'इंदिरा गांधी के बाद सिर्फ मोदी ही हैं', प्रणब मुखर्जी करते थे PM की तारीफ, बेटी शर्मिष्ठा ने अब खोले राज

सियासत के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जो कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गजों को हैरान कर सकती है। देश के पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के 'चाणक्य' कहे जाने वाले दिवंगत प्रणब मुखर्जी आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में निजी तौर पर क्या सोचते थे? इस बात का सबसे बड़ा खुलासा खुद उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने किया है। उन्होंने अपने पिता की पर्सनल डायरी के पन्नों को दुनिया के सामने रखकर कई ऐसी बातें बताई हैं, जो आज की राजनीति में एक नई बहस छेड़ चुकी हैं।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने साफ-साफ बताया कि उनके पिता का मानना था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद नरेंद्र मोदी ही देश के ऐसे इकलौते नेता हैं, जो जनता की नब्ज को सबसे बेहतर तरीके से पहचानते हैं। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने पिता की डायरी और निजी बातचीत का जिक्र करते हुए कई ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने एक बार फिर प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्तों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आइए जानें उन्होंने क्या-क्या कहा।

Pranab Mukherjee on PM Modi

डायरी में क्या लिखा था पीएम मोदी के बारे में?

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने पिता की डायरी के दिलचस्प किस्सों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में जब भीषण बाढ़ आई थी, तब पीएम मोदी ने वहां का दौरा किया था और अपनी दिवाली पहले सियाचिन में सेना के जवानों के साथ और फिर वहां के लोगों के साथ मनाई थी। इस घटना के बाद ही प्रणब दा ने डायरी में लिखा था कि मोदी में लोगों से जुड़ने की गजब की क्षमता है।

इसके अलावा प्रणब मुखर्जी इस बात के भी कायल थे कि नरेंद्र मोदी ने बहुत ही कम समय में विदेशी डिप्लोमेसी और विदेश नीति की बारीकियों को बेहद शानदार तरीके से समझ लिया था। यूपीए (UPA) सरकार और कांग्रेस के सबसे बड़े आलोचक होने के बावजूद पीएम मोदी के दिल में प्रणब दा के लिए एक अलग ही आदर और सम्मान था।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा,

"मेरे पिता ने अपनी डायरी में लिखा था कि इंदिरा गांधी के बाद, वह (PM मोदी) अकेले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो लोगों की नब्ज़ इतनी अच्छी तरह पढ़ सकते हैं। और मुझे याद है कि यह लिखा हुआ जम्मू-कश्मीर में आई भयानक बाढ़ के संदर्भ में आया था। और मोदी जी ने दिवाली मनाई, मुझे लगता है, पहले सियाचिन में और फिर जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ... और दूसरी बात, उन्होंने सच में इस बात की तारीफ की कि मिस्टर मोदी ने बहुत जल्दी विदेश नीति की बारीकियों को समझ लिया।"

Pranab Mukherjee Praised PM Modi In Diary Daughter sharmistha mukherjee
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प्रणब मुखर्जी और पीएम मोदी के रिश्ते कैसे थे?

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया कि उनके पिता और नरेंद्र मोदी के रिश्ते सिर्फ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक सीमित नहीं थे। दोनों नेताओं के बीच का यह तालमेल तब से था जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री भी नहीं बने थे। शर्मिष्ठा ने पीएम मोदी के हवाले से बताया कि जब वे दिल्ली में आरएसएस (RSS) के एक आम कार्यकर्ता के रूप में काम करते थे, तब सुबह की सैर के दौरान अक्सर उनकी मुलाकात प्रणब मुखर्जी से हो जाती थी। मोदी जी ने खुद शर्मिष्ठा को बताया था कि वे जब भी 'दादा' को देखते थे, उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे।

प्रणब दा ने अपनी डायरी में लिखा है,

"नरेंद्र मोदी भले ही मेरी पार्टी और हमारी सरकार के सबसे तीखे विरोधियों में से एक हैं, लेकिन जब भी वे मुझसे अकेले में मिलते हैं, तो न जाने क्यों उनके मन में मेरे लिए एक अजीब सा सॉफ्ट कॉर्नर रहता है। वे हमेशा मेरे पैर छूते हैं और कहते हैं कि ऐसा करने से उन्हें खुशी मिलती है।"

RSS मुख्यालय जाने पर जब बेटी से हुआ था झगड़ा

साल 2018 में जब प्रणब मुखर्जी नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय गए थे, तो पूरे देश की राजनीति में भूचाल आ गया था। कांग्रेस के लोग उनके इस फैसले से बेहद नाराज थे। शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया कि उस समय वे खुद कांग्रेस की एक्टिव पॉलिटिक्स में थीं और अपने पिता के इस फैसले पर बुरी तरह भड़क गई थीं।

शर्मिष्ठा ने अपने पिता से बहस करते हुए कहा था कि वहां जाकर आप आरएसएस को एक बड़ी पहचान और मान्यता दे रहे हैं। उन्होंने अपने पिता से कहा था कि आरएसएस के कार्यक्रम में जाकर वह संगठन को वैधता दे रहे हैं। इस बात पर प्रणब दा का गुस्सा फूट पड़ा था। उन्होंने कड़े लहजे में कहा था, "आरएसएस को मान्यता देने वाला मैं कौन होता हूं? देश की जनता ने उनके एक प्रचारक को भारी बहुमत से प्रधानमंत्री चुनकर पहले ही आरएसएस को अपनी सबसे बड़ी मान्यता दे दी है। अगर कांग्रेस इस सच्चाई को नजरअंदाज करती है, तो वह अपना ही नुकसान करेगी।" उनका मानना था कि बातचीत (Dialogue) ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।

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क्यों माने जाते थे सर्वसम्मति बनाने वाले नेता?

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि उनके पिता की सबसे बड़ी ताकत अलग-अलग विचारधाराओं के नेताओं से संवाद बनाए रखना था। भारतीय जनता पार्टी, वाम दल या कांग्रेस, हर दल के नेताओं के साथ उनके अच्छे रिश्ते थे। उन्होंने हमेशा माना कि संसद को लगातार बाधित करना लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। यही सलाह उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी उस समय दी थी, जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी। प्रणब मुखर्जी का मानना था कि लोकतंत्र में बहस बंद नहीं होनी चाहिए और सरकार व विपक्ष, दोनों को बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

संसद ठप करने के खिलाफ थे प्रणब मुखर्जी

शर्मिष्ठा ने बताया कि उनके पिता को सभी पार्टियों को साथ लेकर चलने वाला नेता माना जाता था। चाहे बीजेपी हो या कम्युनिस्ट पार्टियां, सबके साथ उनके रिश्ते बेहद मधुर थे। उनका मानना था कि विपक्ष का काम सिर्फ संसद को रोकना या हंगामा करना नहीं होना चाहिए।

जब अटल बिहारी वाजपेयी के समय कांग्रेस विपक्ष में थी, तब प्रणब दा ने सोनिया गांधी को भी यही सलाह दी थी कि संसद में बहस और चर्चा होनी चाहिए, न कि कामकाज ठप। शर्मिष्ठा का कहना है कि आज की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच का वह तालमेल पूरी तरह गायब हो चुका है, जो एक मजबूत लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। दोनों ही पक्षों को देश हित में बीच का रास्ता निकालना सीखना होगा।

Pranab Mukherjee Praised PM Modi In Diary Daughter sharmistha mukherjee

अब जानिए शर्मिष्ठा मुखर्जी के बारे में और वो क्या करती हैं? Who is Sharmistha Mukherjee?

प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी खुद भी एक बेहद टैलेंटेड और बहुमुखी प्रतिभा की धनी महिला हैं। 30 अक्टूबर 1965 को पश्चिम बंगाल में जन्मी शर्मिष्ठा मुखर्जी मुख्य रूप से भारत की एक बेहतरीन कथक डांसर और कोरियोग्राफर हैं। उन्होंने महज 12 साल की उम्र से डांस सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने पंडित दुर्गालाल, विदुषी उमा शर्मा और राजेंद्र गंगानी जैसे बड़े गुरुओं से ट्रेनिंग ली है। उनके डांस और कदमों की रफ्तार की तारीफ बड़े-बड़े कला समीक्षक करते रहे हैं।

शर्मिष्ठा का बचपन दिल्ली में बीता और उन्होंने दिल्ली के मशहूर सेंट स्टीफंस कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए शर्मिष्ठा जुलाई 2014 में कांग्रेस में शामिल हुई थीं। उन्होंने पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काफी काम किया। साल 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें ग्रेटर कैलाश सीट से मैदान में उतारा था, लेकिन वे तीसरे नंबर पर रहीं और चुनाव हार गईं। इसके बाद राजनीतिक उतार-चढ़ाव को देखते हुए साल 2021 में उन्होंने एक्टिव पॉलिटिक्स को पूरी तरह से अलविदा कह दिया और अब वे अपनी कला और लेखन पर ध्यान दे रही हैं।

सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने के बाद शर्मिष्ठा मुखर्जी अब लेखन, सार्वजनिक कार्यक्रमों और अपने पिता के जीवन से जुड़े संस्मरणों को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। हाल के दिनों में उन्होंने अपने पिता की डायरी और निजी अनुभवों पर आधारित पुस्तक के जरिए कई ऐसे प्रसंग साझा किए हैं, जिनकी पहले सार्वजनिक चर्चा नहीं हुई थी।

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