Malegaon Blast Case: 'हिंदू आतंकवाद' पर फिर गरमाई सियासत, मालेगांव केस पर नेताओं ने क्या कहा?
Malegaon Blast Case: 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में करीब 17 साल बाद फैसला आ गया है। मुंबई की एनआईए विशेष अदालत ने 31 जुलाई को साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित समेत सभी सात आरोपियों को "सबूतों के अभाव में" बरी कर दिया। यह फैसला उस मामले में आया है जिसने एक दशक से भी अधिक समय तक देश की राजनीति, न्याय प्रणाली और सामाजिक विमर्श को झकझोर कर रख दिया था।
8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए इस विस्फोट में 37 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। पहले इस हमले के लिए सिमी और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया गया था, लेकिन बाद में जांच का रुख कथित 'हिंदू आतंकवाद' की ओर मोड़ दिया गया।

साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और 'भगवा आतंक' जैसे शब्द राजनीति और मीडिया की चर्चाओं में शामिल हो गए। अब जब एनआईए कोर्ट ने इन सभी आरोपियों को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका, तो इस फैसले ने एक बार फिर देश की सियासी जमीन को गर्म कर दिया है।
Malegaon case reaction: BJP नेताओं ने क्या कहा?
भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह एक बहुत अच्छा निर्णय है और हम सभी खुश हैं। 17 साल से यह लड़ाई चल रही थी और साध्वी प्रज्ञा सिंह, कर्नल पुरोहित जैसे लोगों पर बिना किसी ठोस आधार के आरोप लगाए गए। उन्हें 'भगवा आतंकवादी' कहकर बदनाम किया गया।"
उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा आतंकवाद को "बैलेंस" करने की कोशिश करती रही है, "जब भी आतंकवाद की बात होती है, कांग्रेस कहती है कि उसका कोई धर्म नहीं है। लेकिन सच्चाई सभी जानते हैं। पहलगाम में धर्म पूछकर लोगों को मारा गया - क्या वो धार्मिक आतंकवाद नहीं था?
झूठे नैरेटिव का अंत: हिमंता बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने संसद में सही कहा था कि हिंदू दर्शन कभी आतंकवाद को प्रोत्साहित नहीं करता। कांग्रेस शासन में 'हिंदू आतंकवाद' जैसी शब्दावली एक समुदाय को खुश करने के लिए गढ़ी गई थी। आज कोर्ट के फैसले से इस झूठे नैरेटिव का अंत हो गया। सीएम सरमा ने ये भी कहा कि हिंदू और आतंकवाद, ये दो विपरीत विचारधाराएं हैं। हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकता।"
#WATCH | Guwahati, Assam: On NIA court acquitting all the accused in the Malegaon Blast case, Assam CM Himanta Biswa Sarma says, "Union HM also told in the House yesterday that Hindus by philosophy, cannot be terrorists because our culture and our civilisation never encourages… pic.twitter.com/O9uDEON4bc
— ANI (@ANI) July 31, 2025
वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि हिंदू आतंकवाद की कांग्रेस की साजिश आज नष्ट हो गई। कर्नल पुरोहित, जो कश्मीर में आतंक के खिलाफ लड़े, उन्हें झूठे केस में फंसाया गया। साध्वी प्रज्ञा को तो इतनी यातना दी गई कि वह चल भी नहीं सकीं। यह सब वोटबैंक की राजनीति के लिए हुआ। भाजपा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम ने मालेगांव ब्लास्ट मामले में एनआईए कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'भगवा आतंक' जैसे शब्दों का इस्तेमाल पूरी तरह से अनुचित था। उन्होंने कहा, "कोर्ट ने अपने फैसले में साफ तौर पर कहा है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा। इसका साफ मतलब है कि अभियोजन पक्ष उन गंभीर आरोपों को पुख्ता सबूतों के साथ पेश नहीं कर पाया, जो आरोपियों पर लगाए गए थे।"
कांग्रेस की प्रतिक्रिया: 'यह फैसला है, न्याय नहीं'
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने इस फैसले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। राज्यसभा सांसद ने कहा कि "कांग्रेस पार्टी शुरू से कहती आई है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। 'हिंदू टेरर' शब्द तत्कालीन गृह सचिव आर.के. सिंह ने गढ़ा था, जिसे भाजपा ने बाद में मंत्री और सांसद बना लिया।"
#WATCH | Delhi: On NIA court acquitting all the accused in the Malegaon Blast case, Congress MP Imran Pratapgarhi says, "The Congress party has been saying from the first day that religion is not associated with terrorism. This term was coined by the then Home Secretary RK Singh.… pic.twitter.com/MCQb3b7vfX
— ANI (@ANI) July 31, 2025
उन्होंने कहा कि यह एक निर्णय है, न्याय नहीं। भाजपा तो शुरू से ही इन आरोपियों को मानने को तैयार नहीं थी।
क्या था मालेगांव धमाका मामला?
8 सितंबर 2006 को महाराष्ट्र के नासिक ज़िले के मालेगांव में बम धमाका हुआ था जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे। मामले की जांच पहले महाराष्ट्र ATS और फिर 2011 में NIA ने संभाली। इसमें साध्वी प्रज्ञा, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, सुधाकर चतुर्वेदी और अन्य को आरोपी बनाया गया था। NIA ने दावा किया था कि धमाके में जिस मोटरसाइकिल का इस्तेमाल हुआ, वह साध्वी प्रज्ञा की थी। लेकिन कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा।
NIA कोर्ट का यह फैसला न केवल आरोपियों को राहत देता है, बल्कि "हिंदू आतंकवाद बनाम धार्मिक आतंकवाद" की पुरानी बहस को भी फिर से ज़िंदा कर देता है। एक तरफ भाजपा इसे कांग्रेस की 'साजिश' बताकर हिंदू धर्म को आतंकवाद से अलग करने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे "राजनीतिक एजेंडा" बता रही है।












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