Manipur में राष्ट्रपति शासन के बीच 23 बीजेपी विधायकों की एकजुटता, क्या राज्य में फिर बनेगी सरकार?
Manipur Politics: भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की राजनीति में एक बार फिर तेज हलचलों का दौर शुरू हो गया है। मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 23 विधायकों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की जिसमें राज्य में सरकार को बहाल करने के मुद्दे पर चर्चा की गई। इस बैठक के बाद संयुक्त रुप से एक बयान जारी किया गया है।
इसमें कहा गया कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को किनारे रख कर" राज्य में एक लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए काम करने का संकल्प लिया जा रहा है। बता दें कि मणिपुर में 13 फरवरी 2024 से राष्ट्रपति शासन लागू है, और विधानसभा को निलंबित रखा गया है।

हालांक, इससे पहले भी राज्य में राजनीतिक विरोध को खत्म करने की मांग लगातार उठती रही है, खासकर ऐसे समय में जब जनता एक स्थायी समाधान की अपेक्षा कर रही है।
Manipur Politics: भाजपा के 23 विधायकों ने दिखाई एकता
मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं, जिनमें से बीजेपी के पास 37 विधायक हैं। शुक्रवार. 30 मई को हुई एक बैठक में 23 भाजपा विधायक शामिल हुए, लेकिन कूकी समुदाय के सात विधायक इस बैठक से अनुपस्थित रहे। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह और विधानसभा अध्यक्ष ठाकुर सत्या ब्रत सिंह भी शामिल नहीं हुए।
हालांकि, इस चर्चा में वे विधायक भी शामिल थे जिन्होंने पहले बीरेन सिंह के खिलाफ विद्रोह किया था, और वे भी जो उनके समर्थक रहे थे। यह इस ओर इशारा करता है कि भाजपा विधायकों के बीच आपसी मतभेदों को भुलाकर राज्य के हित में एकजुटता बन रही है।
शांति और संवाद को बताया समाधान की कुंजी
शुक्रवार को हुई बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, "जनता की इस गहरी आकांक्षा को स्वीकार करते हुए कि राज्य में एक लोकप्रिय सरकार बने, हमने एकजुटता और निःस्वार्थता के साथ इसके रास्ते पर चर्चा की। हम सबने यह संकल्प लिया कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर मणिपुर और उसके लोगों के व्यापक हित में कार्य करेंगे।"
विधायकों ने यह भी स्पष्ट किया कि मणिपुर में लंबे समय से चले आ रहे जातीय संकट का समाधान केवल समावेशी संवाद और समुदायों के बीच विश्वास बहाली के जरिए ही संभव है। उन्होंने एक तटस्थ संवाद मंच की स्थापना की जोरदार वकालत की, ताकि मीतई और कूकी-जो समुदायों के बीच रचनात्मक मध्यस्थता के जरिए समाधान निकाला जा सके।
बयान में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि राज्यपाल या भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से अनुरोध किया जाएगा कि वे एक तटस्थ शांति दूत या प्रतिष्ठित व्यक्तियों की समिति नियुक्त करें, जिसमें मणिपुर के भीतर और बाहर के विशेषज्ञ शामिल हों।
जमीनी स्तर पर संवाद और हथियारों की बरामदगी की मांग
संयुक्त बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि समुदायों के बीच जमीनी स्तर पर आमजन संवाद (people-to-people dialogue) आवश्यक है, ताकि भरोसे की नींव पर स्थायी शांति स्थापित की जा सके। इसके साथ ही घाटी और पहाड़ियों दोनों क्षेत्रों में लूटे गए हथियारों की बरामदगी को भी अत्यंत जरूरी बताया गया।
44 विधायकों ने दिया था समर्थन
इस बैठक से दो दिन पहले, 28 मई को 10 एनडीए विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मणिपुर के राज्यपाल अजय भल्ला से मुलाकात की थी। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें 44 विधायकों का समर्थन प्राप्त है और वे राज्य में एक स्थिर और लोकप्रिय सरकार बनाने के लिए तैयार हैं।
Manipur Politics: मई 2023 से जारी है मणिपुर संकट
मणिपुर में मौतेई और कूकी-जो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष की शुरुआत 3 मई 2023 से हुई थी, जो अब तक थमा नहीं है। इस संघर्ष में हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। राज्य में भारी सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। भाजपा विधायकों की यह पहल इस बात का संकेत है कि राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं।
हालांकि यह देखना अभी बाकी है कि क्या यह पहल वाकई मणिपुर के राजनीतिक और सामाजिक संकट का स्थायी समाधान बन सकेगी। या फिर यह भी केवल एक और अस्थायी राजनीतिक कवायद बनकर रह जाएगी।












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