छात्रों की नाराजगी या सोची-समझी साजिश? पटना पाटलिपुत्र स्टेशन हिंसा के बीच क्यों चर्चा में आया खान सर का नाम?
Bihar Student Protest: बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर छात्रों के आंदोलन और हंगामे को लेकर चर्चा में है। रविवार सुबह पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर उस समय हालात बिगड़ गए जब मद्य निषेध विभाग की सिपाही भर्ती परीक्षा देने जा रहे अभ्यर्थियों की भीड़ का एक हिस्सा उग्र हो गया। स्टेशन पर तोड़फोड़, पत्थरबाजी और ट्रैक जाम जैसी घटनाएं सामने आईं, जिसमें रेल आईजी जितेंद्र राणा समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
शुरुआती तौर पर इसे परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच पाने की चिंता से उपजा गुस्सा माना गया, लेकिन पुलिस अब इस पूरे मामले को केवल छात्रों की नाराजगी नहीं मान रही है। अधिकारियों को शक है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने छात्रों की भीड़ का फायदा उठाकर माहौल बिगाड़ने का काम किया। हाल के महीनों में बिहार में छात्र आंदोलनों की बढ़ती घटनाओं और खान सर से जुड़े विवादों के बाद इस घटना को भी उसी बड़े परिदृश्य में देखा जा रहा है।

रात से बन रहा था तनाव
प्रशासन के मुताबिक स्टेशन पर तनाव की शुरुआत रविवार सुबह नहीं हुई थी। शनिवार देर रात ही अधिकारियों को सूचना मिलने लगी थी कि कुछ लोग स्टेशन परिसर में भीड़ को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ समूह लगातार विरोध का माहौल बनाए हुए थे।
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अभ्यर्थियों के लिए थीं स्पेशल ट्रेनें
जिला प्रशासन का दावा है कि परीक्षा देने जा रहे छात्रों की सुविधा के लिए पहले से दो विशेष ट्रेनें उपलब्ध कराई गई थीं। इसके बावजूद स्टेशन पर भ्रम और अव्यवस्था का माहौल बन गया। अधिकारियों का कहना है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर अफवाहें फैलाकर छात्रों में बेचैनी पैदा की। रेल पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ लोगों ने बार-बार इमरजेंसी चेन खींचकर ट्रेनों को रोका। इससे ट्रेन संचालन प्रभावित हुआ और बड़ी संख्या में मौजूद अभ्यर्थियों के बीच परीक्षा छूटने का डर बढ़ने लगा। इसी दौरान कई छात्रों को यह बताया गया कि वे समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच पाएंगे।
ट्रैक पर उतरे सैकड़ों छात्र
सुबह होते-होते स्टेशन पर भारी भीड़ जमा हो गई। ट्रेनों की देरी और फैली अफवाहों के बीच बड़ी संख्या में छात्र रेलवे ट्रैक पर उतर गए। इसके चलते कई महत्वपूर्ण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई और स्थिति तेजी से नियंत्रण से बाहर जाने लगी।
समझाने पहुंचे IG, फिर शुरू हुआ पथराव
हालात संभालने के लिए रेल IG जितेंद्र राणा खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत कर ट्रैक खाली करने की अपील की। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बातचीत के दौरान माहौल सामान्य होता दिख रहा था, लेकिन अचानक कुछ लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। हमले में आईजी समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जिस तरह से अचानक बड़े पैमाने पर पत्थर फेंके गए, उससे यह आशंका मजबूत होती है कि कुछ लोगों ने पहले से तैयारी कर रखी थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भीड़ में सक्रिय लोग कौन थे और उनका मकसद क्या था।
छात्र आंदोलनों की नई कड़ी?
बिहार में पिछले कुछ समय से छात्रों से जुड़े आंदोलन लगातार सुर्खियों में रहे हैं। BPSC अभ्यर्थियों के प्रदर्शन से लेकर हाल में खान सर और उनके कोचिंग संस्थान से जुड़े विवादों तक, कई मौकों पर बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरते दिखाई दिए। ऐसे में पाटलिपुत्र स्टेशन की घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी नाराजगी किस तरह बड़े आंदोलनों का रूप ले रही है।
खान सर का नाम चर्चा में क्यों?
हालिया महीनों में खान सर कई छात्र आंदोलनों के दौरान अभ्यर्थियों के समर्थन में खुलकर सामने आए थे। BPSC अभ्यर्थियों के विरोध प्रदर्शन में भी उनका नाम चर्चा में रहा था। हालांकि पाटलिपुत्र स्टेशन पर हुई हिंसा और खान सर के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि न पुलिस ने की है और न ही प्रशासन ने। फिर भी छात्र राजनीति और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों के कारण दोनों घटनाओं की तुलना की जा रही है। लोग ये सवाल भी कर रहे हैं कि अब तक खान सर ने इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी है, क्योंकि खान सर अक्सर छात्रों से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे हैं।
अग्निवीर आंदोलन जैसी दिखी तस्वीर
पुलिस इस घटना की तुलना वर्ष 2022 के अग्निवीर आंदोलन से भी कर रही है। उस दौरान भी रेलवे संपत्ति को निशाना बनाया गया था और ट्रेनों को रोका गया था। अधिकारियों का मानना है कि छात्रों की वास्तविक परेशानियों का फायदा उठाकर कुछ समूह माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं।
500 अज्ञात लोगों पर केस
रेल पुलिस ने इस मामले में छह नामजद लोगों के अलावा करीब 500 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वीडियो और अन्य सबूतों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। टीम में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं। स्टेशन परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के मोबाइल फुटेज की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों का फोकस उन लोगों की पहचान पर है जिन्होंने भीड़ को उकसाने और हिंसा फैलाने में भूमिका निभाई। पुलिस का कहना है कि छात्रों की आड़ में कानून व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
6 पुलिसकर्मी घायल
पत्थरबाजी में रेल आईजी जितेंद्र राणा समेत छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। सभी को इलाज के लिए दानापुर अनुमंडल अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
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