'वन नेशन वन इलेक्शन' की पैरवी कर रही मोदी सरकार, तो क्यों नहीं करवा पा रही चार राज्यों में एक साथ चुनाव?
One Nation One Election: चुनाव आयोग ने शुक्रवार को हरियाणा और जम्मू कश्मीर के आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। बाकी दो राज्य झारखंड और महाराष्ट्र जहां पर 2024 में विधानसभा चुनाव होने हैं उनकी तारीखों की घोषणा नहीं की गई। चार राज्यों के एक साथ चुनाव ना करवाने पर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ चुकी है।
कांग्रेस, शिवसेनाी यूबीटी और एनसीपी ने सवाल उठाया है कि मोदी सरकार जो वन नेशन वन इलेक्शन की बात करते हैं लेकिन ये तो चार राज्यों में एक साथ चुनाव भी नहीं करा सकते।
शिवसेना सांसद संजय राउत, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और एनसीपी प्रमुख शरद पवार इस मुद्दें को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। विपक्षी पार्टियां ये भी दावे कर रही है, हार के डर से मोदी सरकार महाराष्ट्र और झारखंड में अभी चुनाव करवाने से बच रही है। तो आइए जानते हैं 'वन नेशन वन इलेक्शन' की पैरवी करने वाली मोदी सरकार, आखिर क्यों नहीं करवा पा रही चार राज्यों में एक साथ चुनाव?

क्या है 'वन नेशन वन इलेक्शन'?
'वन नेशन वन इलेक्शन' का मतलब है कि पूरे देश में एक ही समय पर लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराए जाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिनिधित्व वाली सरकार का मानना है है कि चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक बोझ भी घटेगा।
15 अगस्त के भाषण में पीएम मोदी ने की थी पैरवी
15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर अपने भाषण में भी कहा था कि वन नेशन वन इलेक्शन के लिए देश को आगे आना होगा। उन्होंने राजनीति दलों का आह्वान करते हुए कहा था भारत के संसाधनों का सर्वाधिक उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन नेशन वन इलेक्शन के सपने को साकार करने के लिए आगे आए।
चार राज्यों के बजाय केवल दो राज्यों में चुनाव
हालांकि इस भाषण के दो दिन बाद चुनाव आयोग ने घोषणा की कि हरियायाण में 1 अक्टूबर को एक चरण में चुनाव होंगे और जन्मू-कश्मीर में 18 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच तीन चरणों में विधानसभा चुनाव करवाए जाएंगे और दोनों ही राज्यों के एक साथ अक्टूबर को वोटों की गिनती के बाद चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। ऐसी उम्मीद थी कि महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव की तारीखों की घोषणा हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो विपक्षी मोदी सरकार पर हमलावर हो गए।
तो सवाल उठ रहा है कि 'वन नेशन वन इलेक्शन' की पैरवी करने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार चार राज्यों में एक साथ चुनाव कराने में असमर्थ क्यों दिख रही है? क्योंकि चुनाव आयोग ने तो चारों राज्यों में एक साथ चुनाव
चार राज्यों में एक साथ चुनाव क्यों नहीं हो सकते?
चार राज्यों में एक साथ विधानसभा चुनाव ना करवाने के पीछे प्रमुख कारण यह है कि इन राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल अलग-अलग समय पर समाप्त हो रहा है। याद रहे कुछ समय पहले चार राज्यों - मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में अलग-अलग समय पर चुनाव इसी वजह से अलग-अलग करवाए गए थे।
झारखंड और महाराष्ट्र में कब खत्म हो रहा सरकार का कार्यकाल?
बता दें झारखंड में वर्तमान सरकार का कार्यकाल 5 जनवरी 2025 को समाप्त होगा। वहीं महाराष्ट्र सरकारक की बात करें महाराष्ट्र सरकार का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म हो रहा है। माना जा रहा है कि दोनों राज्यों में सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के पहले वहां भी विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाएगा।
चुनाव आयोग का कहना है कि वह संविधान के अनुसार ही काम करता है। आयोग के पास विधानसभाओं के कार्यकाल को बढ़ाने या घटाने का अधिकार नहीं है।
संवैधानिक बाधाएं
संविधान के अनुच्छेद 83(2) और 172(1) के अनुसार, लोकसभा और विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इसे केवल आपातकाल की स्थिति में ही बढ़ाया जा सकता है। वन नेशन वन इलेक्शन के लिए संविधान संशोधन की जरूरत होगी, जो आसान नहीं है।
राजनीति दल क्यों नहीं चाहते "वन नेशन वन इलेक्शन"
कई राजनीतिक दल 'वन नेशन वन इलेक्शन' के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि इससे क्षेत्रीय मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा और राष्ट्रीय मुद्दे हावी रहेंगे। वहीं इसके फेवर करने वाले राजनीति दलों का मानना है कि 'वन नेशन वन इलेक्शन' से चुनावी खर्च कम होगा और बार-बार आचार संहिता लागू होने से विकास कार्यों पर असर नहीं पड़ेगा।
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