मराठा आरक्षण पर रोक के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार पहुंची SC, फैसले पर स्टे की अपील
नई दिल्ली। मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके अपील की गई है कि शिक्षण संस्थानों और रोजगार में मराठा समुदाय को मिलने वाले आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया था, उसपर रोक लगाई जाए। बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मराठा समुदाय के लोगों को शिक्षा और रोजगार में किसी भी प्रकार का आरक्षण नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2020-21 सत्र के लिए किसी भी तरह का आरक्षण मराठा समुदाय के लोगों को नहीं दिया जाएगा।

इससे पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा था कि फिलहाल इस पर रोक लगाई जाती है और संवैधानिक बेंच की ओर से इसकी वैधता पर फैसला लिया जाएगा। संवैधानिक बेंच का अर्थ 5 या फिर उससे ज्यादा जजों की बेंच से है। इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस.ए. बोबडे फैसला लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीजी दाखिलों को छेड़ा नहीं जाएगा। चीफ जस्टिस एस ए बोबडे ने कहा कि मामले के लिए बड़ी बेंच का गठन करेंगे जोकि मराठा आरक्षण की वैधता पर विचार करेगी।
बता दें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग अधिनियम, 2018 को नौकरियों और एडमिशनों के लिए में महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए लागू किया गया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने पिछले साल जून में कानून को बरकरार रखते हुए कहा कि 16 प्रतिशत आरक्षण उचित नहीं है। रोजगार में आरक्षण 12 प्रतिशत से और एडमिशन में 13 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और राज्य के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने पिछले दिनों कहा है कि महाराष्ट्र विकास आघाडी सरकार नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय को आरक्षण मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय में अपना पक्ष रखने में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।












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