फैक्ट्री में 8 घंटे मशीन चलाने वाला मजदूर बना वर्ल्ड कप का हीरो? FIFA World Cup ने रातोंरात बदल दी किस्मत!
Who is Deniz Undav: कनाडा के टोरंटो स्टेडियम में रविवार (21 जून) को खेले गए फीफा वर्ल्ड कप 2026 के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में जर्मनी के फुटबॉल इतिहास का एक नया अध्याय लिखा गया। ग्रुप स्टेज के इस करो या मरो वाले मैच में पूर्व चैंपियन जर्मनी की टीम आइवरी कोस्ट (Ivory Coast) के खिलाफ एक घंटे के खेल तक 0-1 से पिछड़ रही थी और उस पर टूर्नामेंट से बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था।
ऐसे संकट के समय सब्सट्यूटिट खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतरे डेनिस उंदाव (Deniz Undav) ने दो जादुई गोल दागकर जर्मनी को न केवल 2-1 से जीत दिलाई, बल्कि साल 2014 के बाद पहली बार विश्व कप के नॉकआउट (राउंड ऑफ 32) स्टेज में भी पहुंचा दिया। डेनिस उंदाव की यह सफलता केवल एक मैच जीतने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उनके संघर्ष की एक बेमिसाल मिसाल है।

कौन हैं डेनिस उंदाव (Who is Deniz Undav)
जर्मनी के वारेल में जन्मे 29 वर्षीय डेनिस उंदाव का शुरुआती जीवन बेहद गरीबी और संघर्षों में बीता। जर्मन बुंडेसलीगा के मशहूर क्लब 'वेर्डर ब्रेमेन' ने उंदाव को उनकी युवावस्था में यह कहकर अपनी एकेडमी से निकाल दिया था कि उनका कद बहुत छोटा है और फुटबॉल में उनका कोई भविष्य नहीं है। इस रिजेक्शन से दिल टूटने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। 17 साल की उम्र में वे सेमी-प्रोफेशनल क्षेत्रीय लीग के क्लब 'हावेल्से' से जुड़े।
फैक्ट्री जाकर करते थे काम
चूंकि वहां फुटबॉल से केवल 120 पाउंड (लगभग ₹13,000) प्रति हफ्ता मिलते थे, जिससे गुजारा असंभव था, इसलिए उन्होंने एक फैक्ट्री में पूरे 8 घंटे लेज़र मशीन चलाने वाले ऑपरेटर की नौकरी शुरू की। उंदाव रोजाना सुबह 4 बजे उठकर फैक्ट्री जाते, 8 घंटे की शिफ्ट खत्म करके सीधे फुटबॉल ट्रेनिंग के लिए मैदान पर पहुंचते और रात को 8 बजे वापस घर लौटते थे।
मैदान पर उतरते ही बदला मैच का पासा
उंदाव ने साल 2024 में जर्मनी की नेशनल टीम के लिए देर से डेब्यू किया था। इस विश्व कप में भी कोच जूलियन नागल्समैन ने उन्हें शुरुआती एकादश में मौका नहीं दिया, लेकिन जब भी उन्हें 'सुपर-सब' के रूप में भेजा गया, उन्होंने मैच का रुख पलट दिया। मैच के 60वें मिनट में जब जर्मनी हार की कगार पर था, तब उंदाव को मैदान पर बुलाया गया।
उन्होंने 8 मिनट बाद (68वें मिनट में) एक शानदार वॉली शॉट मारकर आइवरी कोस्ट के गोलकीपर याहिया फोफाना को छकाते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। इसके बाद मैच के अंतिम क्षणों (94वें मिनट) में एक बेहद नियंत्रित और सूझबूझ भरा गोल दागकर जर्मनी को ऐतिहासिक जीत दिला दी। इससे पहले कुराकाओ के खिलाफ जर्मनी की 7-1 की जीत में भी वे 64वें मिनट में आए थे और महज कुछ ही मिनटों में एक गोल करने के साथ दो असिस्ट (गोल करने में मदद) भी किए थे।
'मैं महंगे कपड़ों और गाड़ियों का शौकीन नहीं, आम इंसान हूं'
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता के बाद भी उंदाव के पैर पूरी तरह जमीन पर हैं। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "मैं कोई महंगी डिजाइनर पोशाकें नहीं पहनता और न ही मेरे पास कोई बहुत बड़ी या महंगी गाड़ी है। मैं बहुत साधारण इंसान हूं और अच्छी तरह जानता हूं कि दो वक्त की रोटी कमाने के लिए कितनी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। स्टटगार्ट के लिए बुंडेसलीगा में 18 गोल करने वाले इस खिलाड़ी ने अब खुद को वैश्विक मंच पर साबित कर दिया है।















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