Punjab Congress Crisis: पंजाब कांग्रेस में मची खींचतान पर AAP का बड़ा हमला, सियासत हुई तेज
Punjab Congress Crisis: पंजाब की सियासत में एक बार फिर गरमाहट आ गई है। प्रदेश कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह को लेकर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने तीखा हमला बोला है। आप के पंजाब महासचिव बलतेज पन्नू ने कांग्रेस की इस गुटबाजी पर गहरा तंज कसा है। उन्होंने विपक्षी दल की सांगठनिक स्थिति पर सीधे सवाल उठाए हैं।
बलतेज पन्नू ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में मचे इस घमासान के बीच कहा कि पंजाब की जनता आज यह जानने के लिए बेताब है कि आखिर कांग्रेस पार्टी को चला कौन रहा है।

उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर सुलग रही गुटबाजी की आग में घी डालने का काम किया है और पार्टी में नेतृत्व के संकट को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है।
कांग्रेस की गुटबाजी पर उठाए बड़े सवाल
आप नेता ने कांग्रेस नेतृत्व की कमजोरी को उजागर करते हुए कहा कि पार्टी में हर नेता खुद को आलाकमान समझ रहा है। स्थिति यह हो गई है कि कार्यकर्ताओं को भी समझ नहीं आ रहा कि वे किस नेता के निर्देश का पालन करें। इस सांगठनिक भ्रम के कारण राज्य में मुख्य विपक्षी दल लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है और जनता के मुद्दों से ध्यान भटक रहा है।
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से शीर्ष नेताओं के बीच वर्चस्व की जंग जारी है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू जैसे दिग्गज नेताओं के बीच आपसी खींचतान अक्सर खुलकर सामने आती रही है। इसी कलह को आम आदमी पार्टी ने अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है।
पंजाब की सियासत पर इसका असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की यह गुटबाजी न केवल उसकी अपनी साख को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि राज्य में विपक्ष की भूमिका को भी बेहद कमजोर कर रही है। आप महासचिव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य के लोग विभिन्न मुद्दों पर एक मजबूत और एकजुट विपक्ष की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस आंतरिक लड़ाई में ही व्यस्त है।
आम आदमी पार्टी इस स्थिति का पूरा राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश में है। बलतेज पन्नू के इस तीखे हमले के बाद कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के कई नेता अब इस डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों और बयानों से पार्टी के भीतर की दरारें अब पूरी तरह उजागर हो गई हैं।
फिलहाल, पंजाब की जनता इस सियासी ड्रामे को बेहद करीब से देख रही है। कांग्रेस आलाकमान के सामने अब अपनी प्रदेश इकाई को एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है, क्योंकि आने वाले समय में होने वाले स्थानीय निकायों और अन्य राजनीतिक मुकाबलों के लिए पार्टी का यह बिखराव उसके लिए भारी साबित हो सकता है।














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