Manipur में अफीम की खेती पर लगेगा ब्रेक? क्या है NCB का ‘Hin-Chi' प्रोजेक्ट जिससे बदली किसानों की जिंदगी

Project Hin-Chi Manipur: मणिपुर पिछले तीन सालों से भीषण जातीय हिंसा और अस्थिरता की आग में झुलस रहा है। इस तनावपूर्ण माहौल और अविश्वास के बीच, चूराचांदपुर जिला पुलिस ने सामाजिक सुधार और शांति की दिशा में एक ऐसी उम्मीद जगाई है, जिसकी चर्चा पूरे राज्य में हो रही है।

चुराचांदपुर जिला पुलिस ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के साथ मिलकर 'Hin-Chi' नामक सामुदायिक अभियान की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य अवैध पोस्ता (पॉपी) खेती पर रोक लगाना और किसानों को वैध नकदी फसलों की ओर प्रेरित करना है।

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यह पहल जिले के तीन संवेदनशील क्षेत्रों में शुरू की गई है, जहां अवैध पोस्ता खेती लंबे समय से चिंता का विषय रही है। पुलिस के अनुसार, इन क्षेत्रों के गांव प्रमुखों और 127 चयनित परिवारों को विश्वास में लेकर उन्हें अवैध खेती छोड़कर वैध आजीविका अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है।

What Is Project Hin-Chi: क्या है 'हिन-ची' प्रोजेक्ट: जीवन के बीज और नई शुरुआत

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय भाषा में 'हिन-ची' का अर्थ है 'जीवन के बीज'। यह प्रोजेक्ट केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक 'कम्युनिटी-सेंट्रिक' मॉडल है जो जोखिम को लचीलेपन (Risk to Resilience) में बदलने की क्षमता रखता है। इस अभियान के तहत किसानों को नई फसलों की ओर शिफ्ट करने के लिए ठोस मदद भी दी जा रही है।

पुलिस ने तीन सबसे संवेदनशील क्षेत्रों के ग्राम प्रधानों और 127 लाभार्थी परिवारों को विश्वास में लिया है। इन परिवारों को अवैध और जोखिम भरी खेती छोड़कर कानूनी और सुरक्षित आजीविका अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है। चेन्नई की टेक्नोलॉजी कंपनी Segula Technologies ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत 28 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है।

इस फंड की मदद से प्रशासन ने लाभार्थियों के बीच लगभग-55,000 किलोग्राम अदरक के बीज, 450 किलोग्राम मटर के बीज, और 6,500 केले के पौधे वितरित किए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों की ओर ले जाना है, जो कानूनी होने के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी लाभकारी हों।

NCB और NGO की निगरानी और बाजार से जोड़ने की योजना

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पहल केवल बीज वितरण तक सीमित नहीं रहेगी। आगे जिला पुलिस, NCB और स्थानीय NGO NARPS की संयुक्त टीमें नियमित निगरानी करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसान वास्तव में वैकल्पिक खेती अपना रहे हैं। साथ ही, किसानों को पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट और मार्केट लिंकिंग में भी मदद दी जाएगी, ताकि उनकी फसल को सही कीमत मिल सके और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

हिंसा के बीच उम्मीद की किरण

मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से जारी जातीय संघर्ष में 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। ऐसे माहौल में 'Hin-Chi' जैसी पहल न सिर्फ कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम है, बल्कि समाज में विश्वास बहाली और स्थिरता लाने की कोशिश भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की योजनाएं जमीनी स्तर पर सफल होती हैं, तो यह न केवल अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाएंगी, बल्कि हिंसा से प्रभावित इलाकों में रोजगार, शांति और स्थिरता की नई राह भी खोल सकती हैं।

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