'हमारी मस्जिद चली गई, क्या कर सकते थे? हम केवल...', समान नागरिक संहिता पर बोले मौलाना अरशद मदनी
Uniform Civil Code: भारत की सबसे बड़ी मुस्लिम संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) के बारे में बात की। एनडीटीवी को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता के बारे में मुसलमान अपनी राय रखेंगे। लेकिन उनकी बात सुने जाने की उम्मीद कम है।
मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि जब प्रधानमंत्री ने खुले तौर पर कहा है कि मुसलमानों के धार्मिक अधिकार छीन लिए जाएंगे, तो कोई क्या कर सकता है। मौलाना मदनी ऑल-इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के भी सदस्य हैं, जिन्होंने पीएम मोदी के समान नागरिक संहिता पर जोर देने के बाद कल रात एक आपातकालीन बैठक की।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन घंटे तक बैठक की। बैठक में बोर्ड ने अपने विचार विधि आयोग को सौंपने का फैसला किया है। लेकिन मौलाना मदनी ने साफ कर दिया कि उन्हें ज्यादा उम्मीद नहीं है कि उनकी बातें सुनी जाएंगी।
हम जानते हैं कि विधि आयोग जो भी निर्णय लेगा, हम जो कहते हैं उस पर आधारित नहीं होगा। चाहे हम कितने भी हजारों प्रतिनिधिमंडल या अनुरोध क्यों न भेजें। अब जब प्रधानमंत्री इसका समर्थन कर रहे हैं, तो विधि आयोग से हमारे विचारों को ध्यान में रखने की उम्मीद करना बहुत कम है।
यह पूछे जाने पर कि मुस्लिम समुदाय कैसे प्रतिक्रिया दे सकता है, तो उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में मुसलमान क्या कर सकते हैं। कोई भी क्या कर सकता है? मैंने मुसलमानों से सड़कों पर नहीं उतरने के लिए कहा है। वे सम्मानजनक तरीके से अपनी बात रख सकते हैं।
उन्होंने 1992 में कार सेवकों द्वारा गिराई गई अयोध्या की बाबरी मस्जिद का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी मस्जिद चली गई है, हम क्या कर सकते हैं? हम केवल अपने दैनिक जीवन में आस्था को जीवित रख सकते हैं।
बता दें कि पीएम मोदी ने मंगलवार को कहा कि कोई भी देश दो कानूनों पर नहीं चल सकता है। एक ही परिवार में अलग-अलग सदस्यों के लिए अलग-अलग नियम नहीं हो सकते हैं।
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