शहीदों के साथ पाक सेना की अमानवीयता के खिलाफ मोदी सरकार नहीं जाएगी अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट

नई दिल्ली। कारगिल की लड़ाई में भारत के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले शहीदों को न्याय दिलाने के लिए मोदी सरकार ने बेहद निराशाजनक रुख अख्तियार किया है। 1999 में कारगिल की लड़ाई में सौरभ कालिया सहित पांच लोगों के साथ पाक सेना की अमानवीयता के खिलाफ मोदी सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट जाने से इनकार कर दिया है।

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गौरतलब है कि कैप्टन सौरभ कालिया ने ही 1999 में कारगिल घुसपैठ की जानकारी दी थी। जिसके बाद उन्हें उनके पांच जवानों के साथ 15 मई 1999 को पाक सेना पकड़ लिया था और 6 जून को भारत की सेना को उनके पार्थिव शव को लौटाया था।

सौरभ कालिया के शरीर पर सिगरेट से जलाने, कान को गर्म रॉड से जलाने के निशान पड़े थे। यही नहीं उनकी आंखे भी फोड़ कर निकाल ली गयी थी। दांत भी बुरी तरह से तोड़े गये थे और उनकी कमर और हड्डियों को टुकड़ो में काटा गया था।

आपको बता दें कि 1999 में कारगिल की लड़ाई के समय 4 जाट रेजिमेंट के कैप्टन सौरभ कालिया सहित पांच जवानों को पाक सेना ने बंदी बना लिया था और उनके साथ अमानवीय शोषण किया जिसके चलते इनकी मौत हो गयी। शहीदों के साथ पाक सेना द्वारा की गयी इस मानवीयता के खिलाफ इनके परिवार वाले इंसाफ की मांग कर रहे हैं। लेकिन इन परिवारों को आखिरकार निराशा हाथ लगी है।

संसद में सांसद चंद्रशेखर ने मोदी सरकार से सवाल किया कि सौरभ कालिया सहित कारगिल शहीदों के मामले को क्या मोदी सरकार यूएन के मानवाधिकार आयोग में उठायेगी। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा कि मानवाधिकार आयोग को इस मामले में 2000 में ही अवगत करा दिया गया था और इस मामले के सभी पहलुओं पर विचार भी किया गया था लेकिन एक बार फिर से इस मामले को उठाना संभव नहीं लगता है।

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