Manipur में बफर जोन बने नए तनाव का केंद्र! मासूमों की मौत के बाद इंफाल में सड़कों पर मैतेई महिलाएं, ताजा अपडेट
Manipur Violence Update: मणिपुर, जो पिछले कुछ महीनों से शांति की ओर कदम बढ़ाता दिख रहा था, एक बार फिर जातीय संघर्ष और अविश्वास के भीषण दौर में पहुंच गया है।
बिष्णुपुर जिले के त्रोंग्लाओबी (Tronglaobi) में हुए रॉकेट हमले में मैतेई समुदाय के दो मासूम बच्चों की मौत के बाद घाटी के जिलों में तनाव चरम पर है।

इंफाल ईस्ट से लेकर वेस्ट तक महिलाओं के पारंपरिक समूह 'मीरा पाइबी' ने इंसाफ की मांग को लेकर मशाल रैली निकाली, जिसने राज्य में बढ़ते जनाक्रोश को साफ तौर पर पूरे देश के सामने ला दिया। हालिया हमलों और दो मासूम बच्चों की मौत के बाद राज्य में माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।
Tronglaobi में दो मासूमों की मौत हिंसा का केंद्र, सवाल एक ही- 'बफर जोन' कैसे बने 'डेथ जोन'?
घटना 7 अप्रैल की है, जब त्रोंग्लाओबी गांव में ओनाम बिनिता अपने दो बच्चों-5 वर्षीय तोमथिन और 5 महीने की लेइसाना के साथ सो रही थीं। अचानक एक प्रोजेक्टाइल उनके घर पर आ गिरा। इस धमाके में दोनों मासूमों की जान चली गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं।
बता दें कि, मणिपुर में बनाए गए 'बफर जोन', जो मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच टकराव को रोकने के लिए बनाए गए थे, अब खुद असुरक्षा के केंद्र बनते जा रहे हैं। त्रोंग्लाओबी गांव सुरक्षा बलों द्वारा बनाए गए उसी 'बफर जोन' से महज एक किलोमीटर की दूरी पर है। सवाल यह उठता है कि भारी सुरक्षा घेरे और केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बावजूद, उग्रवादी 100 मीटर की दूरी से रॉकेट दागने में कैसे कामयाब रहे?
Imphal Protest: इंफाल घाटी में सड़कों पर उतरी 'मीरा पाइबी' , सुरक्षा बलों से भिड़े प्रदर्शनकारी
ANI की रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना के बाद इंफाल वेस्ट में रविवार, 19 अप्रैल की देर रात सगोलबंद सगोलबंद में मशाल जुलूस निकाल रही 'मीरा पाइबी' और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जहां आंसू गैस के गोले छोड़ने से माहौल और तनावपूर्ण हो गया।
#WATCH | Kakching, Manipur | Security personnel used tear gas to disperse the protestors seeking justice for the Tronglaobi incident after the situation turned tense in Kakching Bazar.
Two children were killed, and their mother was injured when a bomb was hurled by suspected… pic.twitter.com/7a2Sb48X8Z
— ANI (@ANI) April 20, 2026
स्थिति और गंभीर तब हो गई जब 18 अप्रैल को नेशनल हाईवे-202 पर एक पूर्व सैनिक समेत दो लोगों की घात लगाकर हत्या कर दी गई। इस हमले की जिम्मेदारी कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों पर डाली जा रही है। तंगखुल नागा लॉन्ग (TNL) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि इसका जवाब दिया जाएगा। संगठन ने इसे निर्दोष नागरिकों पर क्रूर हमला बताया।
पांच दिन के शटडाउन से जनजीवन ठप
ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिविल सोसायटी संगठनों और जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) के आह्वान पर 19 अप्रैल से शुरू हुआ पांच दिन का शटडाउन घाटी के जिलों में पूरी तरह असर डाल रहा है। बाजार, स्कूल, परिवहन और सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हैं। यह बंद 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंग्लाओबी गांव में हुए हमले के विरोध में बुलाया गया है, जिसमें दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी और उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई थीं।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें और अल्टीमेटम
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि 25 अप्रैल तक इस हमले में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों और जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन तेज होगा:
- 25 अप्रैल तक सभी दोषियों की गिरफ्तारी।
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 8वीं बटालियन और J&K लाइट इन्फैंट्री की कथित लापरवाही की न्यायिक जांच।
- बफर जोन और संवेदनशील इलाकों से केंद्रीय बलों को हटाकर राज्य बलों की तैनाती।
नई सरकार की अपील और आश्वासन
राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने प्रेस कॉफ्रेंस में प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और बंद वापस लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पीड़ित परिवार और JAC के साथ तीन दौर की बातचीत की है, जिसमें अधिकांश मांगों पर सहमति बन चुकी है।
सरकार ने दो महीने के भीतर सैन्य कार्रवाई तेज करने, ट्रोंग्लाओबी और पी गेलमोल जैसे इलाकों में केंद्रीय बलों की जगह राज्य पुलिस तैनात करने और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती का आश्वासन दिया है। साथ ही पीड़ित परिवार को नौकरी देने की भी घोषणा की गई है। सरकार ने बताया कि यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी (UKNA) से जुड़े पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, हालांकि संगठन ने हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। जांच अभी जारी है।
जातीय हिंसा में सुलग रहे मणिपुर में 7000 जवानों की कमी, बढ़ रहा है सुरक्षा संकट?
गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने स्वीकार किया है कि राज्य में 34,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद कानून-व्यवस्था को प्रभावी ढंग से बनाए रखने के लिए अभी भी करीब 7,000 अतिरिक्त जवानों की जरूरत है। उन्होंने बताया कि चुनाव ड्यूटी के कारण 103 CAPF कंपनियों को वापस बुला लिया गया था, हालांकि राज्य के अनुरोध पर 184 कंपनियां अब भी मणिपुर में तैनात रहेंगी।
करीब तीन साल से जारी इस जातीय संघर्ष में अब तक 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 60,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। कुछ समय के लिए हालात सामान्य होते नजर आए थे, लेकिन हालिया घटनाओं ने एक बार फिर राज्य को हिंसा की ओर धकेल दिया है। बफर जोन में रहने वाले लोग अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और कई जगहों पर स्थानीय हथियारबंद स्वयंसेवकों की तैनाती की मांग फिर से उठने लगी है।
नई सरकार के सामने शांति की सबसे बड़ी परीक्षा
मणिपुर तीन साल से जातीय संघर्ष की आग में जल रहा है। फरवरी 2026 में नई सरकार बनने के बाद उम्मीद थी कि स्थिति सुधरेगी लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी सुना रही है। 'बफर जोन' जिन्हें दो समुदायों के बीच शांति की दीवार बनना था, अब डर और हमलों के नए पते बनते जा रहे हैं। सरकार कह रही है कि हालात काबू में हैं, मगर सड़कों पर उतरती भीड़, जलते वाहन और मासूमों की मौत इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं।












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