'अभी ना जाओ छोड़ कर...', नारायण मूर्ति ने सुनाए अपनी प्रेम कहानी के किस्से, बताया सुधा से मुलाकात का फसाना
'हम दोनों' फिल्म का वो आइकॉनिक गाना 'अभी ना जाओ छोड़ कर' प्रेम में पड़े हर व्यक्ति ने अपनी प्रेमिका के लिए एक ना एक बार तो जरूर गुनगुनाया होगा। इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति भी कभी अपनी प्रेमिका जो अब उनकी पत्नी हैं, के लिए यह गीत गुनगुनाया करते थे।
जूस की दूकान उनके मुलाकातों का गवाह बनता था और हाथ में मिल्कशेक का ग्लास थामे नारायण मूर्ति सुधा के लिए गाते थे... अभी ना जाओ छोड़ कर.. के दिल अभी भरा नहीं...।
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दरअसल, इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति और उनकी पत्नी और राज्यसभा सदस्य सुधा मूर्ति नई दिल्ली में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2024 में शिरकत करने पहुंचे थे। जब बातों का दौर चला तो मूर्ति दंपति अपने पुराने दिनों को याद करते हुए मानों टाइम ट्रेवल पर निकल गए।
अपनी बातचीत के दौरान, नारायण मूर्ति ने पुणे में एक जूस की दुकान पर अपनी मुलाकातों को याद करते हुए बताया कि कैसे वह सुधा के लिए देव आनंद का प्रतिष्ठित 1961 चार्टबस्टर 'अभी ना जाओ छोड़ कर' गाया करते थे।
पुराने किस्सों का जिक्र करते हुए नारायण मूर्ति ने कहा, "वे अद्भुत दिन थे। मैं फ़्रांस से लौटा था और कुछ हद तक बोहेमियन था। मुझे दुनिया की कोई चिंता नहीं थी और मैं एक एनजीओ से जुड़ गया था।"
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सुधा से अपनी मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने आगे कहा, "जिस दिन मैं उनसे (सुधा मूर्ति) मिला, मुझे ऐसा लगा कि मैं उनसे और अधिक बार मिलना चाहता हूं। हम पुणे में दर्शन नामक फलों के जूस की दुकान पर जाते थे, और वह क्वीन साइज के संतरे का जूस ऑर्डर करती थी, और मैं किंग साइज का केले का मिल्कशेक का ऑर्डर करता था। हम बैठे रहते थे और मैं कभी-कभार उनसे कहता था, 'अभी ना जाओ छोड़ कर, दिल अभी भरा नहीं।"
सुधा मूर्ति से मिलने पर उन्होंने उन्हें कैसे प्रभावित किया, इस बारे में बात करते हुए, नारायण मूर्ति ने कहा, "वह उत्साह से भरी हुई थीं, उनमें बहुत आत्मविश्वास था और वह बहुत बातूनी थीं। मैं जानता था कि उसे प्रभावित करने की एकमात्र आशा मेरी किताबों की प्रभावशाली शृंखला थी क्योंकि उसे पढ़ना बहुत पसंद है।''
बातचीत के दौरान नारायण मूर्ति ने यह भी बताया कि सुधा मूर्ति भारत की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी के अन्य सभी संस्थापकों की तुलना में "बहुत अधिक योग्य" थीं।
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