उन्नाव रेप पीड़िता की क्या है स्थिति, KGMU अस्पताल ने जारी किया मेडिकल बुलेटिन

नई दिल्ली। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल उन्नाव रेप पीड़िता का इलाज पिछले 8 दिनों से लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) अस्पताल में चल रहा है। जहां पीड़िता की हालत गंभीर लेकिन स्थिर बनी हुई है। सोमवार को केजीएमयू अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में इस बात का जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया कि 28 जुलाई से अस्पताल में भर्ती महिला मरीज के स्वास्थ्य में कुछ सुधार देखने को मिल रहा है।

दोनों मरीजों की हालत गंभीर लेकिन स्थिर: KGMU

दोनों मरीजों की हालत गंभीर लेकिन स्थिर: KGMU

लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी अस्पताल की ओर से जारी उन्नाव रेप पीड़िता और उनके वकील के मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि दोनों मरीजों की हालत गंभीर लेकिन स्थिर बनी हुई है। महिला मरीज के स्वास्थ्य में पहले से थोड़ा सुधार हुआ है। पीड़िता के वकील बिना वेंटिलेटर सपोर्ट के सांस ले रहे हैं और गहरे कोमा में हैं। अस्पताल ने बताया कि दोनों मरीजों का इलाज एक्सपर्ट चिकित्सकों की टीम के द्वारा निःशुल्क किया जा रहा है। केजीएमयू अस्पताल की ओर से लगातार पीड़िता और उनके वकील की स्थिति को लेकर मेडिकल बुलेटिन जारी किया गया।

'महिला मरीज के स्वास्थ्य में पहले से थोड़ा सुधार'

'महिला मरीज के स्वास्थ्य में पहले से थोड़ा सुधार'

बता दें कि पीड़िता का एक्सीडेंट 28 जुलाई को उस समय हुआ जब वो रायबरेली जेल में बंद अपने चाचा से मुलाकात के लिए गई थीं। इसी दौरान पीड़िता की कार का एक्सिडेंट हुआ, जिसमें पीड़िता के परिवार की दो महिलाओं की मौत हो गई। वहीं पीड़िता और वकील को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक्सिडेंट के आरोप विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर है, जो गैंगरेप के आरोप में जेल में बंद हैं।

28 जुलाई को हुआ उन्नाव रेप पीड़िता का एक्सिडेंट

28 जुलाई को हुआ उन्नाव रेप पीड़िता का एक्सिडेंट

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव की रेप पीड़िता को दिल्ली के एम्स में शिफ्ट करने के आदेश दिए हैं। सड़क हादसे में बुरी तरह से जख्मी लड़की का लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल अस्पताल में बीते आठ दिन से इलाज चल रहा है। पीड़िता की हालत में बहुत सुधार नहीं है और अभी भी वो वेंटिलेटर पर है। इस पूरे मामले को सुप्रीम कोर्ट देख रहा है। बीते हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई उत्तर प्रदेश से दिल्ली शिफ़्ट किए जाने और सुनवाई 45 दिनों में पूरा करने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़िता को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने को भी कहा है।

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