Monsoon Session से पहले नहीं होगा मोदी कैबिनेट में फेरबदल!आखिर क्यों टल गया बड़ा फैसला, इनसाइड स्टोरी
Modi Cabinet Reshuffle BIG Update: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में बड़े फेरबदल की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। पिछले कुछ दिनों से लगातार यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि मानसून सत्र से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार और कई मंत्रियों के विभागों में बदलाव हो सकता है। लेकिन अब सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संसद का मानसून सत्र खत्म होने तक किसी भी तरह का कैबिनेट फेरबदल होने की संभावना नहीं है। अगर कोई बदलाव होता भी है तो वह अगस्त के बाद ही देखने को मिल सकता है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल में होने वाला यह बड़ा फेरबदल अब संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) के खत्म होने तक के लिए टाल दिया गया है। इस बड़े फैसले के पीछे कई ठोस वजहें हैं। सबसे पहली बात तो यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद 05 जुलाई से इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के तीन देशों के बेहद व्यस्त दौरे पर जा रहे हैं। उनके लौटने के ठीक एक हफ्ते बाद, यानी 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने की उम्मीद है, जो 13 अगस्त तक चल सकता है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के टॉप सोर्स का कहना है कि जब भी कैबिनेट में कोई बड़ा बदलाव होना होता है, तो पीएम मोदी कम से कम तीन-चार दिन पहले अपने वरिष्ठ मंत्रियों को इसके संकेत दे देते हैं, लेकिन इस बार अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। सरकार की पहली प्राथमिकता इस समय संसद के भीतर अहम कानूनों को पास कराना है।
क्यों टला कैबिनेट का विस्तार? जानिए असली वजह
इस समय सरकार का पूरा ध्यान अपनी नई टीम बनाने से ज्यादा संसद में अपनी सीटों के गणित को मजबूत करने पर टिका हुआ है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसद और शिव सेना (UBT) के 6 सांसद टूटकर एनडीए सरकार के समर्थन में आए हैं। लोकसभा अध्यक्ष जल्द ही इन बागी सांसदों के विलय और सदन में इनके बैठने की व्यवस्था पर अंतिम फैसला ले सकते हैं।
सरकार को मानसून सत्र में कुछ ऐसे बेहद अहम संविधान संशोधन बिल (Constitutional Amendment Bills) पास कराने हैं, जिनके लिए सदन में दो-तिहाई (2/3rd) बहुमत की जरूरत होती है। हालांकि सरकार इस आंकड़े के बेहद करीब पहुंच चुकी है, लेकिन लोकसभा में अभी भी वह जादुई आंकड़े से थोड़ी पीछे है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस द्वारा डीएमकी (DMK) का साथ छोड़कर विजय की पार्टी से हाथ मिलाने के बाद, डीएमके संसद में वोटिंग के दौरान वॉकआउट कर सकती है, जिससे सरकार की राह आसान हो जाएगी।
मानसून सत्र में आएंगे ये ऐतिहासिक बिल
इस बार का मानसून सत्र बेहद हंगामेदार और ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि सरकार कई बड़े कानून पटल पर रखने की तैयारी में है।
- महिला आरक्षण और परिसीमन बिल (131वां संविधान संशोधन): सरकार इस बिल को नए संशोधनों के साथ दोबारा पेश कर सकती है। इसमें लोकसभा और राज्यों की विधानसभा सीटों की संख्या को सीधे 50% तक बढ़ाने का बड़ा प्रावधान शामिल हो सकता है।
- नेताओं के जेल जाने से जुड़ा कानून (130वां संविधान संशोधन): इस नए प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री 30 दिन से ज्यादा समय तक जेल में रहता है, तो उसे अपना पद छोड़ना होगा। संयुक्त संसदीय समिति (JPC) इस कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों की सिफारिश करेगी।
- वन नेशन, वन इलेक्शन: देश में एक साथ चुनाव कराने वाले बिल पर बनी कमेटी के कार्यकाल को बढ़ाने का प्रस्ताव भी इसी सत्र में लाया जा सकता है।
- अन्य बड़े कानून: इसके अलावा एफसीआरए (FCRA) में बदलाव, सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने, कॉरपोरेट लॉ रिफॉर्म्स और सिक्योरिटीज मार्केट कोड जैसे कड़े बिल भी पास कराने की लिस्ट में शामिल हैं।
राघव चड्ढा और नए चेहरों की एंट्री पर क्या है अपडेट?
भले ही कैबिनेट का विस्तार टल गया हो, लेकिन जिन नए चेहरों को टीम मोदी में शामिल करने की चर्चा है, उनकी लिस्ट लगभग फाइनल मानी जा रही है। इस लिस्ट में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला नाम आम आदमी पार्टी (AAP) से भाजपा में आए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का है, जिन्हें नई कैबिनेट में कोई बड़ा रणनीतिक पद मिल सकता है। उनके साथ लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल के नाम पर भी मुहर लग सकती है।
इनके अलावा महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे को भी कैबिनेट में बड़ी जगह मिल सकती है, क्योंकि उन्होंने ही उद्धव गुट के 6 सांसदों को एनडीए के पाले में लाने का बड़ा काम किया था।
साथ ही बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार और टीएमसी छोड़कर आए सुखेंदु शेखर राय भी मंत्री पद की रेस में बने हुए हैं। संगठन के स्तर पर भी बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन जल्द ही "टीम नितिन नबिन" का ऐलान करने वाले हैं, जिसमें कई युवा चेहरों को पार्टी की कमान सौंपी जाएगी, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन के काम में लगाया जाएगा।
विपक्ष भी सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा
दूसरी तरफ विपक्ष भी इस मानसून सत्र में बेहद आक्रामक मूड में नजर आने वाला है। विपक्षी दल देश में कम बारिश (कमजोर मानसून), सूखे और बाढ़ के हालात पर सरकार से जवाब मांगेंगे।
इसके अलावा देश भर में चर्चा का विषय बने नीट (NEET) पेपर लीक का मुद्दा, राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोप, पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार को पूरी तरह घेरने की रणनीति बना चुका है। क्षेत्रीय पार्टियों में हुई टूट को लेकर भी संसद के भीतर एक बड़ा सियासी मुकाबला देखने को मिल सकता है।
















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