाह की पत्नी की तरफ से: शुरुआत' शीर्षक से लिखी इस चिट्ठी में नीलोफर ने उस रात का जिक्र किया है, जब एनसीबी की टीम ने उनके पति समीर खान को गिरफ्तार किया और साथ ही बताया है कि उस रात के सदमे से उनका परिवार आज तक जूझ रहा है। आपको बता दें कि एनसीबी ने इसी साल जनवरी के महीने में समीर खान को गिरफ्तार किया था।

'मुझे अच्छी तरह से याद है वो दिन'

'मुझे अच्छी तरह से याद है वो दिन'

नीलोफर मलिक खान ने चिट्ठी में लिखा, 'मुझे अच्छी तरह से याद है कि वो 12 जनवरी का दिन था, जब मेरे पति समीर खान को उनकी मां ने फोन किया था और बताया कि एनसीबी ने उन्हें पूछताछ के लिए अगले दिन अपने दफ्तर बुलाया है। मेरे पति जब अगले दिन एनसीबी के दफ्तर पहुंचे तो रास्ते में उन्होंने देखा कि वहां भारी संख्या में मीडियाकर्मी उनके आने का इंतजार कर रहे हैं। हमारे परिवार ने मेरे पिता नवाब मलिक को भी इस बारे में कुछ नहीं बताया, क्योंकि हमारे पास छिपाने के लिए कुछ था ही नहीं।'

'मैंने अपना हाथ खिड़की के शीशे में दे मारा'

'मैंने अपना हाथ खिड़की के शीशे में दे मारा'

नवाब मलिक की बेटी ने अपनी चिट्ठी में आगे लिखा, 'एनसीबी के अधिकारियों ने सुबह 9 बजे से लेकर रात के 12 बजे तक लगातार 15 घंटे मेरे पति से पूछताछ की। मुछे कुछ पता नहीं चल पा रहा था और मैं घर पर उनका इंतजार करती रही। उस भावुक हालत में मैंने अपना हाथ खिड़की के शीशे में दे मारा और वो पूरा शीशा मेरे पैर पर आ गिर, जिसकी वजह से मेरे पैर में 250 टांके आए। वो 15 घंटे मेरे लिए और मेरे बच्चों के लिए मानसिक तौर पर बहुत परेशान करने वाले थे।'

'पूरा परिवार अब इस परेशानी से जूझेगा'

'पूरा परिवार अब इस परेशानी से जूझेगा'

नीलोफर ने अपनी चिट्ठी में दावा किया है, 'रात को 12 बजे के बाद मेरे पास समीर का फोन आया और उन्होंने मुझे बताया कि एनसीबी उन्हें गिरफ्तार कर रही है। सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बावजूद और एनसीबी के पास मेरे पति के खिलाफ कोई सबूत ना होने पर भी समीर को गिरफ्तार कर लिया गया। हम सब को गहरा सदमा लगा और वही वो पल था, जब हमें एहसास हुआ कि अकेले समीर ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार अब इस परेशानी से जूझेगा।'

'मैं गेट पर पहुंची, वो हमारे दफ्तर में घुस चुके थे'

'मैं गेट पर पहुंची, वो हमारे दफ्तर में घुस चुके थे'

ट्विटर पर जारी अपनी चिट्ठी में नीलोफर ने दावा किया, 'अगली सुबह सिक्योरिटी गार्ड ने फोन करके बताया कि एनसीबी के अधिकारी हमारे गेट पर खड़े हैं और वो घर और दफ्तर की तलाशी लेना चाहते हैं। जब तक मैं गेट पर पहुंची, वो हमारे दफ्तर में घुस चुके थे, क्योंकि गार्ड के पास एक एक्सट्रा चाभी थी। उन्होंने सारे सामान को इधर-उधर कर दिया, लेकिन दोनों जगहों की तलाशी लेने के बाद उन्हें कुछ नहीं मिला, कुछ भी नहीं। बिना किसी सबूत के समीर को महीनों तक हिरासत में रखा गया।'

'मुझे पेडलर की पत्नी तक कहा गया'

'मुझे पेडलर की पत्नी तक कहा गया'

नीलोपर ने आगे लिखा, 'मेरे बच्चों तक को एक ऐसे कठिन दौर से गुजरना पड़ा, जिससे शायद ही कोई गुजरा हो। मेरे बच्चों ने अपने दोस्त खो दिए, यहां तक कि लोग हमसे बात करने से भी कतराने लगे। हमारे प्रति अचानक से लोगों का रवैया बदल गया। मेरे लिए 'पेडलर की पत्नी', 'ड्रग्स तस्कर' जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए।'

'जो टॉर्चर हम लोगों ने कहा, ये उसकी केवल एक झलक'

'जो टॉर्चर हम लोगों ने कहा, ये उसकी केवल एक झलक'

इस चिट्ठी के बाद एक और ट्वीट करते हुए नीलोफर मलिक खान ने लिखा, 'हम लोगों ने जो टॉर्चर सहा, ये उसकी केवल एक झलक है। आने वाले दिनों में मैं कुछ और पोस्ट के जरिए वो सब बताऊंगी, जो हमारे परिवार ने सहा। अब वक्त आ गया है कि एक समाज के तौर पर हम उस सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाएं, जिसका काम हमारी मदद करना है, लेकिन वही सिस्टम हमें अपंग बना रहा है।'

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