एनजीटी ने दिल्ली सरकार और जल बोर्ड को भेजा कारण बताओ नोटिस

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने सोमवार को दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली सरकार को यमुना नदी साफ न कर पाने पर कारण बताओ नोटिस भेजा है। एनजीटी ने दिल्ली के मुख्य सचिव को यमुना की सफाई में हो रही देरी के लेकर नोटिस भेजकर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने सोमवार को दिल्ली जल बोर्ड और दिल्ली सरकार को यमुना नदी साफ न कर पाने पर कारण बताओ नोटिस भेजा है। एनजीटी ने दिल्ली के मुख्य सचिव को यमुना की सफाई में हो रही देरी को लेकर नोटिस भेजकर पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।

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इससे पहले एनजीटी ने 17 अक्टूबर को मुख्य सचिव, डीडीए के उपाध्यक्ष, दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष और परियोजना के टॉप ऑफिसर्स को सोमवार को देरी के कारण बताने के लिए कोर्ट के सामने उपस्थित होने को कहा था। यमुना की सफाई परियोजना के चरण -1 का उद्देश्य नजफगढ़ और डेल्ही गेट नालियों में प्रदूषण के स्तर को कम करना है, वहीं चरण-2 शाहदरा, बरापुल्ला और अन्य नालों पर काम करेगा।

कार्यवाही के दौरान डीडीए ने कहा था कि उन्होंने एनजीटी के आदेशों का अनुपालन कर दिल्ली जल बोर्ड को 37 करोड़ रुपये की राशि दी थी।

एनजीटी का कहना है कि यमुना नदी में बढ़ता प्रदूषण एक गंभीर विषय है। पैनल ने हरियाणा और हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जैसे ही यमुना हरियाणा में प्रवेश करती है, तो उसकी गुणवत्ता और प्रवाह पर संयुक्त रूप से अध्ययन करने को कहा है। इसके साथ ही बोर्ड को इसके आसपास स्थित उद्योगों की सूची जमा करने को भी कहा है।

एनजीटी ने कहा है कि यमुना में पहुंचने वाले 67 प्रतिशत प्रदूषकों को टू सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के तहत ठीक किया जाएगा जो दिल्ली गेट और नजफगढ़ में हैं। ये 'मैली से निर्मल यमुना रिवाइलाइजेशन प्रोजेक्ट 2017' के पहले चरण के तहत किया जाएगा।

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