माओवादियों और इस्लामी कट्टरपंथियों पर हल्ला बोलने की तैयारी
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। राजधानी के नार्थ ब्लाक में इन दिनों गृह मंत्री राजनाथ सिंह और नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजित डोभल लगातार खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों के शिखर अफसरों के साथ मिलकर उस रणनीति को बनाने में जुटे हैं, जिससे कि माओवादी आतंकी और इस्लामिक कट्टरवादी संगठनों को धूल में मिलाया जा सके। बताते चलें कि नार्थ ब्लाक से ही चलता है देश का गृह मंत्रालय।

सरकार मानती है कि जेहादी मानसिकता वाले संगठनों और माओवादी संगठनों को खत्म किए बगैर उऩ्हें चैन की सांस नहीं लेनी। इस पूरी तैयारी में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के लंबे अनुभव का लाभ लिया जा रहा है।
पीएम मोदी की सलाह
वन इंडिया ने कुछ दिन पहले खबर दी थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को सलाह दी है कि वे आतंरिक सुरक्षा के मसलों पर डोभाल के अनुभव का लाभ उठाएँ। ताजा बैठकों के दौर इसी क्रम का हिस्सा है।
गृह मंत्रालय मानता है कि माओवादी आंतकवाद से देश को उतना ही बड़ा खतरा है, जितना बड़ा खतरा इस्लामिक जेहादी संगठनों से है। इसलिए इस पर काबू पाने के लिए देश के किसी भी सुरक्षा बलों की मदद ली जाएगी। इन्हें खत्म करने के लिए सरकार किसी भी तरह का स्पेस देने के लिए तैयार नहीं है।
बाहरी निवेश के लिये जरूरी है यह कदम
जानकारों का कहना है कि केन्द्र सरकार मानती है कि देश में बाहरी निवेश भी उसी सूरत में आएगा जबकि देश में अमन का माहौल होगा। सरकार विदेशी निवेश लाने की भी इन दिनों कसकर कोशिश कर रही है।
इसके साथ ही सरकार देश के नौजवानों को जेहादी आतंकवादी संगठनों से बचाने के लिए भी रणनीति बना रही है। उसे मालूम है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के फलस्वरूप देश के बहुत से युवा अल कायदा और आईएसआईएस से प्रभावित हो रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि देश में इंडियन मुजाहिदिन और सिमी जैसे नफरत फैलाने वाले संगठनों पर भी पैनी नजर ऱखने की जरूरत है,जो बहुत से नौजवानों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं।












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