भाजपा-मोदी और बनारस का क्या हैं त्रिकोणीय समीकरण?

आपके इस सवाल का जवाब है उत्तर प्रदेश के जातीय और क्षेत्रीय समीकरण। वहां के युवा वोटर और पूर्वाचल के साथ-साथ बिहार पर कब्जा। दरअसल पहली बार भाजपा ने पिछड़ी जाति के किसी उम्मीदवार को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाया है। उत्तर प्रदेश में लगभग 32 फ़ीसदी लोग पिछड़ी जाति के हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश जहां से 22 सांसद चुने जाएंगे, पिछड़ी जातियों का बाहुल्य है।
पिछड़ी जातियों के साथ-साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश राज्य का सबसे पिछड़ा और ग़रीब इलाका है। मोदी अपने गुजरात मॉर्डल से लोगों के मन में विकास का सपना जगा चुके हैं। ऐसे में वाराणसी से मोदी का चुनाव लड़ना राजनैतिक दूरदर्शिता का कदम कहा जा सकता है। यहां मुसलमानों के अलावा ब्राह्मण और पिछड़ी जाति के लोग अधिक हैं। इतना ही नहीं वाराणसी के ज़रिए भाजपा की निगाहें बिहार और झारखंड की कुछ सीटों पर भी हैं।
Did You Know: वाराणसी में 32 फीसदी लोग पिछड़ी जाति के है।
बिहार का गया, बक्सर और आरा और झारखंड का पलामू वाराणसी के नज़दीक है। ऐसे में अगर मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ते है तो उसका इफेक्ट इन जगहों पर भी पड़ना तय है। वाराणसी संसदीय क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों में से तीन भाजपा के पास हैं। इतना ही नहीं मोदी युवाओं के रोल मार्डल बन गए है। वाराणसी में पहली बार 60 हज़ार युवा अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। यदि यह माना जाए कि इस बार के युवा वोटर मोदी के साथ हैं तो इन 60 हज़ार मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ऐसे में पार्टी को भरोसा है कि वाराणसी ने मोदी का चुनाव लड़ना भाजपा के लिए फायदेमंद है बजाए गुजरात से।
Did You Know: वाराणसी में करीब 32 फीसदी जनसंख्या पिछड़ी जाति है। ऐसे में मोदी के वहां से चुनाव लड़ने पर उसका फायदा भाजपा को मिलेगा।












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