'जंतर-मंतर को कब तक करेंगे इग्नोर?' कॉकरोच जनता पार्टी प्रमुख अभिजीत ने पीएम मोदी को लिखा ओपन लेटर
Cockroach Janta Party protest: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा धांधली को लेकर छात्रों और सोशल वर्कस का आंदोलन अब काफी उग्र और गंभीर रूप लेता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में जारी इस जन-प्रदर्शन को आज 15 दिन पूरे हो चुके हैं। इस आंदोलन का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जाने-माने सोशल एक्टविस्ट सोनम वांगचुक समेत 25 अन्य प्रदर्शनकारी पिछले आठ दिनों से अनवरत भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
इतने दिन बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल देखने को नहीं मिली है, जिससे आंदोलनकारियों का हौसला टूटने के बजाय गुस्सा बढ़ता जा रहा है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ओपेन लेटर लिखकर सरकार की इस रहस्यमयी चुप्पी पर कड़े सवाल खड़े किए हैं और छात्रों के हित में इस मामले में तुरंत संवेदनशील हस्तक्षेप की मांग की है।

दिपके ने 4 जुलाई 2026 को लिखे इस पत्र में बेहद झकझोरने वाले आंकड़े पेश किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब 20 जून को यह आंदोलन शुरू हुआ था, तब परीक्षा प्रणाली और परिणाम के तनाव से ग्रसित होकर देश में 11 छात्र अपनी जान गंवा चुके थे। आंदोलन के इन 15 दिनों के बीतने तक यह दर्दनाक संख्या बढ़कर अब 29 तक पहुंच चुकी है, जो बेहद चिंताजनक है।
पीएम मोदी की चुप्पी और शिक्षा मंत्री की जवाबदेही
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित इस पत्र में दिपके ने तीखे सवाल पूछे हैं कि आखिर देश के युवा कब तक सरकार की उपेक्षा का शिकार होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में भूख हड़ताल सरकारों पर नैतिक दबाव बनाने का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता रहा है। इसके बावजूद, देश के संवेदनशील मुद्दों पर बोलने वाले प्रधानमंत्री जंतर-मंतर पर बेहद गंभीर स्थिति में भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की सुध नहीं ले रहे हैं।
दिपके ने नीट परीक्षा में पेपर लीक और अन्य धांधलियों के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की कार्यशैली और जवाबदेही पर बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की गड़बड़ियों और 29 निर्दोष युवाओं की मौतों के बावजूद शिक्षा मंत्री को उनके पद से बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? उन्होंने मांग की है कि शिक्षा मंत्री को तुरंत उनके पद से हटाया जाए।
अनशनकारियों की बिगड़ रही तबीयत
दिल्ली के जंतर-मंतर की विषम मौसमी परिस्थितियों के बीच अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। दिपके के पत्र में बताया गया है कि सात दिनों के लगातार अनशन के चलते वांगचुक का वजन लगभग 5 किलोग्राम घट चुका है। डॉक्टरों और उनके करीबियों ने उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता जताई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इस संवेदनशील स्थिति को हल करने का कोई प्रयास नजर नहीं आता।
दिपके ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह अपनी संवैधानिक जवाबदेही से पूरी तरह पल्ला झाड़ रहा है और देश के भावी कर्णधारों की न्यायसंगत मांगों को अनसुना करके इस जन-आंदोलन को कुचलना चाहता है। खुले पत्र में नाराजगी जताते हुए लिखा गया है कि अनशनकारियों के साथ किसी भी प्रकार का आधिकारिक संपर्क या संवाद स्थापित नहीं किया गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि सत्ता युवाओं से दूरी बना रही है।
पुलिसिया कार्रवाई और अस्थायी लाइब्रेरी का अपमान
इस पत्र में जंतर-मंतर धरना स्थल पर दिल्ली पुलिस द्वारा की गई एक अनपेक्षित कार्रवाई का भी विशेष रूप से उजागर किया गया है। अभिजीत दिपके का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने आंदोलन स्थल पर प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा बनाई गई एक अस्थायी लाइब्रेरी में जबरन तोड़फोड़ की और वहां रखी किताबों को अभद्र तरीके से फेंक दिया। इस पुस्तकालय में हमारे राष्ट्रीय नायकों जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. बी.आर. आंबेडकर और शहीद भगत सिंह की पुस्तकें शामिल थीं।












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