मराठा आरक्षण पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, महाराष्ट्र सरकार को भेजा नोटिस
नई दिल्ली। मराठा आरक्षण मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान मराठा आरक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षण संस्थान और सरकारी नौकरियों में प्रवेश के लिए मराठा के आरक्षण को खत्म करने की अपील पर सुनवाई होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भेजकर दो हफ्ते में जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी। याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मराठा आरक्षण रेस्ट्रोस्पेक्टिव प्रभाव से लागू नहीं होगा। दरअसल, एक एनजीओ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी कि अदालत ने आरक्षण को लेकर 50% की सीमा तय की थी। ऐसे में हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ है।
इसके पहले, बॉम्बे हाईकोर्ट में में एक याचिका दायर करके राज्य में मराठाओं को 16 प्रतिशत के प्रावधान की संवैधानिकता को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने इसपर फैसला सुनाते हुए आरक्षण को वैध बताया लेकिन इसकी सीमा घटा दी थी। अदालत ने 16 की जगह ने शिक्षण संस्थानों में 13 और सरकारी नौकरियों में 12 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के निर्देश दिए थे।
पहले 16 फीसदी आरक्षण था, हाईकोर्ट के आदेश पर संशोधन बिल पारित हुआ
मराठा समुदाय को 16 फीसदी आरक्षण देने का बिल बीते साल नवंबर महीने में पास किया गया था। राज्य के दोनों सदनों ने मराठा आरक्षण का बिल सर्वसम्मति से पास किया गया था। इसमें शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में मराठा समुदाय के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण तय किए जाने की बात कही गई थी। मराठा समुदाय को ये आरक्षण स्टेड बैकवर्ड क्लासेज कमीशन के तहत दिए जाने का प्रावधान था। महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में मराठा समुदाय ने आरक्षण की मांग को लेकर कई आंदोलन किए गए थे।












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