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नरेंद्र मोदी का मुंबई दौरा: क्यों स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी खास है शिवाजी स्मारक?

शिवाजी स्मारक की ऊंचाई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से कहीं ज्यादा होगी। जहां स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की कुल ऊंचाई 93 मीटर के आस-पास है, वहीं शिवाजी स्मारक की ऊंचाई करीब 192 मीटर होगी।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मुंबई और पुणे का दौरा किया। जहां पीएम मोदी ने मुंबई के अरब सागर तट पर छत्रपति शिवाजी के स्मारक की आधारशिला रखी। शिवाजी महाराज की इस मूर्ति की तुलना पूरी दुनिया में मशहूर न्यूयॉर्क के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी की जा रही है। शिवाजी स्मारक के भूमि पूजन के लिए प्रदेश के तीन दर्जन के करीब जिलों से कलश में पानी और मिट्टी मंगाई गई है। चलिए एक नजर डालते हैं शिवाजी स्मारक की खूबियों पर...

नरेंद्र मोदी का मुंबई दौरा: क्यों स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी खास है शिवाजी स्मारक?
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स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से ऊंचा होगा शिवाजी महाराज का स्मारक

इस स्मारक की खूबियों की तुलना न्यूयॉर्क की मशहूर स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से की जा रही है। हालांकि शिवाजी स्मारक की ऊंचाई स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से कहीं ज्यादा होगी। जहां स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की कुल ऊंचाई 93 मीटर के आस-पास है, वहीं शिवाजी स्मारक की ऊंचाई करीब 192 मीटर यानी करीब 630 फीट होगी। यह देश ही नहीं पूरी दुनिया का सबसे बड़ा स्मारक होगा। इस स्मारक को मुंबई के अरब सागर में करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर स्थापित किया जाएगा। इसमें शिवाजी महाराज की बहुत बड़ी मूर्ति होगी। स्मारक में शिवाजी की खास मूर्ति को मशहूर शिल्पकार और पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित राम सुतार डिजाइन करेंगे। शिवाजी की मूर्ति के साथ-साथ उनके घोड़े की भी मूर्ति बनाई जाएगी। इसमें शिवाजी महाराज की मूर्ति 114 मीटर के करीब होगी।
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इस स्मारक को अरब सागर में 32 एकड़ चट्टान पर बनाया जा रहा है। इसे बेहद खास तरीके सजाया जा रहा है जिससे लोग इस स्मारक को देखने के लिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचे। इस जगह पर मंदिर, फूड कोर्ट, एम्फी थिएटर समेत कई खास सुविधाएं होंगी। जिससे यहां आने वाले लोग इसका पूरा लुत्फ ले सकें। माना जा रहा है कि यहां एक बार में 10 हजार लोग पहुंच सकेंगे। सरकार की योजना इसे खास दर्शनीय स्थल के तौर पर तैयार करने की है जिससे स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की तरह ही यहां भी लोग आएं। पर्यटन की दृष्टि से ये बेहद खास होगा। माना जा रहा है कि इस भव्य स्मारक को बनाने का खर्च करीब 3600 करोड़ रुपये होगा। फिलहाल पीएम नरेंद्र मोदी शिवाजी स्मारक की आधारशिला रखी। इस बीच इस स्मारक को लेकर सियासत भी गरमा गई है। विपक्ष खास कर कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी शिवाजी के स्मारक पर राजनीति कर रही है। विपक्ष के मुताबिक स्मारक के जरिए भारतीय जनता पार्टी मराठी वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर इस स्मारक को लेकर मछुआरों और पर्यावरणविदों ने विरोध सुर बुलंद किए हैं। उन्होंने अरब सागर पर स्मारक बनाने का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे समुद्री जीवन प्रभावित होगा और इसका असर लोगों पर भी पड़ेगा।

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