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'ऑपरेशन सिंदूर' वाली सांसदों की टीम से आखिर ममता बनर्जी ने क्यों बनाई दूरी? यूसुफ पठान से कहा- नहीं जाना है

Mamata Banerjee Yusuf Pathan: भारत आतंकवाद को पनाह देने वाला देश पाकिस्तान के खिलाफ 'पॉलिटिकल डिप्लोमेटिक स्ट्राइक' का ऐलान कर सुर्खियां बटोर रहा है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान की पोल खोलने के लिए अलग-अलग देशों में भारत के सांसदों की टीम भेजने का फैसला किया है। इस भारतीय डेलिगेशन में पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर यूसुफ पठान का भी नाम शामिल था। लेकिन अब यूसुफ पठान पाक की पोल खोलने विदेश की यात्रा पर नहीं जाएंगे...क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्होंने साफ-साफ ना जाने को कहा है।

असल में ममता बनर्जी की अगुआई वाली तृणमूल कांग्रेस ने रविवार (18 मई) को केंद्र सरकार को सूचित किया कि वह पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा संदेश देने के लिए विदेश भेजे जा रहे सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में शामिल नहीं होगी।

Mamata Banerjee Yusuf Pathan

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने प्रतिनिधिमंडल में शामिल अपने लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को आधिकारिक यात्रा का हिस्सा न बनने का निर्देश दिया है। हालांकि टीएमसी ने बाहर होने का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन केंद्र सरकार को इस फैसले के बारे में उन्होंने जानकारी दे दी है।

यूसुफ पठान ने कहा- मैं उस वक्त उपलब्ध नहीं रहूंगा

टीएमसी सांसद यूसुफ पठान ने अधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार को जानकारी दी है कि वो इस दौरे के लिए उस वक्त उपलब्ध नहीं रहेंगे। हालांकि उन्होंने इसके पीछे कोई कारण नहीं बताया है। सूत्रों का कहना है कि सरकार ने टीएमसी से नहीं बल्कि एक सीधे सांसद युसूफ पठान से संपर्क किया था।

सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी की अगुआई वाली पार्टी टीएमसी सरकार के अपने नेतृत्व से सलाह किए बिना खुद ही सांसद चुनने के कदम से सहमत नहीं थी...इसलिए पहलगाम के बाद वैश्विक पहुंच अभियान का हिस्सा नहीं बनने का फैसला किया है।

पाकिस्तान की पोल खोलने वाली सांसदों की टीम में कौन-कौन?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने घोषणा की है कि वह आतंकवाद पर भारत की स्थिति के लिए कूटनीतिक समर्थन बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के सदस्य देशों सहित प्रमुख वैश्विक राजधानियों में सात सांसदों की प्रतिनिधिमंडल भेजेगी। ये प्रतिनिधिमंडल ऑपरेशन सिंदूर और सीमापार आतंकवाद विरोधी अभियान को लेकर दुनिया के सामने अपनी बात रखेंगे।

भारतीय डेलिगेशन की इस टीम में अलग-अलग राजनीतिक दलों के अनुभवी सांसदों को शामिल किया गया है, जिनमें शशि थरूर (कांग्रेस), रविशंकर प्रसाद और बैजयंत पांडा (भाजपा), संजय कुमार झा (जेडीयू), कनिमोझी (डीएमके), सुप्रिया सुले (एनसीपी-एसपी) और श्रीकांत शिंदे (शिवसेना) शामिल हैं।

कुल मिलाकर, मौजूदा सांसदों और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों सहित 51 नेता 32 देशों और ब्रुसेल्स में यूरोपीय संघ के मुख्यालय का दौरा करेंगे। इस लीड करने वाले सातों सांसदों की टीम में कई और सांसद भी शामिल हैं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर इस पहल को लेकर एक पोस्ट में कहा, ''एक मिशन। एक संदेश। एक भारत। सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जल्द ही ऑपरेशन सिंदूर के तहत प्रमुख देशों से जुड़ेंगे, जो आतंकवाद के खिलाफ हमारे सामूहिक संकल्प को दिखाता है।''

प्रतिनिधिमंडल में पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद, एमजे अकबर, आनंद शर्मा, वी मुरलीधरन, सलमान खुर्शीद, एसएस अहलूवालिया भी शामिल हैं, जो वर्तमान में संसद के सदस्य नहीं हैं।

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