Jayanti Chauhan कौन हैं? पिता बेचने जा रहे थे कंपनी, बेटी ने कमान संभाल‍ते ही ₹7000Cr तक पहुंचा दिया बिजनेस

Who is Jayanti Chauhan: हम लोग जब घर से बाहर निकलते हैं और हमें प्यास लगती है तो दिमाग में सबसे पहले Bisleri बोतल का ख्याल आता है। इंडिया में पैकेज्ड वाटर मॉर्केट में बिसलेरी इतना फ्रेंडली और बड़ा नाम है कि हर सीलबंद पीने के पानी को इसी ब्रांड के नाम से पुकारते हैं। क्‍या आपको पता हैं वाटर मार्केट में राज करने वाली बिसलेरी कंपनी की बांगडोर एक महिला के हाथों में हैं। बिसलेरी का सम्राज्‍य संभाल रही इस वूमेन बिजनेस टाइकून का नाम जयंती चौहान है।

जयंती चौहान वो ही महिला ने जिन्‍होंने कभी अपने पिता की कंपनी को संभालने से साफ इनकार कर दिया था लेकिन जब कंपनी बिकने वाली थी तब उसे संभाल कर आज बिसलेरी के बिजनेस को आ बुलंदियों पर पहुंचा दिया है। आइए जानते हैं जयंती चौहान कौन हैं और बिसलेरी कंपनी इस मुकाम तक कैसे पहुंची?

Who is Jayanti Chauhan

Bisleri कंपनी क्‍यों बेचना चाहते थे जयंती के पिता?

दरअसल, बिसलेरी कंपनी के चेयरमैन रमेश चौहान जो जयंती चौहान के पिता हैं, उन्‍होंने उम्र संबंधी समस्‍याओं के चलते 2022 में अपनी कंपनी बेचने का अहम फैसला कर लिया था। इसकी वजह थी उनकी इकलौती बेटी जयंती पिता का पानी का फैमिली बिनजेस नहीं संभालना चाहती थी इसलिए उनके पास कंपनी चालने के लिए कोई उत्‍तराधिकारी नहीं था।

Who is Jayanti Chauhan

पिता ने कंपनी संभालने के लिए कहा तो जयंती ने साफ इनकार कर दिया था। इसी बड़ी वजह से रमेश चौहान ने कंपनी को बेचने का फैसला लिया था। इसी दौरान भारत के बहुब बड़े औद्योगिक घराने के साथ बिसलेरी कंपनी बेचने की डील लगभग तय हो गई थी लेकिन...

बिसलेरी कंपनी नहीं बिकी, क्‍यों टूट गई डील?

करीब 7,000 करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यूएशन वाली बिसलेरी कंपनी को खरीदने की तैयारी टाटा ग्रुप ने पूरी कर ली थी। साल 2022 में दोनों पक्षों के बीच अहम बातचीत का दौर चल रहा था और सब कुछ फाइनल होने ही वाला था लेकिन अंतिम समय में वैल्यूएशन को लेकर बात फंस गई और यह बड़ी डील टूट गई।

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इस डील के टूटने के बाद कंपनी के भविष्य पर फिर से बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया था। रमेश चौहान अपने खून-पसीने से खड़ी की कंपनी की कमान किसी विश्‍वासपात्र और मजबूत हाथ में सौंपना चाहते थे। टाटा के साथ हुई डील टूटनके बाद पारिवारिक बिजनेस की दिशा पूरी तरह बदल गई।

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जयंती चौहान के फैसले ने बदल दी बिसलेरी की तकदीर

टाटा ग्रुप के साथ डील अधूरी रहने के बाद जयंती चौहान ने अपनी सोच बदली और पिता के कारोबार को खुद आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। बिसलेरी इंटरनेशनल में वाइस चेयरपर्सन का पद संभाल रही जयंती की मॉर्केट स्‍ट्रैटजी के दम पर कंपनी अब तेजी से ग्रोथ कर रही है।

Who is Jayanti Chauhan

Who is Jayanti Chauhan कौन है जयंती चौहान?

जयंती चौहान ने लॉस एंजिल्स के फेमस फैशन इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन एंड मर्चेंडाइजिंग से पढ़ाई की है जहां उन्होंने प्रोडक्ट डेवलपमेंट विषय का स्‍टडी की है। उनकी और समझ का असर कंपनी की स्‍ट्रैटजी में साफ दिख रहा है। वह नई टीम के साथ ब्रांड को नए-नए फील्‍ड और संभावनाओं तक ले जा रही हैं।

History of Bisleri: पानी नहीं तो पहले क्‍या बनाती थी Bisleri?

बिसलेरी ब्रांड का इतिहास भारत से नहीं बल्कि सीधे इटली से जुड़ा है। आपको जानकर ताज्‍जुब होगा कि ये कंपनी बिसलेरी पानी नहीं बेचती थी, बल्कि एक फार्मा कंपनी के रूप में मलेरिया का इलाज करने वाली दवा का प्रोडक्‍शन करती थी। कंपनी के संस्थापक फेलिस बिसलेरी थे, जिनके निधन के बाद डॉक्टर रॉसी ने कामकाज की जिम्मेदारी संभाली थी।

How Bisleri Started in India: कंपनी की शुरूआत?

डॉक्टर रॉसी ने बिजनेस को बढ़ाने के लिए भारत आ गए और उन्‍होंने मुंबई के वकील खुसरो संतुक के साथ मिलकर काम शुरू किया। साल 1965 में दोनों ने मिलकर मुंबई के ठाणे में बिसलेरी का पहला प्लांट स्थापित किया। बंद बोतल में साधारण पानी बेचने का आइडिया उस समय लोगों को काफी अजीब लगता था।

60वें दशक में बोतल बंद पानी बेचना क्‍या आसान था?

साठ के दशक की शुरुआत में जब कांच की बोतलों में पानी बेचना शुरू किया गया, तो अधिकांश लोगों ने इसे फेल होने वाली सोच समझी थी। किसी ने नहीं सोचा था कि भारत में लोग पानी खरीद कर पीएंगे। पर डॉक्टर रॉसी विश्वास के साथ आगे बढ़े और मुंबई में इस अनोखे प्रयोग की मजबूत नींव रखी।

पार्ले की एंट्री और बिसलेरी का नया दौर

साल 1969 में पार्ले समूह ने बिसलेरी (इन्डिया) लिमिटेड को खरीद कर इस ब्रांड को एक नया रूप दे दिया। पार्ले ने कांच की पुरानी बोतलों को बदलकर पीवीसी नॉन-रिटर्न बोतलों और टिकाऊ पेट कंटेनर्स का इस्तेमाल शुरू किया। इसके बाद देश के आम लोगों तक बिसलेरी पानी की पहुंच काफी सुलभ हो गई।

जयंती चौहान के पिता ने कब संभाली Bisleri की कमान?

साल 1995 में रमेश चौहान ने बिसलेरी बिजनेस की कमान खुद संभाली और ब्रांड को नई बुलंदियों पर पहुंचाया। उन्होंने लगातार मेहनत और देशव्यापी वितरण नेटवर्क के बल पर बिसलेरी को बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना दिया। आज पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के क्षेत्र में इस कंपनी का बाजार में कोई मुकाबला नहीं है।

Bisleri Revenue and Business Growth: कितना हैं कंपनी का रेवेन्‍यू?

जयंती चौहान के मैनेजमेंट और दिशा-निर्देशन में बिसलेरी ने अब कार्बोनेटेड कोल्‍ड वॉटर के बड़ी मॉर्केट में भी शानदार एंट्री कर ली है। नए प्रोडक्ट्स के जुड़ने से इनका रेवेन्यू तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में बिसलेरी इंटरनेशनल का Annual Operating Revenue लगभग 2,600 करोड़ रुपये से अधिक है, जो अविश्वसनीय सफल सफर का प्रमाण है।

जयंती चौहान का साहसिक फैसला न केवल उनके पिता की ऐतिहासिक विरासत को बचाने में मददगार साबित हुआ, बल्कि ब्रांड को आज एक आधुनिक और सफल कॉर्पोरेट की पहचान भी दिला रहा है। उनके नेतृत्व में बिसलेरी वर्तमान बाजार की चुनौतियों का मुकाबला करते हुए लगातार अपनी स्थिति को और मजबूत बना रही है।

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