जिस मणिपुर में इंसानियत हुई शर्मसार, वहीं है 'मदर्स मार्केट' का राज, जानिए यहां की साहसी महिलाओं के किस्‍से

मणिपुर हिंसा के बीच दो कुकी समुदाय की महिलाओं को नग्न घुमाने की घटना ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है। नार्थ ईस्‍ट का मणिपुर राज्‍य लंबे समय से हिंसा के कारण अशांत है, यहां पर खून खराबे के बीच अब तक कईयों को मौत के घाट उतारा जा चुका है वहीं अब दो महिलाओं को निर्वस्‍त्र कर घुमाए जाने के वीडियो की घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है।

manipur

बता दें मणिपुर का जो वीडियो सामने आया है उसमें दो जनजातीय महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड करवाया गया इसके बाद उनसे छेड़छाड़ की गई। ये वीडियो मणिपुर में रह रही महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं इसकी दास्‍तां बयां कर रहा है।इस घटना से साफ हो चुका है कि मणिपुर हिंसा के बीच सबसे अधिक महिलाएं असुक्षित हैं!

ज‍बकि मणिपुर वो प्रदेश है जहां पर पुरुषों को पछाड़ते हुए महिलाओं ने हर फ्रंट पर मोर्चा संभाल रखा है। महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा यहां अधिक सशक्‍त हैं और वो ही इस हिंसा में हथियार की तरह प्रयोग की जा रही है।

मणिपुर में हर क्षेत्र में महिलाओं ने संभाला है मोर्चा

मणिपुर की महिलाओं की आबादी पुरुषों के लगभग बराबर हैं। यहां की महिलाएं हर क्षेत्र में आगे है। सामाजिक आर्थिक और सांस्‍कृतिक सभी क्षेत्रों में यहां महिलाओं का ही बोलबाला है। यहां की महिलाएं रह क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर अहम रोल निभा रही हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी सब्जी बाजार "मदर्स मार्केट" की कमान संभाली है

मणिपुर के इंफाल की इमा कीथेल बाजार जिसका नाम ही मदर्स मार्केट हैं, यहां पर केवल महिलाएं ही नजर आती हैं। छोटी उम्र से लेकर वृद्ध महिलाएं सब्जी, फल बेचती नजर आती है। दुनिया की सबसे बड़ी मानी जाने वाली इस मदर्स मार्केट का पूरा जिम्‍मा यहां की महिलाओं ने अपने कंधे पर उठा रखा है। ये मार्केट है जो दुनिया भर के पर्यटकों को मणिपुर आने के लिए आकर्षित करता है। इस तरह पर्यटन क्षेत्र में भी अधिकांश महिलाएं ही सक्रिय हैं।

मणिपुर के आंदोलनों में भी महिलाओं ने संभाला मोर्चा

मणिपुर में वर्तमान समय में हो रही हिंसा की बात की जाए या देश की आजादी के पहले 1904 में किया गया मणिपुर का पहला नुपी लान आंदोलन सबमें यहां की महिलाओं ने मोर्चा संभाला और अपने राज्‍य के लिए लड़ाई लड़ी है।

1904 का नुपी लान आंदोलन

बिट्रिश सरकार ने पुरुषों के लिए 30 दिन के काम में 10 दिन मुफ्त मजदूरी करने का नियम बनाया था। जिसके बाद महिलाओं ने पुरुषों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी थी इतना ही नहीं अंग्रेजों अफसरों के दफ्तरों के आगे प्रदर्शन कर उनकी नींद हराम कर दी थी।

1907 का आंदोलन

मणिपुर से चावल बाहर निर्यात किए जाने पर महिलाओं ने आंदोलन किया था जिसमें मणिपुर के राजा के आदेश के खिलाफ 4 हजार महिलाओं साथ शाही दरबार के बाहर खड़ी हो गई थीं, मजबूर होकर

1970 का आंदोलन

मीरा पैबिस यानी मशाल वाली महिलाओं के नाम से ये फेमस हुईं थी। जब यहां की महिलाओं ने अवैध शराब, नशीली दवाओं और सशस्‍त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम प्रदेश में लागू करने की खिलाफत करते हुए आंदोलन किया था।

2004 का आंदोलन

वर्ष 2004 में मनोरमा थांगजाम की विभत्‍स हत्‍या के विरोध में जिसके साथ कथित तौर पर हिरासत के दौरान रेप किया गया था तब असम राइफल्‍स प्रदेश के हेडक्‍वाटर के सामने 12 महिलाओं निर्वस्‍त्र होकर प्रदर्शन किया था।

2023 की हिंसा के दौरान आंदोलन

3 मई 2023 के बाद आरक्षण के मुद्दें पर शुरू हुई इस हिंसा के बीच ने मोर्चा लिया और अपने समुदाय के लिए न्याय की मांग करते हुए आंदोलन किया।

जानें मणिपुर में क्‍यों भढ़की हिंसा

बता दें मणिुपुर में हिंसा 3 मई से शुरू हुई। जिसकी वजह आरक्षण है। यहां के मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति यानी एसटी कोटे में शामिल करने की मांग का विरोध करने के लिए स्‍टूडेंन्‍ट्स के संगठन ने एक आदिवासी एकता मार्च निकाला जिसके बाद ये हिंसा जो भड़की वो शांत होने का नाम ही नहीं ले रही है जबकि अब तक कई मासूमों की जान जा चुकी है।Manipur: महिलाओं को निर्वस्‍त्र परेड कराए जाने वाले मामले में तीन और मुख्‍य आरोपियों को पुलिस ने किया अरेस्‍ट

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+