Manipur Violence: 6 नागा नागरिकों की मौत के बाद सुलगा मणिपुर, JNIMS के बाहर आंसू गैस, क्या है नए तनाव की वजह?
Manipur violence: पूर्वोत्तर के अशांत राज्य मणिपुर में शांति बहाली की तमाम कोशिशों और दावों के बीच एक बार फिर खूनी संघर्ष तेज हो गया है। पिछले कई दिनों से लापता बताए जा रहे 6 नागा नागरिकों की 11 जून को तड़के सुबह 5 बजे शव बरामाद किए हुए।
इस निर्मम हत्या ने राज्य में पहले से ही सुलग रही जातीय हिंसा की आग में घी डालने का काम किया है। शव मिलने के बाद इंफाल ईस्ट स्थित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (JNIMS) के बाहर भारी संख्या में लोग जमा हो गए।

हालात बिगड़ते देख सुरक्षा बलों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। ये लोग उन छह नागा व्यक्तियों के शव लेने के लिए इकट्ठा हुए थे, जिन्हें 13 मई 2026 को लेइलोन वैफेई गांव से कथित तौर पर अगवा किया गया था।
Kangpokpi Naga को लेकर ताजा मामला क्या है? 24 घंटे का महा-ऑपरेशन और 'UNC' का बंद
मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) मुकेश सिंह ने बताया कि कांगपोकपी जिले में सुरक्षा बलों ने एक बड़े सर्च ऑपरेशन के बाद बुधवार (10 जून 2026) को छह लोगों के शव बरामद किए। इस अभियान में मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स और सीआरपीएफ (CRPF) की लगभग 15 टीमों ने लगातार 24 घंटे तक जंगलों और पहाड़ी इलाकों में सघन चेकिंग चलाई थी।
ये शव उन्हीं नागा समुदाय के लोगों के हैं, जिनका 13 मई को कथित तौर पर कुकी हथियारबंद गुटों ने लीलोन वैफेई गांव से अपहरण कर लिया था। शव मिलने के बाद नागाओं के शीर्ष निकाय 'यूनाइटेड नागा काउंसिल' (UNC) ने नागा बहुल इलाकों में 24 घंटे के पूर्ण बंद (Bandh) का एलान कर दिया है। नागा संगठनों का दावा है कि बरामद किए गए शव बेहद क्षत-विक्षत हालत में हैं, जिसके कारण लियांगमाई नागा काउंसिल के अध्यक्ष टिमोथी सहित पूरे समुदाय में भारी आक्रोश है। उन्होंने मांगें पूरी होने तक शवों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
डिप्टी CM नेमचा किपगेन को हटाने की मांग क्यों?
यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने इस नरसंहार के बाद मणिपुर की डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन को उनके पद से तत्काल बर्खास्त करने की कड़ी मांग की है। इसके पीछे संगठन ने सीधे तौर पर हितों के टकराव और मिलीभगत का आरोप लगाया है। UNC का आरोप है कि डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन 'कुकी नेशनल फ्रंट-पी' (KNF-P) के अध्यक्ष सेमटिनथांग किपगेन की पत्नी हैं।
KNF-P सरकार के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (SOO) समझौते में शामिल एक प्रमुख कुकी उग्रवादी गुट है। नागा संगठनों को गहरा संदेह है कि नागा नागरिकों के इस अपहरण और हत्या के पीछे इसी गुट का हाथ है। इसके साथ ही विपक्ष और नागा संगठनों ने सरकार से कुकी विद्रोही गुटों के साथ किए गए 'SOO समझौते' को तुरंत रद्द करने की मांग की है।
आखिर 13 मई 2026 को क्या हुआ था?
यह पूरी कड़वाहट 13 मई को कांगपोकपी में घात लगाकर किए गए एक हमले से शुरू हुई, जिसमें थाडौ जनजाति के तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी। इसी घटना के प्रतिशोध में दो पादरियों समेत 6 नागा लोगों और उनके परिजनों का अपहरण कर लिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा गुटों द्वारा कुल 44 नागरिकों को बंधक बनाया गया था, जिसमें से महिलाओं और बच्चों सहित कई लोगों को किश्तों में रिहा किया गया, लेकिन इन 6 नागा नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया गया।
क्यों सुलग रहा है मणिपुर? समझिए भूगोल और आबादी का जटिल गणित
मणिपुर में जारी यह हिंसा कोई अचानक भड़की घटना नहीं है, बल्कि यह दशकों पुराने जातीय अविश्वास, भौगोलिक विभाजन और संसाधनों पर कब्जे की लड़ाई का नतीजा है। मई 2023 में भड़की बड़े पैमाने की हिंसा का दौर साल 2026 में भी रुक-रुक कर जारी है। इस अशांति को समझने के लिए यहां के भूगोल को समझना जरूरी है:
| क्षेत्र | कुल क्षेत्रफल का % | आबादी का % | मुख्य समुदाय | मुख्य धर्म |
|---|---|---|---|---|
| इम्फाल घाटी (समतल हिस्सा) | लगभग 10% | लगभग 60% | मैतेई (Meitei) | मुख्य रूप से हिंदू |
| पहाड़ी इलाका (चारों तरफ के पहाड़) | लगभग 90% | लगभग 40% | कुकी (Kuki) और नागा (Naga) | मुख्य रूप से ईसाई |
इस संघर्ष में भूगोल केवल एक भौतिक तथ्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का केंद्र है। राज्य के कुल क्षेत्रफल का मात्र 10% हिस्सा यानी 'इम्फाल घाटी' में राज्य की साठ फीसदी आबादी रहती है। यह क्षेत्र कृषि और आर्थिक गतिविधियों का मुख्य केंद्र है। मैतेई समुदाय, जो मुख्य रूप से इसी घाटी में केंद्रित है, लंबे समय से राज्य की राजनीति और प्रशासन में प्रभावी रहा है।
दूसरी ओर, राज्य का 90% क्षेत्रफल पहाड़ी है, जहां कुकी और नागा समुदाय के लोग सदियों से रहते आए हैं। यह इलाका राज्य के कुल क्षेत्रफल का बड़ा हिस्सा है, लेकिन आर्थिक विकास की दृष्टि से यहां चुनौतियां अधिक हैं। संविधान और राज्य के मौजूदा कानूनों के तहत, घाटी के निवासियों का पहाड़ी इलाकों में जमीन खरीदने पर प्रतिबंध है, जबकि पहाड़ी समुदाय के लोग घाटी में आकर बस सकते हैं। यही वह मुख्य बिंदु है जिसने 'अधिकारों की समानता' और 'सुरक्षा' के नाम पर दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई को चौड़ा कर दिया है।
कौन सा इलाका उग्रवाद से कितना प्रभावित?
चुराचांदपुर जिला (कुकी बाहुल्य): यह जिला मणिपुर में उग्रवाद का सबसे बड़ा केंद्र रहा है, जहां कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (KNO), कुकी रिवोल्यूशनरी आर्मी (KRA), जोमी रिवोल्यूशनरी आर्मी (ZRA) और कुकी नेशनल फ्रंट (KNF) जैसे 20 से अधिक गुट सक्रिय हैं, जिनकी मांग कभी स्वतंत्र 'कुकीलैंड' की थी, जो अब अलग राज्य की मांग में बदल चुकी है।
उखरुल और सेनापति जिला (नागा बाहुल्य): इन जिलों में सबसे बड़े और शक्तिशाली नागा संगठन NSCN-IM का दबदबा है। यह संगठन ग्रेटर नागालैंड (नागालिम) की मांग को लेकर भारत सरकार के साथ 1997 से संघर्ष विराम (Ceasefire) समझौते के तहत शांति वार्ता कर रहा है।
नागा नागरिकों की हत्या ने अब इस संकट को 'मैतेई बनाम कुकी' से आगे बढ़ाकर 'नागा बनाम कुकी' के एक और खतरनाक त्रिकोणीय संघर्ष में बदलने का जोखिम पैदा कर दिया है।














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