'...मेरे लिए वापस आना', Manipur में स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी ने पोते से लिया वादा, फिर जिंदा जला दी गई
मणिपुर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की बुजुर्ग पत्नी को घर के अंदर ही जिंदा जला दिया गया। लेकिन मौत के बीच भी जीने की आस था, तभी अपने पोते से बुजुर्ग महिला ने वादा लिया था।
Manipur Freedom Fighter Wife burnt: मणिपुर में 3 मई को शुरू हुई जातीय हिंसा थम नहीं रही। राजधानी इंफाल से करीब 45 किलोमीटर दूर एक गांव, जिसका नाम सुरम्य है वो अब वीरान हो चुका है। यही हालत मणिपुर के कई इलाकों में है। बात सुरम्य गांव की इसलिए ही रही है, क्योंकि यहां उपद्रवियों ने घरो में ही तोड़फोड़ नहीं की बल्कि जमकर हिंसा भी की। सुरम्य गांव एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पत्नी को जिंदा घर में जला दिया गया। मरने पहले 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की वो अंतिम आवाज पोते के कान में आज भी गूंजती है।
मणिपुर के काकचिंग जिले का सुरम्य गांव सेरौ पुलिस स्टेशन के क्षेत्र में आता है। घटना को लेकर थाने में दर्ज मामले के मुताबिक, सेरौ गांव में स्वतंत्रता सेनानी की 80 वर्षीय पत्नी को हथियारबंद लोगों के गिरोह ने उसके घर के अंदर बंद कर दिया और आग लगा दी। बुजुर्ग महिला के पति का नाम एस चुराचंद सिंह था, जिनकी मृत्यु 80 वर्ष की आयु में हो गई थी। वे एक स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्हें पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने सम्मानित किया था।

इंफाल से 45 किलोमीटर दूर सुरम्य गांव में जमकर जातीय हिंसा देखी गई। ये पूरा गांव अब तबाह हो चुका है। अब केवल जले हुए घर और दीवारों पर गोलियों के छेद देखे जा सकते हैं। लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए यहां से पलायन कर दिया।
80 वर्षीय इबेटोम्बी सुरम्य गांव में अपने घर में रहती थीं। लेकिन 28 मई को अचानक हथियार बंद लोगों ने पूरे गांव के घेर लिया और घरों में जमकर हिंसा और तोड़फोड़ की। इस दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एस चुराचंद सिंह के घर को भी तबाह कर दिया गया। हथियारबंद लोगों ने जब हमला किया तो एस चुराचंद सिहं की पत्नी इबेटोम्बी को घर के अंदर ही जिंदा जला दिया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक इबेटोम्बी को 22 वर्षीय पोते उस भयावह घटना का जिक्र किया जब उसने दादी को छोड़ किसी तरह अपनी जान बचाई। उस वक्त परिस्थिति ऐसी थी कि या तो वो भागकर अपनी जान बचा पाता या फिर दादी से साथ जिंदा जला दिया जाता।
इबेटोम्बी के 22 वर्षीय पोते प्रेमकांत ने कहा कि दादी को जब तक बचाने के प्रयास किया जाता पूरे घर में आग फैल चुकी थी। प्रेमकांत कहा कि हमले के वक्त उन्होंने अपनी दादी को बचाने की कोशिश की थी, इस दौरान उनकी बांह और जांघ में गोलियां लगी।
एनडीटीपी एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रेमकांत ने बताया, "जब हम पर हमला हुआ, तो मेरी दादी ने हमसे कहा कि अभी भागो और कुछ देर बाद वापस आओ। 'मुझे लेने के लिए वापस आओ'। दुर्भाग्य से ये उनके आखिरी शब्द थे।" प्रेमकांत ने बताया कि जब वे घर वापस लौटे तो पूरे घर में आग ही आग थी। प्रेमकांत करीब 2 महीने तक सुरम्य से बाहर सुरक्षित स्थान पर रहे। लेकिन जब वापस लौटे तो फिर से दुखद यादें सामने आईं।
जब प्रेमकांत सुरम्य पहुंचे तो वो वीरान सी पड़ा स्ट्रक्चर था, जो वो अपना आशियाना मानते हैं। वहां अंदर मलबे के बीच एक बेशकीमती तस्वीर भी थी जो इबेटोम्बी को बहुत प्रिय थी। ये पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ उनके स्वतंत्रता सेनानी पति एस चुराचंद सिंह की तस्वीर थी।












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