शिक्षा और उद्यमशीलता के बल पर महाराष्ट्र लिख रहा है विकास की नई पटकथा
उद्यमशीलता किसी भी देश की आर्थिक प्रगति की नींव है। उद्यमी केवल पैदा नहीं होते, बल्कि उन्हें बनाया भी जाता है। देश भर में कई प्रसिद्ध अभियंत्रण और प्रबंधन संस्थान गुणवत्तापूर्ण, नैतिक और कुशल उद्यमियों को विकसित करने के लिए समर्पित हैं। पुणे को महाराष्ट्र का शैक्षणिक केंद्र माना जाता है, और अब, नागपुर में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) ने प्रबंधन शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाई दी है।
विश्वस्तरीय सुविधाओं और अद्भुत वास्तुकला के लिए विख्यात, आईआईएम नागपुर ने उत्कृष्टता का उदाहरण स्थापित किया है। आईआईएम अहमदाबाद के सहयोग से वर्ष 2015 में यहाँ स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किया गया था। अपनी गौरवपूर्ण यात्रा को जारी रखते हुए, आईआईएम नागपुर अब 132 एकड़ के विशाल परिसर में स्थानांतरित हो गया है। अपनी अनेक विशिष्टताओं के कारण यह भविष्योन्मुख परियोजना प्रबंधन और प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

परिसर में प्रवेश करते ही, महाभारत के अद्वीतीय धर्नुर्धर अर्जुन की भव्य प्रतिमा छात्रों को लक्ष्य पर निशाना साधने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकनिष्ठ बने रहने की प्रेरणा है। अनेक अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित परिसर पूरे देश और विदेश के छात्रों को भी आकर्षित करता है।
आईआईएम नागपुर में 20 हाई-टेक कक्षाएं, 24 प्रशिक्षण केंद्र और 400 सीटों वाला प्रेक्षा-गृह है। पहले चरण में 600 से अधिक छात्रों को समायोजित करने के लिए डिज़ाइन किया गया, इस 132 एकड़ के परिसर ने इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा, जापान, डेनमार्क और फ्रांस के विश्वविद्यालयों के साथ वैश्विक साझेदारी की है जिससे छात्रों को विश्व स्तरीय व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त हो सके।
केंद्र सरकार ने उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष बल दिया है। इस दृष्टिकोण के तहत, देश भर में आईआईएम और इसी तरह के प्रमुख संस्थानों का नेटवर्क विस्तारित हो रहा है। इसके अलावा, सरकार ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा भी की है। पीएमश्री योजना के पहले चरण के तहत महाराष्ट्र में 846 स्कूलों का विकास किया जाएगा जिसमें केंद्र सरकार 956 करोड़ रुपये का भारी निवेश करेगी।
अच्छी शिक्षा ही विकास का आधार है। केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने में लगी है कि समाज के सभी वर्गों को उचित सुशिक्षा प्राप्त हो। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अभी तक हाशिए पर रहे वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाया जाए। वंचित छात्र अब प्रसिद्ध संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम हैं। यह परिवर्तन छात्रों के साथ-साथ पूरे समाज के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सरकार की नीतियां और पहल नई पीढ़ी की समृद्धि के लिए अत्यंत लाभदायक होंगी।












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