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Operation Sindoor के लिए सर्वदलीय डेलिगेशन पर TMC शांत, मोदी सरकार पर Mamata Banerjee क्यों हुईं मेहरबान?

Mamata Banerjee: ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताने के लिए भारत सरकार एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विदेशों में भेज रही है। आम तौर पर सरकार के हर फैसले का मुखर विरोध करने वाली टीएमसी इस मुद्दे पर यूटर्न लेते हुए अब बेहद शांत नजर आ रही है। पहले इस डेलिगेशन में टीएमसी (TMC) की ओर से यूसुफ पठान को शामिल किया गया था। हालांकि, उनके इनकार के बाद इस डेलिगेशन में पार्टी की ओर से अभिषेक बनर्जी शामिल होंगे। अभिषेक के इस डेलिगेशन के साथ भेजने का फैसला टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लिया है। कांग्रेस जहां शशि थरूर को एक डेलिगेशन का नेतृत्व सौंपने पर विरोध कर अपनी किरकिरी करा रही है, दूसरी ओर टीएमसी ने अपना रुख नर्म ही रखा है।

Mamata Banerjee के फैसले के पीछे रणनीतिक समझदारी

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पूरे देश में गम और गुस्से का माहौल है। ऑपरेशन सिंदूर हर भारतीय के लिए जख्म पर मरहम लगाने जैसा साबित हो रहा है। ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना के लिए देश में इस वक्त सम्मान के साथ काफी भावुक माहौल भी बना है। यही वजह है कि लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के ऑपरेशन सिंदूर पर उठाए सवालों को लेकर खुद पार्टी के नेता और समर्थक भी बहुत सहज नहीं है। ममता बनर्जी ने देश के माहौल के साथ बंगाल में होने वाले 2026 विधानसभा चुनावों को देखते हुए समझदारी के साथ अपना रुख शांत कर लिया है।

Mamata Banerjee

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ममता का पूरा फोकस बंगाल विधानसभा चुनाव पर

बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के लिए बीजेपी की चुनौती से निपटना आसान नहीं है। टीएमसी इंडिया अलायंस के साथ गठबंधन के मूड में नहीं है। ऐसे में अगर प्रदेश की सत्ता की चाबी पार्टी को फिर से पानी है, तो उन्हें अपने पुराने वोटर्स के साथ पिछले एक दशक में बीजेपी की ओर हुए वोटरों के झुकाव को भी पलटना है। बीजेपी के राष्ट्रवाद के नैरेटिव को चुनौती देने और बंगाल में तुष्टिकरण के आरोपों को खारिज करने के लिए टीएमसी को आने वाले महीनों में एक-एक कदम फूंककर रखना होगा। ऐसे में कोई छोटी सी चूक भी पार्टी के वोट बैंक के छिटकने की वजह बन सकती है।

इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर और प्रदेश की मौजूदा स्थितियों को देखकर ममता बनर्जी ऑपरेशन सिंदूर पर किसी तरह की बयानबाजी से बचती नजर आ रही हैं। साथ ही, वह यह संदेश भी देना चाहती हैं कि तुष्टिकरण के लगाए जाने वाले आरोपों में कोई दम नहीं है। राष्ट्रीय मुद्दों और देश की एकता की जहां भी बात आती है उनकी पार्टी मजबूती के साथ राष्ट्रहित में खड़ी है।

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