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Mizoram Election: म्यांमार के शरणार्थियों को मिजोरम में क्यों चाहिए जमीन? नई सरकार से इन चीजों की है डिमांड

मिजोरम में इस समय 31 हजार से ज्यादा म्यांमार से आए शरणार्थी रह रहे हैं। राज्य में 7 नवंबर को विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में आने वाली नई सरकार से इन म्यांमारी शरणार्थियों की कुछ मांगें हैं, जिनमें जमीन की भी मांग शामिल है।

मिजोरम में रह रहे म्यांमार से जान बचाकर भागे ज्यादातर शरणार्थियों के लिए वैसे तो नई सरकार से दो वक्त का भोजन और बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा मिलने की ही उम्मीद है। क्योंकि, इन्हें जो राशन मिल रहा था, फिलहाल उसमें कुछ रुकावट आ गई है। अभी ये म्यांमारी शरणार्थी विभिन्न राहत कैंपों में रह रहे हैं।

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दो महीनों से सरकारी राशन बंद होने से बढ़ी मुश्किल
2021 में म्यांमार से भाग कर आने वाले इन शरणार्थियों में काफी लोग सिहमुई राहत कैंप में भी डेरा डाले हुए हैं। इन्हें सितंबर से पहले तक तो राज्य सरकार की ओर से राशन और अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध करवाई जा रही थीं। इनमें से एक शिविर में बांस और टिन से बने दो अस्थाई हॉल में 130 लोगों का ग्रुप एक साथ ही रहता है। राज्य सरकार की ओर से सप्लाई बंद होने के बाद इनके लिए परिवारों को पालना मुश्किल हो रहा है, इसलिए ये लोग काम की तलाश में जुटे हुए हैं।

इन्हीं शरणार्थियों में शामिल म्यांमार के चिन प्रदेश के माटुपी कस्बे के रहने वाले कपथांग ने कहा है, 'नई सरकार से उम्मीद है कि वो हमें राशन और जरूरी चीजें उपलब्ध कराना जारी रखेगी। पिछले दो महीनों से जब से सरकार ने सप्लाई रोक दी है, राहत शिविरों में जिंदगी मुश्किल हो गई है।' इसके अलावा ये सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं की भी मांग कर रहे हैं।

म्यांमार के शरणार्थियों का क्यों बंद हुआ राशन?
उन्होंने कहा, 'हम नहीं जानते कि क्यों, लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि क्योंकि मणिपुर से भी राज्य में जातीय हिंसा के बाद शरणार्थी मिजोरम आ गए, जिससे सरकार पर भार बढ़ गया और उसने मदद का हाथ बढ़ाना बंद कर दिया। लेकिन, कभी-कभी कुछ एनजीओ हम तक राशन भेजते हैं।'

मिजोरम में रह रहे हैं 31,000 से ज्यादा म्यांमारी शरणार्थी
इस समय मिजोरम में म्यांमार के 31,000 से ज्यादा लोग रह रहे हैं, जिन्हें राज्य सरकार राहत सामग्री उपलब्ध करवाती है। यह मुख्य तौर पर म्यांमार के चिन प्रांत के रहने वाले लोग हैं, जो फरवरी 2021 में हुए सैन्य विद्रोह के बाद वहां से भागकर भारत आ गए हैं।

मणिपुर हिंसा के बाद कुकी समुदाय के लोग भी आ गए मिजोरम
मिजोरम की 510 किलोमीटर लंबी सीमा म्यांमार से लगी हुई है। राज्य सरकार ने पहले विधानसभा में कहा था कि उसकी ओर से म्यांमार के नागरिकों को राहत देने के लिए 3.8 करोड़ से ज्यादा की रकम जारी किए हैं। लेकिन, मई में जब मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की तो 12 हजार से ज्यादा कुकी समुदाय के लोग भी मिजोरम आ गए। बाद में इनमें से कुछ वापस अपने राज्य लौट भी गए।

संभव हो तो नई सरकार से कुछ जमीन की उम्मीद करता हूं- म्यांमार शरणार्थी
पेंगा नाम के 54 वर्षीय एक म्यांमारी व्यक्ति ने उम्मीद जताई है कि जब विधानसभा चुनाव संपन्न हो जाएंगे तो नई सरकार उनकी स्थिति पर भी ध्यान देगी और उनकी सभी तरह की जरूरतें पूरा करेगी। उन्होंने कहा, 'अगर संभव हो तो, मैं नई सरकार बनने के बाद उससे पशुधन और सब्जियों की खेती के लिए कुछ जमीन की उम्मीद करता हूं.....इससे मेरे परिवार को अपने दम पर गुजारा करने में मदद मिलेगी।'

म्यांमार की स्थानीय भाषा में चाहते हैं बच्चों की शिक्षा
मिजोरम की राजधानी आइजोल से करीब 30 किलोमीटर दूर सिहमुई राहत शिविर में रह रहे लगभग सभी म्यांमारी शरणार्थियों की उम्मीद है कि उनके बच्चों की शिक्षा बहुत ही महत्वपूर्ण है और नई सरकार उस ओर भी जरूर ध्यान देगी। क्योंकि, कुछ बच्चे सरकारी स्कूलों में जाते भी हैं, तो शिक्षा का मीडियम मिजो होने की वजह से उन्हें दिक्कत होती है।

म्यामांर से भागकर आए कुछ शरणार्थियों ने अपनी भाषा का स्कूल बनाया भी, लेकिन उनकी शिकायत है कि राज्य सरकार ने अभी तक न तो उसे मान्यता दी है और न ही म्यांमारी टीचरों को सैलरी या अन्य तरह की कोई सुविधा ही दे ही है।

कपथांग के मुताबिक, 'हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे अंग्रेजी सीखें, ताकि वह रोजगार लेने लायक बनें और भविष्य में अन्य जगहों पर भी जा सकें। हम चाहते हैं कि सरकार इसपर ध्यान दे। अधिकतर सरकारी स्कूल मिजो में हैं और हम अपने बच्चों को प्राइवेट इंग्लिश मीडिया स्कूलों में नहीं भेज सकते, क्योंकि हम भारतीय नहीं हैं।' (इनपुट-पीटीआई)

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