Mukul Roy Caste: किस जाति के थे मुकुल रॉय? घर-परिवार में कौन-कौन? बंगाल की राजनीति के चाणक्य का पूरा सफरनामा
Mukul Roy Biography Caste: पश्चिम बंगाल की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले वरिष्ठ नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। दिल का दौरा पड़ने से मुकुल रॉय का निधन हो गया। 22-23 फरवरी की रात करीब 1.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने निधन की पुष्टि की।
बीते कुछ सालों से वह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और सक्रिय राजनीति से लगभग दूर हो चुके थे। ऐसे में आइए मुकुल रॉय के शुरुआती जीवन, घर-परिवार और राजनीतिक सफर के बारे में।

🟡 Who was Mukul Roy: कौन थे मुकुल रॉय?
मुकुल रॉय का जन्म 17 अप्रैल 1954 को हुआ। वे पश्चिम बंगाल के एक वरिष्ठ भारतीय राजनेता थे। यूपीए-2 सरकार के दौरान उन्होंने पहले जहाजरानी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया और बाद में रेल मंत्रालय में भी जिम्मेदारी संभाली।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) बनने से पहले वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य थे। 2017 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। करीब चार साल तक भाजपा में रहने के बाद 2021 में वे फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। उनके हालिया चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 50.85 लाख रुपये थी।
🟡 मुकुल रॉय परिवार और निजी जीवन (Mukul Roy Family Wife Child)
17 अप्रैल 1954 को जन्मे मुकुल रॉय उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा के रहने वाले थे। उनके पिता हरि देव कौशल दिल्ली पुलिस में सहायक पुलिस आयुक्त रहे और 2019 में उनका निधन हुआ। मां अनुप कौशल पेशे से शिक्षिका थीं। परिवार में तीन भाई-बहन थे। उनके भाई राहुल देव फिल्म और मॉडलिंग जगत का जाना-पहचाना चेहरा रहे, जबकि बहन रश्मि कौशल हैं।
मुकुल रॉय का विवाह शिल्पा देव से हुआ था, लेकिन 2005 में दोनों अलग हो गए। उनकी एक बेटी सिया देव है, जिनका जन्म 2002-03 के आसपास हुआ। उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय भी राजनीति में सक्रिय रहे और पिता के साथ कई बार दल बदल के दौरान सुर्खियों में आए।

🟡 किस जाति से थे मुकुल रॉय? (Mukul Roy Caste)
मुकुल रॉय बंगाली कायस्थ समुदाय से आते थे। बंगाल की सामाजिक संरचना में कायस्थों की एक मजबूत बौद्धिक और प्रशासनिक परंपरा रही है, और रॉय की राजनीतिक रणनीति में भी उसी सोच की झलक मिलती थी। इसी वजह से उन्हें अक्सर "बंगाल की राजनीति का चाणक्य" कहा जाता था।
🟡 मुकुल रॉय शिक्षा और शुरुआती सफर (Mukul Roy Education)
मुकुल रॉय ने कोलकाता विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई की। बाद में 2006 में मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में एमए किया। छात्र जीवन से ही राजनीति में रुचि रखने वाले रॉय ने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस से की।
🟡 तृणमूल कांग्रेस के स्थापक रणनीतिकार (Mukul Roy TMC Architect)
1998 में जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस बनाई, तो मुकुल रॉय उनके साथ खड़े थे। पार्टी के चुनाव चिह्न को चुनाव आयोग में जमा कराने से लेकर संगठन खड़ा करने तक, रॉय की भूमिका बेहद अहम रही। 2011 के विधानसभा चुनाव में 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन को खत्म करने में उनकी रणनीति निर्णायक साबित हुई। उस दौर में उन्हें ममता बनर्जी के बाद पार्टी का सबसे ताकतवर नेता माना जाता था।

🟡 केंद्र में मंत्री पद और रेल मंत्रालय
यूपीए-2 सरकार में उन्होंने पहले जहाजरानी राज्य मंत्री के रूप में काम किया। 2012 में किराया बढ़ोतरी विवाद के बाद दिनेश त्रिवेदी की जगह उन्हें रेल मंत्री बनाया गया। मार्च से सितंबर 2012 तक उन्होंने रेल मंत्रालय संभाला। यह कार्यकाल छोटा जरूर था, लेकिन राजनीतिक रूप से काफी अहम रहा।
🟡 दल-बदल, विवाद और वापसी (Mukul Roy Political Controversies)
2015 के बाद पार्टी में मतभेद बढ़ने लगे। नारदा स्टिंग और चिटफंड जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की पूछताछ के बाद दूरी साफ दिखी। सितंबर 2017 में उन्होंने तृणमूल छोड़ी और नवंबर 2017 में भाजपा में शामिल हो गए। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा की 18 सीटों की सफलता के पीछे उनकी रणनीति मानी गई। 2020 में वह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने।
2021 विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर उत्तर से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीते, लेकिन कुछ ही महीनों बाद फिर तृणमूल में लौट आए। बिना विधायक पद छोड़े वापसी करने पर दलबदल कानून के तहत विवाद खड़ा हुआ। कलकत्ता हाईकोर्ट ने 13 नवंबर 2025 को उनकी सदस्यता रद्द की, लेकिन जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की ठीक से जांच जरूरी है।

🟡 मुकुल रॉय स्वास्थ्य संकट और अंतिम दिन (Mukul Roy Cause of Death)
पिछले कुछ वर्षों में उनकी सेहत तेजी से गिरती गई। 2023 में हाइड्रोसेफेलस के लिए ब्रेन सर्जरी हुई। 2024 में घर पर गिरने से सिर में चोट लगी और खून का थक्का जम गया, जिसके लिए ऑपरेशन कराना पड़ा। उन्हें डिमेंशिया और पार्किंसंस जैसी बीमारियां भी थीं। मधुमेह और उम्र संबंधी समस्याओं के कारण 2022 के बाद से वह सक्रिय राजनीति से लगभग दूर रहे। 23 फरवरी 2026 को उन्हें भारी हृदयाघात हुआ और जीवन का अंत हो गया।
🟡 मुकुल रॉय राजनीतिक विरासत (Mukul Roy Legacy)
मुकुल रॉय ने बंगाल की राजनीति का चरित्र बदल दिया। उन्होंने कांग्रेस से तृणमूल में नेताओं को लाने में अहम भूमिका निभाई और बाद में भाजपा को भी संगठन खड़ा करने में मदद की। उनकी चुनावी समझ, संगठन कौशल और सत्ता के समीकरण साधने की क्षमता ने उन्हें अलग पहचान दी। चुनावी हलकों में उनका घोषित संपत्ति मूल्य 50.85 लाख रुपये था, लेकिन राजनीतिक पूंजी कहीं अधिक बड़ी थी।
मुकुल रॉय का सफर सत्ता, रणनीति, विवाद और वापसी की कहानी है। बंगाल की राजनीति में उनके बिना आने वाले दिन अलग होंगे, लेकिन उनका नाम लंबे समय तक 'रणनीतिकार' के रूप में याद किया जाएगा।
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