Delhi Pollution: कब साफ होगी दिल्ली की हवा? CM रेखा गुप्ता ने बताया रोडमैप, EV Policy से Winter Plan तक समझिए
Delhi Pollution Rekha Gupta: दिल्ली की हवा कब साफ होगी? यह सवाल हर साल सर्दियां आते ही करोड़ों लोगों के मन में उठता है। नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी लागू होने के बाद यह सवाल और तेज हो गया है। रेखा गुप्ता सरकार ने अपनी नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी लागू कर दी है, जिसमें पेट्रोल और डीजल गाड़ियों को हटाने की आखिरी तारीख (डेडलाइन) भी तय कर दी गई है।
इस नई नीति के आधिकारिक ऐलान के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया कि आखिर दिल्ली की जनता को साफ हवा में सांस लेने का मौका कब मिलेगा और सरकार का ग्राउंड प्लान क्या है।

इस नई रणनीति के तहत सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य 31 मार्च 2030 तक दिल्ली की सड़कों पर दौड़ने वाले कुल वाहनों में से कम से कम 30% गाड़ियों को पूरी तरह इलेक्ट्रिक (इलेक्ट्रिफिकेशन) बना देना है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस बार सरकार का यह प्रदूषण-विरोधी मॉडल कैसे काम करेगा और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा।
प्रदूषण कब होगा कम? सीएम रेखा गुप्ता का सीधा जवाब
जब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से यह सीधा सवाल पूछा गया कि इस सख्त पॉलिसी के बाद दिल्ली का प्रदूषण कितना प्रतिशत और कब तक कम हो जाएगा, तो उन्होंने बहुत ही व्यावहारिक जवाब दिया। उन्होंने साफ किया कि प्रदूषण को किसी एक फिक्स तारीख या फिक्स आंकड़े में नहीं बांधा जा सकता।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा,
"ईवी पॉलिसी के साथ-साथ हम इस साल 70 लाख नए पौधे लगा रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को पूरी तरह इलेक्ट्रिक पर शिफ्ट किया जा रहा है और धूल को रोकने (डस्ट मिटिगेशन) पर लगातार काम जारी है। जैसे-जैसे लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाएंगे, प्रदूषण का ग्राफ नीचे आने लगेगा। कोई भी इसकी सटीक तारीख नहीं बता सकता, लेकिन हमारी दिशा एकदम सही है।"
उन्होंने आगे बताया कि दिल्ली इस मोर्चे पर लगातार आगे बढ़ रही है। आज दिल्ली की सड़कों पर 4,500 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ रही हैं, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे ज्यादा हैं। इसके साथ ही दिल्ली के पास सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क और देश की सबसे मजबूत ईवी पॉलिसी है, जिसे केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों का भी पूरा साथ मिल रहा है।
गाड़ियों पर कब से लग रही है पाबंदी?
सरकार ने इस बार कोई ढील नहीं छोड़ी है और साफ-साफ तारीखें सामने रख दी हैं।
1 जनवरी 2027 से: दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा और N1 कैटगरी के माल वाहक (गुड्स कैरियर) वाहनों का ही नया रजिस्ट्रेशन हो सकेगा। पेट्रोल-डीजल से चलने वाले नए कमर्शियल थ्री-व्हीलर और छोटे हाथी जैसी गाड़ियां रजिस्टर्ड नहीं होंगी।
1 अप्रैल 2028 से: दिल्ली के लोग अपने लिए पेट्रोल से चलने वाले नए टू-व्हीलर्स (स्कूटर और बाइक) नहीं खरीद पाएंगे। इस तारीख के बाद सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का ही रजिस्ट्रेशन होगा।
क्या है नया विंटर एक्शन प्लान और ग्रैप?
अक्सर देखा गया है कि सर्दियों में जब प्रदूषण अचानक बढ़ता है, तो आपातकालीन नियम यानी ग्रैप (GRAP) को लागू करने में दो-तीन दिन की देरी हो जाती है, जिससे लोग परेशान होते हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए दिल्ली सरकार ने जुलाई में ही विंटर एक्शन प्लान का एलान कर दिया है, जो 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहेगा।
इस बार की खास बात यह है कि 10 दिसंबर से 28 जनवरी के बीच होने वाले कंस्ट्रक्शन (निर्माण कार्य) को पहले से ही ग्रैप-नोटिफाइड मान लिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि इस दौरान पाबंदियों के लिए किसी अलग सरकारी लेटर या नोटिफिकेशन का इंतजार नहीं करना होगा, नियम अपने आप लागू माने जाएंगे। इसके अलावा बाकी दिनों में ग्रैप की सामान्य पाबंदियां पहले की तरह ही चलती रहेंगी।
कैसे काम करेगा राज्यों का आपसी तालमेल?
दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां का प्रदूषण सिर्फ दिल्ली की सीमाओं के अंदर का नहीं है, बल्कि यह पूरे एनसीआर (NCR) का साझा संकट है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार पूरे रीजन को एक साथ लाने के लिए नार्दर्न जोनल काउंसिल और पर्यावरण मंत्रालय के स्तर पर गंभीर बातचीत हुई है। हरियाणा और राजस्थान की सरकारों के साथ मिलकर एक कॉमन प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है।
केंद्र सरकार भी इसमें बड़ा सहयोग कर रही है। अब पुरानी बसों और ट्रकों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए मिलने वाली सब्सिडी और ब्याज में छूट की योजना को पूरे एनसीआर के जिलों में लागू कर दिया गया है। पड़ोसी राज्य भी अब दिल्ली की तर्ज पर अपनी ईवी नीतियां तैयार कर रहे हैं।
पाबंदियों को जमीन पर कैसे लागू कराएगी सरकार?
अक्सर यह सवाल उठता है कि दिल्ली पुलिस सीधे राज्य सरकार के अधीन नहीं है, तो ऐसे में नियमों का पालन कैसे होगा? इसके लिए दिल्ली सरकार ने एक नया रास्ता निकाला है। दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी (DPCC) के वॉलंटियर्स को 'वायुदूत' प्रोग्राम के तहत तैनात किया गया है।
पीडब्ल्यूडी (PWD), पर्यावरण विभाग, दिल्ली पुलिस और ट्रैफिक पुलिस, इन सभी एजेंसियों को अब एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले आया गया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रदूषण सिर्फ सरकार की सिरदर्दी नहीं है, बल्कि इसमें आम जनता की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है, तभी दिल्ली की हवा को पूरी तरह साफ बनाया जा सकता है।














Click it and Unblock the Notifications