मंगल पांडे का बलिदान दिवस आज, जिसने फूंका अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल, जानिए इनके जीवन से जुड़े 5 अनसुने किस्से
Mangal Pandey News: आज 8 अप्रैल को स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी मंगल पांडे का पुण्यतिथी है जिसने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता की पहली बिगुल फूंकी थी। इसी दिन भारत माता के महान सपूत को अग्रेजों ने फांसी के फंदे पर लटका दिया था। कहा जाता है कि इसके लिए जब स्थानीय जल्लादों ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया था तो अंग्रेजों को कोलकता से जल्लादों को बुलाना पड़ा था। आइए जानते है उनके जीवन के अनसुने किस्से...
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर पोस्ट करते हुए लिखा- प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत, धर्म व राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर भारतीय स्वाधीनता संग्राम की नींव को मजबूत करने वाले अमर क्रांतिवीर मंगल पांडे के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! बर्बर अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध आपका अतुल्य संघर्ष एवं अविस्मरणीय बलिदान हम भारतीयों के लिए महान प्रेरणा है।

इस कहानी से अधिकांश लोग परिचित है जब 1857 में, कंपनी ने एनफील्ड पी53 राइफल्स में नई कारतूसों का उपयोग शुरू किया, जिनके बारे में माना जाता था इनके कारतूसों को गाय और सूअर की चर्बी से बनाया जाता था। यह हिंदू और मुस्लिम दोनों की आस्था का विषय था। इसके विरूद्ध में 29 मार्च 1857 को, बैरकपुर छावनी में मंगल पांडे ने ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला किया। जिसके वजह से उन्हें गिरफ्तार किया गया और 8 अप्रैल 1857 को फांसी दी गई। इसके बाद पूरे देश में क्रांति की चिंगारी सुलग उठी। चलिए आज आज जानते है इस महान क्रांतिकारी के अनसूने और प्रेरणादायक किस्से।
1. बैरकपुर विद्रोह से पहले ही बगावत की तैयारी शुरू हो चुकी थी
मंगल पांडे ने अचानक विद्रोह नहीं किया था। उन्होंने पहले ही अपने कुछ साथियों को इकट्ठा कर बगावत की योजना बनानी शुरू कर दी थी। उनके पास कई दिनों से यह सूचना थी कि अंग्रेज राइफल के कारतूस में गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो हिंदू और मुस्लिम दोनों के लिए अपवित्र था। उन्होंने चुपचाप कई सैनिकों से बात कर विद्रोह की नींव रखी थी। यह विद्रोह देश के कोने- कोने तक फैल गया था। बिहार, बंगाल, यूपी, महाराष्ट्र और झांसी जैसे जगहों पर तो आंदोलन इतना तेज था कि अंग्रेज काफी डर गए थे।
2. मंगल पांडे ने अंग्रेजों को मारने से पहले की थी आत्महत्या का प्रयास
मंगल पांडे चाहते थे कि वो अंग्रेजों के हाथ पकड़े न जाए इसलिए उन्होंने सिर्फ अंग्रेज अफसरों पर हमला नहीं किया, बल्कि पकड़े जाने से पहले खुद को गोली मारकर आत्महत्या की कोशिश भी की थी ताकि वे अंग्रेजों के हाथ न लगें। उन्होंने अपनी बंदूक की नली अपने सीने की ओर कर ली और पैर की अंगूठे से ट्रिगर दबा दिया। गोली उनके सीने, कंधे और गर्दन को जख्मी कर निकल गई। हालांकि वे बुरी तरह घायल होकर भी ज़िंदा बच गए, और बाद में उन्हें फांसी दी गई।
3. फांसी से पहले उनके अंतिम शब्द
ऐसा कहा जाता है कि जब मंगल पांडे को फांसी दी जा रही थी, तब उन्होंने गर्व से कहा: "मैं मरते-मरते भी तुम्हारे जैसे सैकड़ों को जगा दूंगा।" यह कथन सैनिकों में जोश भर गया और देखते ही देखते 1857 की क्रांति भड़क उठी।
4. एक सैनिक और एक संत का मेल
मंगल पांडे धार्मिक प्रवृत्ति के भी व्यक्ति थे। वे हर रोज पूजा-पाठ करते थे, और सेना में रहते हुए भी उन्होंने अपने धार्मिक आचरण को नहीं छोड़ा। माना जाता है कि विद्रोह से पहले उन्होंने गंगाजल लेकर संकल्प किया था कि वे भारतमाता के लिए अपने प्राण देंगे।
5. 'नगवा' गांव का नाम इतिहास में दर्ज
बहुत कम लोगों को पता होगा कि मंगल पांडे के बलिदान के बाद उनका गांव "नगवा" एक ऐतिहासिक स्थल बन गया है। वहां अब हर साल मेला लगता है और स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया जाता है।












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