Mizoram Election 2023: क्या मणिपुर की वजह से मिजोरम में टूट सकता है भाजपा का सपना?
मिजोरम में सरकार का हिस्सा बनना भाजपा के एजेंडे में शामिल रहा है। अगर यहां बीजेपी की सरकार बनती है तो 'सेवेन सिस्टर्स' के नाम से चर्चित पूर्वोत्तर पर पूरी तरह से पार्टी का दबदबा कायम हो सकता है। राज्य में 7 नवंबर को चुनाव होने जा रहा है।
इस साल की शुरुआत में जब मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड विधानसभा चुनावों के नतीजे आए तो भाजपा को पूर्वोत्तर में अपना सपना पूरे होने का समय बहुत ही करीब नजर आने लगा था। क्योंकि, त्रिपुरा में वह बड़ी बहुमत के साथ सत्ता पर काबिज हुई थी और मेघालय-नागालैंड में भी उसे सरकार का हिस्सा बनने का मौका मिला।

मणिपुर की हालात का मिजोरम चुनावों पर असर?
लेकिन, इसके कुछ ही महीनों बाद मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क गई। 3 मई से वहां कुकी और मैतेई समुदाय में जो अविश्वास का माहौल बना हुआ है, उससे पड़ोसी मिजोरम भी अछूता नहीं रह गया है। आज बड़ी तादाद में मणिपुर के कुकी समुदाय के लोग मिजोरम में शरणार्थी की तरह रह रहे हैं।
कुकी-मिजो में संबंध की वजह से बढ़ी भाजपा की मुश्किल
मिजोरम में बीजेपी के सपने के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी नजर आ रही है। क्योंकि, प्रदेश में भाजपा के दोनों प्रमुख विरोधी सत्ताधारी मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) और जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) मणिपुर के कुकी समुदाय के मसले को ही मुख्य चुनावी मुद्दा बनी रही हैं। इसकी वजह ये है कि मणिपुर के कुकी और मजोरम के मिजो एक ही चिन-कुकी-जो जातीय समूह से संबंधित हैं।
राज्य में भाजपा के खिलाफ दोनों ही दल मणिपुर की परिस्थितियों को चुनाव में भुनाने में लगे हुए हैं। बुधवार को भाजपा की यह परेशानी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के भाषण में भी नजर आई, जिन्होंने बताया कि मणिपुर की हिंसा किसी राजनीतिक दल ने नहीं कराई है, बल्कि यह एक असुरक्षा की भावना और दोनों समुदायों के बीच आपसी भरोसे में कमी की वजह से शुरू हुई है। वैसे उन्होंने कांग्रेस पर हालात का फायदा उठाने के लिए नकारात्मक राजनीति करने का आरोप जरूर लगाया है। रक्षा मंत्री सियाहा जिले के टिपा में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे।
पीएम मोदी की चुनावी सभा हो चुकी है रद्द
तथ्य ये भी है कि सोमवार को मिजोरम के मामित में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा होने वाली थी, लेकिन उनकी यात्रा रद्द कर दी गई। यहां से मिजोरम विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और एमएनएफ विधायक लालरिनलियाना सेलो चुनाव लड़ रहे है, जो दोनों ही पदों से इस्तीफा देकर हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं और पार्टी के टिकट पर यहां से चुनाव लड़ रहे हैं। बुधवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन इस सीट पर भी प्रचार किया।
एमएनएफ वैसे तो केंद्र में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए का हिस्सा है, लेकिन राज्य में दोनों अलग हैं और विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रही हैं। मानित की सभा में राजनाथ सिंह ने कहा, 'क्या मिजोरम के लोगों के विकास के लिए एमएनएफ ने कुछ किया है?'
मणिपुर से 12,000 कुकी मिजोरम आ गए थे
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मणिपुर में इस साल मई में जातीय हिंसा भड़कने के बाद 12,000 से ज्यादा कुकी समुदाय के लोग अपना घर छोड़कर भागे और मिजोरम में शरण लिया। तब से यहां उन्हें मिजोरम सरकार का समर्थन मिला है। हालांकि, बाद में इनमें से कुछ लोग वापस मणिपुर लौट गए।
बहरहाल, पूर्वोत्तर के अन्य बीजेपी शासित राज्यों के नेता लगातार मिजोरम में कैंप कर रहे हैं और पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन्हीं में नागालैंड के मंत्री और भाजपा के लोकप्रिय नेता तेमजेन इमना अलोंग भी शामिल हैं।
उन्होंने मिजोरम चुनाव में बीजेपी की मौजूदा स्थिति को लेकर कहा है, 'चुनावों में भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। प्रचार की अगुवाई हमारे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, नागालैंड के डिप्टी सीएम यानथुंगो पैटन और रितुराज सिन्हा (पार्टी के राष्ट्रीय सचिव) कर रहे हैं.....वे सभी....आस-पड़ोस, खासकर त्रिपुरा के हमारे दोस्तों के साथ मिलकर जमीन पर बहुत ज्यादा मेहनत कर रहे हैं......इसलिए, मैं समझता हूं कि हमारा प्रदर्शन पहले अच्छा रहेगा......'












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