धारा-370: जिस रास्ते आखिरी बार गुजरे मुखर्जी, वह सबसे लंबी सुरंग होगी उन्हीं के नाम!

नई दिल्ली- करीब दो साल पहले प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर में देश की सबसे लंबी सुरंग का उद्घाटन किया था। अब चर्चा है कि केंद्र सरकार इस अत्याधुनिक सुरंग का नाम जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने की तैयारी कर रही है। इस तरह की मांग तभी से उठ रही थी, जब पीएम मोदी ने जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर बनी चेनानी-नाशरी सुरंग का उद्घाटन किया था। लेकिन, तब वहां के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए मोदी सरकार के लिए संभत: ऐसा करना संभव नहीं हो सका था।

मोदी सरकार कर रही है विचार

मोदी सरकार कर रही है विचार

जानकारी के मुताबिक 9.2 किलोमीटर लंबी चेनानी-नाशरी सुरंग को जनसंघ संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखने का सुझाव केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर से आया है। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से यह सिफारिश की है। खबरें हैं कि गडकरी भी इस प्रस्ताव से पूरी तरह सहमत हैं और इसपर जल्द ही फैसला लिया जा सकता है। देश की सबसे लंबी यह सुरंग सभी मौसम में काम करने के हिसाब से बनाया गया है। इसका लोकार्पण पीएम मोदी ने दो अप्रैल, 2017 को किया था। खास बात ये है कि यह सुरंग जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में है, जो खुद जितेंद्र सिंह के संसदीय क्षेत्र में भी है।

2017 में ही हुई थी चर्चा

2017 में ही हुई थी चर्चा

कहा जा रहा है कि डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने 2017 में ही यह प्रस्ताव दिया था कि सुरंग मुखर्जी के नाम पर ही होना चाहिए। लेकिन, तब महबूबा मुफ्ती की अगुवाई वाली सरकार के विरोध के चलते यह मुमकिन नहीं हो पाया था। लेकिन, अब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक और संवैधानिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं और वहां राष्ट्रपति शासन होने के चलते केंद्र सरकार को इसमें किसी भी तरह की दिक्कत होने की उम्मीद नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारियों कहा कहना है कि वैसे तो नेशनल हाइवे के किसी हिस्से को कोई नाम देने की व्यवस्था तो नहीं है, लेकिन कुछ अपवाद जरूर हैं। इससे पहले असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर तिनसुकिया जिले में बने सबसे लंबे पुल धोला-सादिया का नाम भी रखा गया था। 9.3 किलोमीटर लंबे उस पुल का नाम भूपेन हजारिक सेतु रखा गया है और उसे भी मोदी ने अपने पहले कार्यकाल की तीसरी वर्षगांठ पर 26 मई, 2017 को लोकार्पित किया था।

अंतिम बार इसी रास्ते गुजरे थे मुखर्जी

अंतिम बार इसी रास्ते गुजरे थे मुखर्जी

अगर केंद्र सरकार ने चेनानी-नाशरी सुरंग का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर कर दिया तो इसे उन्हें बीजेपी की ओर से दूसरी बड़ी श्रद्धांजलि के तौर पर पेश किया जा सकता है। गौरतलब है कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का निधन श्रीनगर के जेल में ही हो गया था, जब उन्हें आर्टिकल 370 का विरोध करने के चलते गिरफ्तार किया गया था। वे जम्मू-कश्मीर में 'एक विधान-एक प्रधान-एक निशान' की मांग करने वाले बीजेपी की विचारधारा के अगुवा थे। टीओआई से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि 'एसपी मुखर्जी को यह सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि होगी, क्योंकि उन्हें उधमपुर-कठुया से गिरफ्तार किया गया था और उसी रास्ते से श्रीनगर ले जाया गया था, जहां पर सुरंग बनाई गई है; और यह यात्रा उनकी आखिरी यात्रा बन गई थी।' गौरतलब है कि मुखर्जी का निधन 23 जून, 1953 को हिरासत में रहते हुए ही हो गई थी। इससे पहले इसी महीने मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाकर उन्हें पहली श्रद्धांजलि दे चुकी है।

जम्मू-कश्मीर में राजनेता के नाम पर होगी यह दूसरी सुरंग

जम्मू-कश्मीर में राजनेता के नाम पर होगी यह दूसरी सुरंग

बेहद अत्याधुनिक माने जाने वाले इस सुरंग की खासियत यह है कि इसे हर मौसम में बिना बंद हुए चालू रहने के हिसाब से तैयार किया गया है। इस सुरंग के कारण चेनानी और नाशरी के बीच की यात्रा में लगने वाला समय कम से कम दो घंटे कम हो गया है। क्योंकि, ऊंचे बर्फीले रास्तों से गाड़ियों को पहले जो 41 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता था, वह दूरी अब घटकर सिर्फ 9.2 किलोमीटर की रह गई है। यह भारी बर्फबारी में खुला रहने में सक्षम है। जम्मू-कश्मीर में यह सुरंग दूसरी है, जिसे किसी राजनेता के नाम पर रखने पर विचार चल रहा है। इससे पहले बनिहाल सुरंग या बनिहाल दर्रे को जवाहर टनल का नाम दिया गया था। 22 दिसंबर, 1956 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 2.85 किलोमीटर लंबी बनिहार सुरंग का नाम पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नाम पर रखा था।

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