राजनाथ सिंह ने बिहार के शिक्षकों से किया संवाद, बोले- न्यू इंडिया में गढ़े जाएंगे शिक्षा के नए मुहावरे

नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को बिहार के शिक्षकों और बुद्घिजीवियों से वर्चुअल रूप से संवाद किया। शिक्षकों और बुद्घिजीवियों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि, शिक्षक की भूमिका समाज में एक शिल्पी की होती है। एक शिक्षक के पास आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को संवारने की क्षमता होती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह कुम्हार मिट्टी से उपयोगी बर्तन बना देता है कि उसी तरह आने वाली पीढ़ी को गढ़ने का काम शिक्षकों का है।

National Education Policy 2020 prepared as per aspirations of new India: Rajnath Singh

राजनाथ सिंह ने कहा कि, मुझे बिहार के शिक्षकों से संवाद करते बहुत खुशी हो रही है। मैं भी इसी समुदाय से आता हूं। बिहार को ज्ञान की धरती का दर्जा प्राप्त है। बिहार की धरती तो विश्व के सबसे बड़े शिक्षक महात्मा बुद्ध की धरती है। जिस बिहार में चाणक्य ने अर्थशास़्त्र लिखा हो और नालंदा विश्वविद्यालय हो उसकी बुनियाद क्या रही होगी उसकी कल्पना की जा सकती है। नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि शिक्षा एक व्यापक दृष्टिकोण है।

नई शिक्षा नीति को लेकर राजनाथ सिंह ने कहा कि, केंद्र सरकार ने हमारे बच्चो और युवाओं के समग्र विकास के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी है। करीब 34 साल के बाद देश में एक नई शिक्षा नीति आई है। नई शिक्षा नीति नूतन और पुरातन शिक्षा का समागम है। यह नए भारत की नई आकांक्षाओं और जरूरतों के हिसाब से तैयार की गई है। नई शिक्षा नीति में बच्चों की सिखने की प्रक्रिया को और बेहतर तथा कारगर बनाने की रूपरेखा तैयार की गई है। इस नई रूपरेखा में शिक्षक और विद्यालय दोनों मिल कर एक ऐसे वातावरण का निर्माण करेंगे जिसमें बच्चा अपनी प्रतिभा और क्षमता के अनुरूप सिखने की प्रक्रिया से जुड़ेगा।

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    राजनाथ सिंह ने कहा कि, नए भारत में शिक्षा-दीक्षा के नए मुहावरे गढ़े जाएंगे, जहां बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षण और डिस्कवरी आधारित लर्निंग की तरफ बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे हर बच्चे का समुचित और समग्र विकास हो सकेगा। उन्होंने कहा कि, बिहार के शिक्षकों ने तो बहुत बुरा समय देखा हैं, बहुत संघर्ष किया हैं। मुझे वह समय आज भी याद है जब बिहार के शिक्षक सड़कों पर आए दिन आन्दोलन करने के लिए मजबूर होते थे। कारण क्या होता था? छह महीने से वेतन नहीं मिला? साल भर से वेतन नहीं मिला?

    उन्होंने कहा कि, चरवाहा विद्यालय जैसे कांसेप्ट के साथ तालमेल मिलाकर काम करना, और तेल पिलावन-लाठी घुमावन, जैसे माहौल में भी काम करना अपने आप में बेहद चुनौतीपूर्ण था। हम सबकी यही कोशिश है कि बिहार के किसी भी शिक्षक को अब कभी भी उस तरह की कठिनाइयों का सामना फिर से न करना पड़े। राजनाथ सिंह ने कहा है कि बिहार सरकार शिक्षकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का मानना है कि राष्ट्र का सर्वांगीण विकास शिक्षक ही कर सकते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षकों के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए हैं।

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