Gujarat: Don Abdul Latif का शूटर तस्लीम अरेस्ट, 9 लोगों समेत MP की हत्या, 7 साल पुलिस को नचाया-Dawood से लिंक?
Gujarat Radhika Gymkhana Murder Case Update: गुजरात पुलिस ने 21 जून 2026 को एक बड़ी सफलता हासिल की। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने 1992 के राधिका जिमखाना हत्याकांड और पूर्व राज्यसभा सांसद रऊफ वलीउल्लाह हत्याकांड के दोषी मोहम्मद तस्लीम उर्फ मोहम्मद तस्लीम मोहम्मद उमर शेख को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया।
यह शख्स अब्दुल लतीफ गैंग का भरोसेमंद शार्पशूटर था, जो 2019 में साबरमती सेंट्रल जेल से अस्थायी पैरोल पर छूटने के बाद फरार हो गया था। सात साल तक पहचान बदलकर छिपे रहने के बावजूद पुलिस की जॉइंट टीम ने उसे पकड़ लिया। यह गिरफ्तारी सिर्फ एक फरार अपराधी की नहीं, बल्कि गुजरात के 1990 के दशक के खूंखार अंडरवर्ल्ड, शराब माफिया, राजनीति-अपराध नेक्सस और AK-47 की गुजरात में पहली गूंज की कहानी है...

Radhika Gymkhana Murder Case: क्या हुआ था 3 अगस्त 1992 को?
अहमदाबाद के ओधव इलाके में स्थित राधिका जिमखाना (जो जुआ और शराब की अदला-बदली का अड्डा माना जाता था) पर अब्दुल लतीफ गैंग ने अंधाधुंध गोलीबारी की। मुख्य निशाना प्रतिद्वंद्वी शराब तस्कर हंसराज त्रिवेदी (Hansraj Trivedi) था, जो लतीफ की सप्लाई से शराब खरीदने को तैयार नहीं था।
गैंग ने पहले भी एक हमला किया था, लेकिन दूसरा हमला 3 अगस्त 1992 को घातक साबित हुआ। हमलावर AK-47, स्टेन गन, रिवॉल्वर और अन्य ऑटोमैटिक हथियारों से लैस थे। अंधाधुंध फायरिंग में 9 लोग मारे गए, कई घायल हुए। यह गुजरात में AK-47 (या AK-56) का इस्तेमाल करने वाली पहली गैंग वार घटना थी, जिसने पूरे राज्य में दहशत फैला दी।
इस घटना ने गुजरात के शराब माफिया और गैंग वॉर की सच्चाई उजागर कर दी। TADA (Terrorist and Disruptive Activities Act) के तहत केस चला। 2002 में कोर्ट ने 8 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। मोहम्मद तस्लीम उनमें शामिल था।
Who Is Tasleem: तस्लीम कौन है? अब्दुल लतीफ गैंग (Abdul Latif Gang) का 'ट्रस्टेड शूटर'
अब्दुल लतीफ (1951-1997) गुजरात का सबसे खूंखार अंडरवर्ल्ड डॉन था। गरीबी से शुरू करके अवैध शराब का साम्राज्य खड़ा करने वाला लतीफ Dawood Ibrahim का सहयोगी भी था। उसके गैंग पर सैकड़ों मुकदमे, दर्जनों हत्याएं और अपहरण के मामले थे।
तस्लीम, लतीफ का भरोसेमंद शूटर था। 1990 के दशक में गुजरात के कई हिंसक गैंग वॉर में उसकी भूमिका रही। राधिका जिमखाना के अलावा वह रऊफ वलीउल्लाह हत्याकांड (Rauf Waliullah Murder Case) में भी दोषी था।
Rauf Waliullah Murder Case: रऊफ वलीउल्लाह हत्या (9-10 अक्टूबर 1992)
पूर्व राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता रऊफ वलीउल्लाह, जिमखाना कांड की सच्चाई उजागर करने और लतीफ-राजनीति-पुलिस के गठजोड़ का पर्दाफाश करने वाले थे। लतीफ ने उन्हें चुप कराने के लिए हत्या का प्लान बनाया। अहमदाबाद के पालड़ी इलाके में दिनदहाड़े गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
2019 से फरारी: पैरोल जंप और नई पहचान
तस्लीम उम्रकैद की सजा काट रहा था। 2019 में साबरमती जेल से अस्थायी पैरोल पर बाहर आया और फिर गायब। पुलिस के अनुसार, उसने अपनी पहचान, लोकेशन और संचार के तरीके लगातार बदलते रहे। राजस्थान में छिपकर रह रहा था।
गुप्त सूचना पर अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की टीम ने राजस्थान में जॉइंट ऑपरेशन चलाया और तस्लीम को गिरफ्तार किया। अब उसे वापस साबरमती जेल लाने की प्रक्रिया चल रही है।
1990 के दशक का Gujarat Underworld: लतीफ का साम्राज्य
- शराब का कारोबार: गुजरात सूखा राज्य है, लेकिन अवैध शराब का विशाल नेटवर्क।
- लतीफ ने छोटे डिलीवरी बॉय से शुरू करके मॉनोपॉली बना ली।
- Dawood Ibrahim से संबंध, 1993 मुंबई ब्लास्ट में भी उसका नाम आया।
- राजनीतिक संरक्षण के आरोप: कई नेता और पुलिस अधिकारी लतीफ से जुड़े बताए जाते थे।
- 1995 में लतीफ की गिरफ्तारी, 1997 में पुलिस एनकाउंटर में मौत।
लतीफ के बाद गैंग छोटे-छोटे ग्रुप्स में बंट गए, लेकिन हिंसा की विरासत बनी रही।
इस गिरफ्तारी का महत्व समझें...
- कानून का लंबा हाथ: 7 साल फरार रहने के बाद भी न्याय मिला। यह फरार अपराधियों के लिए चेतावनी है।
- पुराने केसों की याद: 1990 के दशक की घटनाएं आज भी जीवित हैं। TADA जैसे सख्त कानूनों की जरूरत फिर चर्चा में आ सकती है।
- अपराध-राजनीति नेक्सस: आज भी कई मामलों में ऐसे गठजोड़ के आरोप लगते हैं।
- पुलिस की क्षमता: क्राइम ब्रांच की इंटेलिजेंस और कोऑर्डिनेशन की सफलता।
- समाज पर असर: निर्दोषों की मौत (जिमखाना में 9 मौत) याद दिलाती है कि गैंग वॉर कितना खतरनाक होता है।
गुजरात आज औद्योगिक और आर्थिक रूप से मजबूत है, लेकिन अंडरवर्ल्ड की जड़ें पूरी तरह नहीं उखड़ी हैं। एक्सटॉर्शन, ड्रग्स और छोटे गैंग्स अभी भी सक्रिय हैं।
मोहम्मद तस्लीम की गिरफ्तारी 1992 के राधिका जिमखाना नरसंहार और रऊफ वलीउल्लाह हत्याकांड के पीड़ित परिवारों को आंशिक न्याय दिलाती है। लेकिन यह याद दिलाती है कि अपराध की जड़ें कितनी गहरी होती हैं। अब्दुल लतीफ युग गुजर चुका है, लेकिन उसकी विरासत (हिंसा, भय और nexus) अभी भी चुनौती बनी हुई है।













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