धर्मेंद्र प्रधान की होगी छुट्टी? कौन हैं ये 6 मंत्री,जो होंगे मोदी कैबिनेट से बाहर, क्यों इनसे छीना जा रहा पद?

Modi Cabinet Reshuffle: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले देश के सियासी गलियारों से बहुत बड़ी खबर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट में एक बड़ा और चौंकाने वाला फेरबदल करने की तैयारी में हैं। पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट बताती है कि इस बदलाव का सीधा कनेक्शन संगठन में होने वाले फेरबदल से भी है। सरकार और संगठन का तालमेल बिठाने के लिए कुछ बड़े मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

चर्चा तो यहां तक है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का जिम्मा बदला जा सकता है और आरबीआई (RBI) के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास देश के नए वित्त मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं धर्मेंद्र प्रधान से भी शिक्षा मंत्रालय ले लिया जाएगा। मोदी कैबिनेट के 6 ऐसे बड़े मंत्री हैं, जिनको मंत्रालय से बाहर किया जा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि बदलाव में किन 6 मंत्रियों की कुर्सी जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है।

Modi Cabinet Reshuffle

Cabinet Reshuffle Update: आखिर क्यों हो रही है बदलाव की चर्चा?

सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व सरकार और संगठन दोनों में नई ऊर्जा लाना चाहता है। अगले साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी उन राज्यों में मजबूत राजनीतिक संदेश देना चाहती है।

इसी वजह से कुछ मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है, जबकि संगठन के कुछ नेताओं को सरकार में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। PTI की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि कैबिनेट विस्तार और भाजपा की नई टीम का ऐलान लगभग साथ-साथ हो सकता है। हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही करेंगे।

किन 6 मंत्रियों को मोदी कैबिनेट से किया जा सकता है बाहर?

1. धर्मेंद्र प्रधान: क्या NEET और पेपर लीक ने डुबोई नैया?

संभावित फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर हो रही है। संघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पृष्ठभूमि से आने वाले प्रधान पिछले करीब 12 वर्षों से मोदी सरकार का हिस्सा हैं। वह फिलहाल ओडिशा के संबलपुर से सांसद हैं और जुलाई 2021 से शिक्षा मंत्रालय संभाल रहे हैं।

पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा मंत्रालय कई विवादों के कारण विपक्ष के निशाने पर रहा। वर्ष 2026 में नीट पेपर लीक, सीबीएसई डिजिटल कॉपी जांच में गड़बड़ी, यूजीसी की इक्विटी गाइडलाइन पर विवाद, 2024 में यूजीसी-नेट पेपर लीक और नई शिक्षा नीति लागू करने में हुई देरी जैसे मुद्दों ने सरकार पर दबाव बनाया। इन्हीं वजहों से उनके मंत्रालय में बदलाव या उन्हें संगठन में भेजे जाने की चर्चा तेज है।

सूत्र यह भी बता रहे हैं कि अगर ऐसा होता है तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिल सकती है, जबकि पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास को वित्त मंत्रालय सौंपे जाने की अटकलें भी चल रही हैं। हालांकि इन दावों की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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2. हरदीप सिंह पुरी: उम्र का तकाजा या कोई और विवाद?

पूर्व आईएफएस अधिकारी और मौजूदा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी संभावित बदलाव की सूची में बताया जा रहा है। 2014 में भाजपा से जुड़े पुरी 2017 से लगातार मंत्री हैं। हाल के महीनों में कांग्रेस ने तथाकथित 'एपस्टीन फाइल्स' का मुद्दा उठाते हुए उन पर सवाल खड़े किए थे। कांग्रेस का दावा था कि 2014 से 2017 के बीच उनकी जेफरी एपस्टीन से कई ईमेल और मुलाकातें हुई थीं। इन आरोपों पर राजनीतिक बहस जरूर हुई, लेकिन कोई आधिकारिक कार्रवाई नहीं हुई।

राजनीतिक जानकार यह भी मानते हैं कि उनकी उम्र और लंबे समय से मंत्री रहने का पहलू भी संभावित फेरबदल की चर्चाओं में शामिल है। इसके अलावा उनका राज्यसभा कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त होने वाला है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व उनके भविष्य को लेकर नया फैसला ले सकता है।

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3. रवनीत सिंह बिट्टू: दिल्ली से बोरिया-बिस्तर समेटकर पंजाब की तैयारी

कांग्रेस से बीजेपी में आए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू फिलहाल रेल राज्यमंत्री हैं। 21 जून 2026 को उनका राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका है और जून की शुरुआत में आई बीजेपी की नई लिस्ट में उनका नाम नहीं था।

खुद बिट्टू ने साफ कर दिया है कि वे 17 साल दिल्ली में रहने के बाद अब अपना सामान पैक कर चुके हैं और उनका पूरा फोकस अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव पर है। बीजेपी उन्हें लुधियाना की किसी सीट से चुनाव लड़ाकर पंजाब की सियासत में बड़ा चेहरा बनाने के मूड में है।

4. पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा: 'एक व्यक्ति, एक पद' का फॉर्मूला

बीजेपी अपनी इंटरनल पॉलिसी 'एक व्यक्ति, एक पद' को लेकर काफी गंभीर दिख रही है, जिसकी गाज इन दो बड़े चेहरों पर गिर सकती है। उत्तर प्रदेश की महाराजगंज सीट से सात बार सांसद रहे पंकज चौधरी जुलाई 2021 से वित्त राज्यमंत्री हैं। दिसंबर 2025 में उन्हें भाजपा का उत्तर प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया। अब पार्टी की 'एक व्यक्ति, एक पद' नीति के चलते उनके मंत्रिमंडल से बाहर होने की चर्चा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा उन्हें पूरी तरह संगठन की जिम्मेदारी देना चाहती है। अगर ऐसा होता है तो उनका पूरा फोकस चुनावी रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर रहेगा।

दिल्ली की राजनीति से आने वाले हर्ष मल्होत्रा भी संभावित फेरबदल की चर्चाओं में शामिल हैं। पूर्वी दिल्ली के सांसद और सहकारिता राज्यमंत्री मल्होत्रा को हाल ही में दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के अंदर लंबे समय से यह नीति लागू रही है कि एक नेता को एक समय में एक बड़ी जिम्मेदारी दी जाए। ऐसे में संगठन और सरकार दोनों पद एक साथ रखने की बजाय उन्हें किसी एक भूमिका में रखा जा सकता है। इसी वजह से उनके मंत्रिमंडल से बाहर होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

5. जॉर्ज कुरियन: चुनावी हार और कैबिनेट से इस्तीफा

मोदी कैबिनेट के इकलौते ईसाई चेहरे जॉर्ज कुरियन ने 23 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सुप्रीम कोर्ट के वकील रहे कुरियन को अल्पसंख्यक मामलों का राज्यमंत्री बनाया गया था। उनके इस्तीफे की बड़ी वजह केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे रहे। बीजेपी को वहां उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली और खुद कुरियन 'कंजिराप्पल्ली' सीट पर तीसरे नंबर पर पिछड़ गए थे।

आने वाले फेरबदल का पूरा गुणा-भाग, चुनावी राज्यों पर रहेगा फोकस!

इस फेरबदल के पीछे सिर्फ मंत्रियों को हटाना ही नहीं, बल्कि नए चेहरों को एंट्री देना भी है। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई हालिया मुलाकातों ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि खाका तैयार हो चुका है।

  • सहयोगी दलों का बढ़ेगा प्रतिनिधित्व? कैबिनेट फेरबदल को सिर्फ मंत्रालयों के बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा। अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन राज्यों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की चर्चा है। सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन के बाद वहां के कुछ सांसदों को भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। वहीं आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए कुछ राज्यसभा सांसदों के नाम भी चर्चा में हैं।
  • सहयोगी दलों का बढ़ेगा प्रतिनिधित्व? राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किसी वरिष्ठ नेता को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनडीए का समर्थन करने वाले कुछ सांसदों के नाम भी सामने आ रहे हैं। हालांकि इन मामलों में अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष के उस निर्णय पर भी निर्भर करेगा, जिसमें दल-बदल कानून के तहत दायर याचिकाओं पर फैसला होना है।
  • क्या कुछ नेताओं को मिलेगी राज्यपाल की जिम्मेदारी? सूत्र यह भी बता रहे हैं कि जिन मंत्रियों को सरकार से बाहर किया जाएगा, उनमें से कुछ को राज्यपाल बनाया जा सकता है। कर्नाटक के थावरचंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगूभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है। ऐसे में इन पदों पर भी नए चेहरों की नियुक्ति की संभावना जताई जा रही है।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद क्यों तेज हुई अटकलें?

23 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की थी। इसके दो दिन बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी राष्ट्रपति से मिले। आधिकारिक तौर पर इन बैठकों को शिष्टाचार मुलाकात बताया गया, लेकिन इसके बाद ही कैबिनेट विस्तार की चर्चा और तेज हो गई।

हालांकि सरकार की तरफ से अब तक फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। भाजपा में बड़े फैसले अक्सर आखिरी समय तक गोपनीय रखे जाते हैं, इसलिए अंतिम तस्वीर तभी साफ होगी जब प्रधानमंत्री कार्यालय या राष्ट्रपति भवन की तरफ से आधिकारिक घोषणा होगी।

फिलहाल मोदी कैबिनेट में बदलाव की चर्चाएं पूरी तरह राजनीतिक और सूत्रों पर आधारित हैं। किन मंत्रियों की जिम्मेदारी बदलेगी, कौन सरकार से बाहर जाएगा और किन नए चेहरों को मौका मिलेगा, इसका अंतिम फैसला आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगा। लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव, संगठन में बदलाव और राजनीतिक संतुलन इस संभावित फेरबदल के सबसे बड़े आधार बन सकते हैं।

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