Maharashtra Politics: मराठा आरक्षण और OBC की शर्तें, दो-दो चुनौतियों से कैसे निपटेगी शिंदे सरकार?
महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली महायुती सरकार पहली बार बाहर से ही नहीं, घर के अंदर खड़ी हुई चुनौती का भी सामना कर रही है। मराठा आरक्षण की मांग करने वाले आंदोलनकारियों के अगुवा बार-बार सरकार को 24 दिसंबर की डेडलाइन याद दिला रहे हैं। लेकिन, खुद सरकार के कैबिनेट मंत्री छगन भुजबल इसके खिलाफ झंडा उठा चुके हैं।
भुजबल की अगुवाई वाले ऑल इंडिया महात्मा फुले समता परिषद ने बुधवार को कहा है कि वह 17 नवंबर को जालना जिले के अंबेड में ओबीसी समुदाय की एक रैली आयोजित कर रहा है, जिसमें 50,000 से ज्यादा लोगों को जुटाया जाएगा। इस रैली का एजेंडा मराठा समुदाय को किसी तरह से भी ओबीसी आरक्षण का लाभ देने से रोकना है।

भुजबल के संगठन ने बुलाई ओबीसी रैली
यह ओबीसी संगठन राज्य के सभी ओबीसी विधायकों को भी इस रैली में पहुंचने का निमंत्रण देने वाला है। यह संगठन मराठा समुदाय को ओबीसी आरक्षण में शामिल करने का विरोध तो करता ही है, इसे कुनबी जाति वाला सर्टिफिकेट देकर ओबीसी का दर्जा देने के भी खिलाफ है। खास बात ये है कि जिस अंबेड में यह ओबीसी रैली आयोजित होने वाली है, वह अंतरवाली सराटी से कुछ किलोमीटर ही दूर है, जहां मनोज जारांगे मराठा आरक्षण की मांग को लेकर हाल ही में दो-दो बार भूख हड़ताल कर चुके हैं।
मराठा आंदोलनकारियों ने 24 दिसंबर की दी है डेडलाइन
यही नहीं भुजबल का संगठन मराठाओं को ओबीसी आरक्षण देने के विरोध में 26 नवंबर को हिंगोली में भी एक और रैली करने की योजना बना रहा है। उधर जारांगे ने कहा है कि अगर सरकार इस बार 24 दिसंबर की डेडलाइन से चूकी तो वह उन नेताओं क नाम का खुलासा करेंगे, जिन्होंने खुद तो पिछले 20 वर्षों से आरक्षण का फायदा उठाया है, लेकिन मराठा समुदाय को इससे वंचित रखा है।
अपनी ही सरकार से मोर्चा लेने का तैयार हैं भुजबल
ऐसे में बीजेपी, शिवसेना और अजित पवार गुट की एनसीपी वाली महायुती सरकार के सामने समस्या है कि वह इन दो-दो चुनौतियों से कैसे निपटे। सोमवार को भुजबल धमकी दे चुके हैं कि अगर ओबीसी कोटा में किसी तरह से मराठा को घुसाया गया तो वह अपनी ही सरकार के खिलाफ जाने को तैयार हैं।
सीएम शिंदे मंत्रियों से कह रहे हैं एकजुटता दिखाएं
सीएम शिंदे को अपनी सरकार के सामने खड़े हुए दोहरे संकट का पूरा अंदाजा है। उन्होंने बुधवार को एक बैठक बुलाकर कैबिनेट मंत्रियों से कहा कि शांत रहें और एकजुटता दिखाएं। इस बैठक में शामिल एक मंत्री ने इसके बारे में कहा, 'मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई सार्वजनिक बयानबाजी और अंदरूनी कलह नहीं होनी चाहिए और कैबिनेट मंत्रियों को एक ही सुर में बोलना चाहिए और सरकार की ओर से लिए गए फैसलों से अलग नहीं कहना चाहिए।'
दरअसल, भुजबल एक ओबीसी नेता हैं और अजित पवार गुट के एनसीपी कोटे से मंत्री हैं। सीएम शिंदे ओबीसी कोटा को लेकर भुजबल की टिप्पणियों पर पहले भी नाखुशी जता चुके हैं और कह चुके हैं कि ओबीसी समुदाय या अन्य समुदायओं के मन में किसी तरह का भ्रम नहीं पैदा किया जाना चाहिए।
सूत्रों का कहना है कि भुजबल ने आरोप लगाया है बीड जिले में मराठा कोटा आंदोलनकारी मनोज जारांगे के हालिया भूख हड़ताल के बाद बीड में ओबीसी समुदाय को निशाना बनाया गया। एक मंत्री ने कहा, 'भुजबल ने कहा कि ओबीसी के घरों को भीड़ की ओर से निशाना बनाया गया। आगजनी और पथराव किए गए।'
उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि सितंबर में जारांगे समर्थकों पर लाठीचार्ज के बाद पुलिस अधिकारियों पर जो कार्रवाई हुई, उससे उनका मनोबल गिरा हुआ है, इसलिए उन्होंने कार्रवाई नहीं की। जानकारी के मुताबिक ओबीसी समुदाय के एक और नेता धनंजय मुंडे ने भी भुजबल का समर्थन किया है।












Click it and Unblock the Notifications