Sonam Wangchuk Hunger Strike: 'दिल्ली नहीं आ सकते तो अपने शहर में रखें उपवास', वांगचुक ने क्यों की खास अपील?
Sonam Wangchuk Hunger Strike: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'शिक्षा और पर्यावरण' को बचाने के लिए शुरू हुआ आंदोलन अब और तेज हो गया है। प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की अनिश्चितकालीन भूख हड़तालका आज दूसरा दिन है।
केवल नमक और पानी पर रह रहे वांगचुक ने सोमवार, 29 जून को देश के युवाओं, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस आंदोलन में शामिल होने की एक बेहद भावुक अपील की है।

वांगचुक ने देशवासियों से कहा है कि देश के शिक्षा और पर्यावरण को बचाने की इस लड़ाई में वे कम से कम एक दिन के लिए उनके साथ भूख हड़ताल पर जरूर बैठें।
जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक का देश के नाम संदेश
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में वांगचुक कह रहे हैं कि अच्छी शिक्षा, सुरक्षित पर्यावरण और लद्दाख को उसके हक दिलाने के लिए यह आंदोलन बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने देशभर के लोगों से अपील की है कि वे जहां भी हैं, वहीं से सरकार तक अपनी बात पहुंचाएं। उनका कहना है कि अगर लोग सिर्फ एक दिन के लिए खाना छोड़कर इस आंदोलन से जुड़ेंगे, तो सरकार पर जिम्मेदारी तय करने का बड़ा दबाव बनेगा।
सोनम वांगचुक की यह हड़ताल रविवार से शुरू हुई है। अनशन पर बैठने से पहले वे महात्मा गांधी की समाधि राजघाट गए और बापू को श्रद्धांजलि दी। वांगचुक का मानना है कि अहिंसा और सत्याग्रह ही अपनी बात मनवाने के सबसे मजबूत और लोकतांत्रिक तरीके हैं। इस आंदोलन में उनका साथ देने के लिए कई सामाजिक कार्यकर्ता और युवा भी भारी संख्या में जंतर-मंतर पर जुटे हुए हैं।
क्यों धरने पर बैठे हैं वांगचुक? क्या हैं दो मुख्य मांगें?
सोनम वांगचुक ने साफ किया कि उन्होंने सरकार को दो प्रमुख मांगों को लेकर अल्टीमेटम दिया था, और सरकार की तरफ से कोई जवाब न मिलने के बाद ही उन्होंने रविवार (28 जून) को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि 'राजघाट' जाकर उन्हें नमन किया और अपना अनशन शुरू किया। उनकी दो टूक मांगें इस प्रकार हैं:
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: हाल ही में हुए NEET घोटाले और देश में लगातार सामने आ रही पेपर लीक की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। वांगचुक का कहना है कि बिना बेहतरीन शिक्षा के भारत कभी 'विकसित भारत' नहीं बन सकता और मौजूदा सरकार शिक्षा विरोधी काम कर रही है।
लद्दाख की सुरक्षा: लद्दाख के पर्यावरण, वहां के ग्लेशियरों, स्थानीय संस्कृति को बचाने और वहां लोकतंत्र की बहाली के लिए सरकार अपने पुराने वादे के मुताबिक लद्दाख को छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल करे।
शिक्षा व्यवस्था में 'कोर्स करेक्शन' की जरूरत: Sonam Wangchuk
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को सही दिशा में ले जाने के लिए बड़े सुधारों की जरूरत है।
उन्होंने कहा,'दुनिया का कोई भी विकसित देश अच्छी शिक्षा में निवेश किए बिना आगे नहीं बढ़ा है। भारत भी मजबूत शिक्षा व्यवस्था के बिना विकसित भारत नहीं बन सकता। हाल के समय में जो घटनाएं सामने आई हैं, वे दिखाती हैं कि शिक्षा क्षेत्र में गंभीर समस्याएं हैं। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस सुधार प्रक्रिया की पहली सीढ़ी हो सकता है।'
दिल्ली पुलिस पर सुविधाएं रोकने का आरोप
इस बीच CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सोनम वांगचुक के अनशन शुरू करने के कुछ समय बाद ही जंतर-मंतर पर पानी और स्वच्छता संबंधी सुविधाएं बंद कर दी गईं।
दीपके का आरोप है कि प्रदर्शन स्थल पर पानी की आपूर्ति और सफाई व्यवस्था रोक दी गई है, जबकि वांगचुक की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए यह बेहद जरूरी है। उन्होंने कह, हमने कई बार अधिकारियों से अनुरोध किया, लेकिन पुलिस सहयोग नहीं कर रही है। हमें आशंका है कि आगे भी अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रभावित की जा सकती हैं।














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