मोदी तोड़ेंगे परंपरा, लाल किले पर नहीं फहराएंगे तिरंगा !

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा से कुछ हटकर करने की कोशिश करते हैं। वो लोगों के पगचिन्हों पर चलने में विश्वास नहीं रखते है बल्कि वो खुद अपने रास्ते बनाते हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि मोदी इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी कुछ नया कर सकते हैं। कयास ये भी लगाए जा रहे है कि लाल किले के किसी और स्थान से पीएम देश को संबोधित कर सकते हैं।

 red fort

अगर रिपोर्ट की माने तो मोदी हमेशा से परंपराओं को तोड़ने में विश्वास करते हैं। पुरानी परंपराओं को तोड़ने का मोदी का रिकॉर्ड पुराना है। मोदी के शपथ समारोह को ही देखें तो उन्होंने इतिहास को दोहराने के बजाए अलग हटकर किया। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि मोदी इस बार भी कुछ नया करेंगे।

नया करने में माहिर है मोदी

. गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर 2003 में मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर गुजरात की राजधानी के बजाए पुरानी राजधानी पाटन में झंडारोहण किया था।

. इतना ही नहीं उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के वेन्यू को गांधीनगर से छोटे शहर में बदल दिया।

. देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए मोदी ने ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन के प्रांगण को चुना।

. 26 मई को पीएम पद की शपथ लेते वक्त उन्होंने परंपरा को तोड़ते हुए शार्क देशों के राष्ट्रध्यक्षों को आमंत्रित किया।

. पहली बार किसी प्रधानमंत्री के शपथ समारोह में 3000 से ज्यादा मेहमान शामिल हुए थे।

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