'BJP ने कहा था बस 60-70 दिन का काम', सांसद कंगना बोलीं- मुझे तो मंत्री पद चाहिए था!
Mandi MP Kangana Ranaut: बॉलीवुड की बिंदास क्वीन से मंडी की सांसद बनने तक का सफर-एक साल बाद कंगना रनौत ने अपनी सियासी पारी का आईना खुद के सामने रखा है। संसद की कुर्सी संभालने के बाद क्या-क्या बदला, क्या उम्मीदें टूटी और किन हकीकतों से सामना हुआ-इन तमाम पहलुओं पर उन्होंने Times Now को दिए इंटरव्यू में बेबाकी से बात की।
सांसद बनने का जो सपना पहले आसान सा लगा था, वो अब उन्हें कहीं ज़्यादा जिम्मेदारियों और चुनौतियों से भरा नजर आ रहा है।

"सांसद की भूमिका उतनी आसान नहीं जितनी मैंने सोची थी"
टाइम्स नाउ से बातचीत में कंगना ने स्वीकार किया कि उन्होंने इस जिम्मेदारी को शुरुआत में कुछ हल्के में लिया था। उन्होंने कहा, "मुझे लगा था कि सांसद बनना शायद इतना मुश्किल नहीं होगा। जब मुझे यह जिम्मेदारी दी गई, तो बताया गया कि साल में लगभग 60-70 दिन संसद में उपस्थिति देनी होगी, बाकी समय अपने अन्य कामों के लिए रहेगा, जो मुझे काफी वाजिब लगा। लेकिन यह काम बेहद मांग वाला है, इससे कहीं ज्यादा,"।
फिल्मी करियर पर पड़ा असर: Kangana Ranaut MP
राजनीति में सक्रिय होने के बाद कंगना की अब तक केवल एक फिल्म 'इमरजेंसी' रिलीज़ हुई है, जिसकी शूटिंग वह पहले ही पूरी कर चुकी थीं। इसके अलावा वह किसी नए हिंदी प्रोजेक्ट से नहीं जुड़ी हैं, हालांकि खबरें हैं कि वह जल्द ही अपने पहले हॉलीवुड प्रोजेक्ट पर काम शुरू करेंगी।
मंडी की सीट और सीमित अधिकार
कंगना ने बताया कि हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद के तौर पर उन्हें रोज ऐसे मुद्दों का सामना करना पड़ता है, जिन पर उनका कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता, लेकिन जनता की उम्मीदें उनसे जुड़ी होती हैं। कंगना ने कहा कि "लोग मेरे पास समस्याएं लेकर आते हैं, जो कई बार मेरी शक्ति से बाहर होती हैं, लेकिन मैं उन्हें मना नहीं कर पाती और कह देती हूँ कि मैं हल निकालूंगी।"
उन्होंने अपनी भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा, "हम सांसद राज्य और केंद्र सरकार के बीच एक पुल होते हैं। हम केंद्र से राज्य के लिए परियोजनाएं लाते हैं और अपने क्षेत्र की समस्याओं को केंद्र तक पहुंचाते हैं। हमारे पास कोई कैबिनेट या नौकरशाही नहीं होती, सिर्फ डिप्टी कमिश्नरों के साथ बैठक कर समीक्षा कर सकते हैं और फीडबैक दे सकते हैं।"
विपक्ष का हमला: "नहीं निभा सकतीं जिम्मेदारी तो इस्तीफा दें"
कंगना के इस बयान पर हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री जगत सिंह नेगी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि कंगना रनौत को सांसद होने की जिम्मेदारियां निभाने में कठिनाई हो रही है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।
यह टिप्पणी उस वक्त आई, जब हाल ही में कंगना ने मंडी जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था और मीडिया से कहा था, "राहत और पुनर्निर्माण का कार्य राज्य सरकार को करना है। एक सांसद के रूप में मैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को स्थिति से अवगत करा सकती हूं और उदार मदद मांग सकती हूं।"
आपदा प्रभावित मंडी में जन आक्रोश
बता दें कि 30 जून की रात से 1 जुलाई की सुबह तक मंडी जिले में हुई 10 बादल फटने की घटनाओं और उसके बाद आई बाढ़ व भूस्खलन ने तबाही मचा दी। इस आपदा में 15 लोगों की जान चली गई, 5 लोग घायल हुए और 27 लोग अब भी लापता हैं। राहत एवं बचाव कार्य अब भी जारी हैं। इस स्थिति में सांसद कंगना रनौत की सीमित भूमिका बताना स्थानीय जनता और विपक्ष को रास नहीं आया।
कई लोगों का कहना है कि यह समय अपनी जिम्मेदारियों से हाथ खींचने का नहीं, बल्कि हर स्तर पर जनता के साथ खड़े होने का है। कंगना रनौत की यह स्वीकारोक्ति कि सांसद का काम उनकी अपेक्षाओं से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण है, एक ईमानदार बयान तो है, लेकिन इससे उनकी राजनीतिक परिपक्वता और जिम्मेदारी पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। राजनीति में चमक-दमक से अलग जो जमीनी सच्चाइयाँ होती हैं, उनसे जूझना अब उनकी असल परीक्षा है।
राजनीति और ग्लैमर के बीच संतुलन साधने की यह कोशिश उनके लिए आसान नहीं होगी। एक साल बाद कंगना भले ही कुछ 'कड़वे सच' समझ पाई हों, लेकिन आने वाले वर्षों में जनता की अपेक्षाएं और जिम्मेदारियाँ और भी बढ़ेंगी - सवाल है, क्या कंगना उसके लिए तैयार हैं?












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